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कहीं एक किलोमीटर में दस पार्क, कहीं सात किलोमीटर में एक भी नहीं

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News Wing Team

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शाम को रांची के मोरहाबादी के आसपास के इलाके खासकर मोरहाबादी मैदान के आसपास का नजारा देखते ही बनता है. प्रेमी युगल, दोस्तों और परिवार के साथ आए लागों को मस्ती के मूड में देखा जा सकता है. इसकी वजह इस ये है कि यहां एक किलोमीटर के दायरे में दस पार्क हैं, जिसमें से आधे दर्जन पार्क बहुत ही खर्च कर बनाए गए हैं. इस एक किलोमीटर में अब एक और पार्क करोड़ो के लागत से बनने जा रहा है.

सात किलोमीटर के दायरे में एक भी पार्क नहीं

इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि शहर में तीन बड़े रुट हैं. हर रुट तकरीबन 7 किलोमीटर के दायरे का है जिसमें एक भी पार्क नहीं है. इस वजह से पार्क का लुत्फ लेने के लिए लोगों को मोरहाबादी जाना पड़ता है. और जिस इलाके में पार्क भी है, वहां का वातावरण इतना खराब है कि परिवार के साथ जाने में लोग कतराते हैं. करमटोली से बूटी मोड़ तक एक भी पार्क नहीं हैं. कांटाटोली से बूटी मोड़ के बीच रहने वाले लागों को भी पार्क नसीब नहीं होता, उन्हें भी मोरहाबादी ही आना पड़ता है. साथ ही रातू रोड से कमड़े तक भी एक पार्क बनाने के बारे में नगर निगम ने नहीं सोचा. सभी रुट क्रमश: 6.5, 6.2 और 7 किलोमीटर के हैं.

बदहाल पार्क

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कृष्णा सिंह पार्क में फैमिली की नो पार्किंग

रांची के डोरंडा कॉलेज के समीप बने श्री कृष्णा सिंह पार्क में हर रोज करीब 2500 रुपये की आमदनी रोज होती है. हर दिन करीब 250 से 300 लोग इस पार्क में घूमने आते हैं. या यूं कहें तो यहां सिर्फ कपल ही देखे जाते हैं. पार्कों में अब प्रेमी जोड़ों का कब्जा हो चुका है. वहां मौजूद प्रेमी जोंड़ों को देखकर परिवार के संग इस पार्क में जाने की बात सोची भी नहीं जा सकती. खैर, नगर निगम से लीज में लेकर संचालित किये जा रहे इस पार्क की स्थिति भी दयनीय हो गई है. इस पार्क के सौंदर्य में चार चांद लगाने के लिए बनाए गए वाटर फाउंटेन अब सिर्फ ढांचा मात्र रह गये हैं. पार्क में बनी मूर्तियां भी टूट चूकी हैं, सांप के आकार का बना ढ़ांचा भी अब दरकने लगा है. कुल मिलाकर लोगों के मनोरंजन के लिए बनाए गए इस पार्क को अब फिर से संवारने की जरुरत पड़ने लगी है. राजेन्द्र चौक से बिरसा चौक धुर्वा तक के दायरे में ये एकमा़त्र पार्क है.

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बदहाल पार्क

डिस्टिलरी पार्क का हाल

रांची के कोकर चैक के पास बने नए पार्क की स्थिति अभी ये है कि आम आदमी सैर सपाटे के लिए भी वहां जा नहीं सकता. न तो किसी पेड़ की छांव लोगों को नसीब होती है और न ही बेहतरीन अनुभव के लिए वहां कुछ मौजूद है. बच्चों के लिए चंद झूले मौजूद हैं. इससे भी अलग ये कि वहां पीने के लिए प्याऊ  मौजूद है, पर उसमें नल और पानी का कोई अता पता नहीं. आज से एक सप्ताह पूर्व जब तक फ्री इंट्री थी. आसपास के लोग आते थे पर अब यहां कोई शायद ही देखा जाता है.

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पार्क की बदहाली

नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा पार्क

पिछले महीने ही इस पार्क का उदघाटन किया गया है. जिसके बाद से ये लगातार नशेड़ियों के अडडे के रुप में उभर कर सामने आया, जिसके चर्चे शहर के हर अखबारों में थे. इस पार्क में महंगे घास लगाए गए हैं, जिसके रखरखाव पर ध्यान अब तक नहीं दिया गया. पार्कों के नियम के हिसाब से हर पार्क में मौजूद प्याउ पर सफाई की तिथि लिखी होनी चाहिए पर इस पार्क में ऐसा कुछ नहीं दिखा. इस पार्क के हालात यही कहते हैं कि जिन्हें यहां सुकून की तलाश है, वे कोई और ठिकाना ढूंढ लें.

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