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कैदी जेल में रहेंगे सपरिवार, कर सकेंगे नौकरी

बक्सर, 18 मार्च | बिहार के बक्सर केंद्रीय जेल के कैदी अब न केवल नौकरी कर सकेंगे, बल्कि अपने बीवी-बच्चों के साथ यहां रह भी सकेंगे। यह सब होगा बक्सर में खुलने वाली ओपन जेल में। बिहार की पहली और देश की 33वीं ‘ओपन जेल’ बक्सर की 42 एकड़ भूमि में तैयार की जा रही है।

यह ओपन जेल इस वर्ष अप्रैल तक तैयार हो जाएगी। आशा की जा रही है कि इसमें मई से कैदियों को रखा जाएगा। इस जेल के कैदी न केवल अपने बीवी-बच्चों के साथ यहां रहेंगे, बल्कि जेल की पांच किलोमीटर की परिधि में वह रोजगार भी कर सकेंगे।

केंद्रीय जेल के काराधीक्षक एस़ क़े अम्बष्ट कहते हैं कि ओपन जेल खोलने का उद्देश्य कैदियों के सामाजीकरण और उन्हें पुनर्वासित करने की है। उन्होंने बताया कि 42 एकड़ की चाहरदीवारी में बन रही यह ओपन जेल 13 भवनों की होगा, जिसमें कुल 104 फ्लैट बन रहे हैं। इतनी ही संख्या में कैदी इन फ्लैटों में रहेंगे। प्रत्येक फ्लैट में दो कमरे होंगे। अम्बष्ट ने कहा कि बिहार में यह पहली ओपन जेल होगी।

अधिकारियों के अनुसार सरकार कैदियों को वस्त्र और भोजन मुहैया कराएगी, जबकि कैदी अपने परिजनों के लिए जरूरी सामग्रियों की व्यवस्था स्वयं करेंगे। इस क्रम में कैदी पांच किलोमीटर तक के दायरे में स्थित किसी निजी कम्पनी में नौकरी कर सकते हैं, लेकिन सुबह छह बजे निकलकर शाम के छह बजे तक उन्हें अपने फ्लैट पर वापस आना पड़ेगा। इस दौरान उनकी सुरक्षा की जिम्मेवारी खुद की होगी। अम्बष्ट हालांकि कहते हैं कि कोई कैदी जहां काम करेगा, जेल प्रशासन उस कम्पनी की जांच कर सकता है।

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जेल प्रशासन का मानना है कि लम्बी अवधि तक जेल में रहने के बाद कैदी जब जेल से निकलते हैं तो उनका जीवन पूरी तरह एकांगी हो जाता है और उनका जीवन पूरी तरह बदला होता है। वह पूरी तरह समाज की मुख्यधारा से कट जाते हैं। ऐसे में या तो वह फिर से पुराने गलत रास्ते पर लौट जाते हैं या फिर वह अपने ही परिवार के लिए बोझ बन जाते हैं। इसीलिए सरकार ने कैदियों के सामाजीकरण के लिए ऐसी व्यवस्था की है।

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ऐतिहासिक बक्सर केंद्रीय जेल में करीब साढ़े आठ करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस ओपन जेल में रहने के लिए कैदियों का चयन एक समिति द्वारा किया जाएगा। इस समिति की अध्यक्षता कारा महानिरीक्षक करेंगे। यह समिति उन्हीं कैदियों को यहां रखने की अनुमति देगा जिन आदर्श कैदियों के सम्बंध में काराधीक्षकों द्वारा अनुशंसित आवेदनपत्र कारा महानिरीक्षक को भेजे जाएंगे।

केंद्रीय जेल के कारापाल मनोज कुमार कहते हैं कि इन कैदियों को रोजगार खोजने के लिए जेल प्रशासन भी मदद करेगा। वह कहते हैं कि दुकान या अन्य रोजगार के लिए कैदियों को ऋण दिलाने में भी जेल प्रशासन मदद करेगा।

यही नहीं, कैदियों को जेल प्रशासन समय-समय पर रोजगार से सम्बंधित प्रशिक्षण भी दिलाएगा। इस जेल में वैसे ही कैदियों को रखा जाएगा जो लम्बी सजा प्राप्त और अधिक सजा काट चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि देश में ओपन जेल की शुरुआत राजस्थान में हुई थी। वहां पहली ओपन जेल वर्ष 1963 में खोली गई थी। उस जेल में सबसे पहले 35 कैदियों को रखा गया था। (मनोज पाठक)

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