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और जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी दे दी गयी

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 Karachi : पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो की याद में चार अप्रैल को छुट़टी की घोषणा की गयी है. बता दें कि चार अप्रैल 1979 को अपने समय में देश के सबसे ताकतवर राजनेता रहे जुल्फिकार अली भुट्टो को पाकिस्तान के रावलपिंडी में फांसी दे दी गयी थी. भुट्टो 14 अगस्त 1973 से पांच जुलाई 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे थे. तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक से उनकी कभी नहीं बनी. मौका पाकर पांच जुलाई 1977 को जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने तख्तापलट कर भुट्टो को जेल में डाल दिया. तीन सितंबर 1977 को सेना ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया  गया था. भुट्टो पर मार्च 1974 में विपक्षी नेता नवाब मोहम्मद अहमद खान की हत्या का आरोप लगाया गया था.

बता दें कि भुट्टो का मुकदमा स्थानीय कोर्ट के बजाय सीधे हाईकोर्ट में चला. उस समय राजनीतिक गलियारों में चर्चा चली थी कि उन्हें अदालत में अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया. मुकदमा पूरा होने पर 18 मार्च 1978 के दिन लाहौर हाईकोर्ट ने जुल्फिकार अली भुट्टो को नवाब मोहम्मद अहमद खान की हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुना दी.

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भुट्टो को जबरन स्ट्रेचर पर लिटा कर ले जाया गया

 फांसी से कुछ देर पहले जब सुरक्षाकर्मियों ने भुट्टो के हाथ पीछे कर बांधने की कोशिश की तो उन्होंने विरोध किया. उसके बाद जबरन उनके हाथों में रस्सी बांधी गयी और उन्हें एक स्ट्रेचर पर लिटाकर वहां से ले जाया गया. भुट्टो को फांसी पर लटकाने के लिए जल्लाद पहले से ही तैयार था. जैसे ही घड़ी में रात 2 बजकर 4 मिनट पर सूई पहुंचीजल्लाद भुट्टो के कान में कुछ फुसफसाया और लिवर दबा दिया.  भुट्टो आधे घंटे तक फांसी के फंदे पर लटके रहे.  इसके बाद एक डॉक्टर ने भुट्टो की जांच की और उन्हें मरा हुआ घोषित कर दिया. 

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फांसी से 24 घंटे पहले बताना चाहिए था

भुट्टो की जीवनी लिखने वाले सलमान तासीर ने अपनी किताब भुट्टो में बेबाकी से सारी बातें लिखी हैं. उऩ्होंने लिखा है कि जेल के शुरुआती दिनों में भुट्टो जब टॉइलेट जाते थेतब एक गार्ड उनकी निगरानी करता था. भुट्टो को यह बहुत बुरा लगता था. यहां तक कि उन्होंने लगभग खाना ही छोड़ दियाताकि उन्हें टायलेट न जाना पड़े. इसके बाद उनकी निगरानी खत्म कर दी गयी और उनके लिए कोठरी के बाहर एक अलग टायलेट बनवाया गया. फांसी दिये जाने से एक दिन पूर्व तीन अप्रैल को शाम 6.05 बजे जेल के अधिकारियोंमजिस्ट्रेट और डॉक्टर ने भुट्टो को जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी फांसी की सजा के खिलाफ अपील रद्द हो गयी है. यह खबर सुनकर भुट्टो के चेहरे पर कोई भाव नहीं आया. लेकिन भुट्टो ने जेल अधीक्षक से कहा कि मुझे फांसी से 24 घंटे पहले बताना चाहिए था. कहा कि दोपहर 11.30 बजे जब मेरी बेटी और पत्नी मुझसे मिलने आयींतो उन्हें भी इस बारे में ठोस जानकारी नहीं थी. भुट्टो ने कहा कि चूंकि उन्हें फांसी का कोई लिखित आदेश नहीं दिखाया गया है, इसलिए वह अपने वकील से जल्द से जल्द मिलना चाहेंगे. 

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 भुट्टो ने कहाठीक है, सब खत्म..ठीक है सब खत्म

रावलपिंडी सेंट्रल जेल में खुफिया अधिकारी रहे कर्नल रफीउद्दीन ने अपनी किताब भुट्टो के आखिरी 323 दिन में लिखा है कि जब अधिकारी भुट्टो को फांसी की सूचना देकर जाने लगे तो वे कांपते हुए उठे. उन्होंने कहा कि उनके पेट में दर्द हो रहा है. भुट्टो ने अपने सहायक अब्दुर रहमान को बुलाया और दाढ़ी बनाने के लिए गर्म पानी लाने को कहा. फिर भुट्टो ने रफी से पूछा, रफी, क्या ड्रामा रचा जा रहा हैइस पर रफी चुप रहे. जब भुट्टो ने दोबारा पूछ तो उन्होंने भुट्टो को साफ बता दिया कि उन्हें आज ही फांसी दी जायेगी. यह सुनकर थोड़ी देर के लिए भुट्टो की शक्ल अजीब सी हो गयी और फिर कहा  ठीक है, सब खत्म..ठीक है सब खत्म.

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