Uncategorized

कड़ाके की ठंड में भी ‘रात’ खुले आसमान के नीचे काटता है यह परिवार (देखें वीडियो)

Md. Asghar Khan

Ranchi :  सर्दी किसी के लिए सुनहरा मौसम बनकर आता है तो किसी के लिए सितम बन जाता है. जिन्हें भगवान ने सबकुछ दिया है, उनकी रात रजाई, कंबल और रूम हीटर से अरामतलब अंदाज में गुजरती है. लेकिन जो छत से महरुम हैं उनपर यह ठंड मुसिबत की मार बन जाती है. रांची के मेनरोड में बिग बजार के पास से रात के नौ बजे गुजरेंगे तो इसका भलिभांति एहसास हो जायेगा. जब इस कड़ाके की ठंड में सड़क किनारे 40 लोगों के एक बंजारा परिवार को खुले आसमान के नीचे सोने की तैयारी करते देखेंगे. यह परिवार हर रात अलाव के सहारे ठंड को मात देने की कोशिश करता है.

इसे भी पढ़ेंः बिहार में बदलते राजनीतिक समीकरण के साथ 2017 में सुर्खियों में बनी रहीं ये घटनाएं

पिंकी और पुष्पा का ठंड से कांपना

राजस्थान से आया यह परिवार पिछले 10 सालों से अलग-अलग शहरों में बैलून बेच कर अपना भरण पोषण कर रहा है. खुद की सांसें चलती रहे इसलिए रंग-बिरंगे बैलून में अपनी सांसों को भर बाजार में बेचते है. परिवार में 10 छोटे बच्चे हैं, जो शहर के विभिन्न मॉल और सड़कों पर घूम कर आने-जाने वाले लोगों से बैलून लेने की गुजारिश करते हैं. जिन हाथों में कलम और किताब होनी चाहिए, उन्हीं हाथों ने गरीबी के कारण बैलून बेचने के लिए थाम लिया. बंजारा परिवार की आरती देवी हर रोज अलाव जलाती है ताकि बच्चों को थोड़ी गर्माहट दे सकें. वे कहती हैं कि हमसे अच्छे तो जानवर हैं जिसे कहीं ना कहीं छत का आसरा मिल जाता है. वह सड़क किनारे खेल रही अपनी तीन साल की बच्ची पिंकी और ढेड़ साल की पुष्पा की ओर ईशारा करते हुए कहती हैं कि दोनों रात में ठंड से कांपती हैं. ठंड ऐसी है कि कंबल ओढ़ने के बावजूद भी नींद नहीं आती है. क्या करें, ऐसे ही हर साल ठंड का मुकाबला करना पड़ता है.

इसे भी पढ़ेंः तेजस्वी ने हार्दिक से कहा, ‘ भाई मोहब्बत की लालटेन जलाते रहें’

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button