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करोड़ों भारतीयों के हर दिल अजीज 1971 भारत-पाक वार के हीरो सैम मानिकशॉ  

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New delhi :  आज ही के दिन तीन अप्रैल 1914 को भारत के पूर्व सेनाध्यक्ष फील्ड मार्शल सैम मानिकशॉ यानी होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ का जन्म पंजाब के अमृतसर में हुआ था. सैम मानिकशॉ 1971 भारत-पाक वार के हीरो थे. वे फील्ड मार्शल का रैंक पाने वाले भारतीय सेना के पहले अधिकारी थे. उनकी बहादुरी और चतुराई के कारण ही भारत ने पाकिस्तान से 71 की लड़ाई जीती थी और बांग्लादेश आजाद हुआ था. भारत ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को हराया और पाकिस्तान के 90000 सैनिकों को बंदी बनाया जो एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है. सैम मानिकशॉ ने अपने मिलिट्री करियर की शुरुआत ब्र‍िटिश इंडियन आर्मी से की थी. 1969 में वह भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बनाये गये. 1972 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया. उनका निधन 27 जून, 2008 को हुआ था. बता दें कि जब उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया थातो उनको पिता ने विरोध किया था. विरोध के बावजूद इंडियन मिलिट्री अकाडमी, देहरादून में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा दी. वह 1932 में पहले 40 कैडेट्स वाले बैच में शामिल हुए. 

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जब इंदिरा गांधी मानि‍कशॉ से नाराज हुईं

सैम मानिकशॉ ने एक इंटरव्यू के दौरान उस समय की कुछ बातों को सार्वजनिक किया था. उन्होंने बताया कि पूर्वी पाकिस्तान को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री काफी चिंतित थीं. उन्होंने अप्रैल 27 को एक आपात बैठक बुलाईजिसमें पूर्वी पाकिस्तान को लेकर उनकी चिंता साफ जाहिर हुई, उस बैठक में सैम भी थे. प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सैम को कहा कि कुछ करना होगा. उनके पूछने पर इंदिरा गांधी ने उन्हें पूर्वी पाकिस्तान में जंग पर जाने को कहा. लेकिन सैम ने इसका विरोध किया. उन्होंने कहा कि अभी वह इसके लिए तैयार नहीं हैं. प्रधानमंत्री को यह नागवार गुजरा और उन्होंने इसकी वजह भी पूछी उन्होंने कहा कि जंग के लिए अभी माकूल समय नहीं है, लिहाजा अभी जंग नहीं होगी. इंदिरा गांधी के सामने बैठकर यह उनकी जिद की इंतहा थी. उन्होंने कहा कि अभी उन्हें जवानों को एकत्रित करने और उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए समय चाहिए, और जब जंग का समय आयेगा तो वह उन्हें बता देंगे. इस वाक्ये को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके इस कथन पर प्रधानमंत्री काफी समय तक नाराज रहीं.

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जब तख्तापलट की अफवाह फैली

इंदिरा गांधी के समय जब सेना द्वारा तख्तापलट की अफवाह फैली, तो इंदिरा गांधी ने इस बारे में मानिकशॉ से पूछा. इस पर सैम ने अपने बोल्ड अंदाज में ही जवाब दियाआप अपने काम पर ध्यान दो और मैं अपने काम पर ध्यान देता हूं. कहा कि राजनीति में मैं उस समय तक कोई हस्तक्षेप नहीं करूंगा, जब तक कोई मेरे मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा. 

पाक सैनिक ने कहासाहब मैं अब समझ गया कि आपने जीत कैसे हासिल की

भारतपाक जंग जब खत्म होने को थीतब मानिकशॉ ने एक सरेंडर एग्रीमेंट बनाया और उसे पूर्वी पाकिस्तान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा को फोन पर लिखवाया और कहा कि इसकी चार कॉपी बनायी जाये. एक कॉपी जनरल नियाजी को दूसरी प्रधानमंत्री को तीसरी जनरल अरोड़ा को और चौथी कॉपी उनके ऑफिस में रखने को कहा. वार खत्म होने पर जब लगभग नब्बे हजार से ज्यादा पाकिस्तानी सेना सरेंडर कर भारत आयेतो उन्होंने पाक फौज के लिए रहने और खाने की व्यवस्था करवाई. एक वाक्‍ये का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ दिन बाद वह पाक कैंप में फौजियों से मिलने गये जहां कई सूबेदार मेजर रैंक के अफसर थे.  उन्होंने उनसे हाथ मिलाया और कैंप में मिल रही सुविधाओं के बारे में पूछा और उनके साथ खाना खाया. बाद में वह एक सिपाही से मिलने उसके तंबू में गये और उसके आगे हाथ बढ़ा दिया,  उसने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया. तब सैम ने उससे पूछा कि तुम हमसे हाथ भी नहीं मिला सकते.  बाद में वह सिपाही काफी हिचका और हाथ मिलाया. वह बोला साहब मैं अब समझ गया कि आपने जीत कैसे हासिल की.

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