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एदारा-ए-शरिया ने उठाया सवाल, नवरात्र के दिन पशु बली क्यों नही रोक रही है सरकार

– पशु बली के नाम पर केवल मुस्लिमों को क्यों डराती है सरकार 
NEWS WING 
Ranchi, 27 September :
एदारा-ए-शरिया ने कृषि पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंप कर कहा है कि पुश बली के नाम पर केवल मुस्लिम संप्रदाय के लोगों को झारखंड सरकार क्यों निशाना बना रही है. नवरात्र जैसे पर्व के दौरान बड़े पैमाने पर पशुओं को बली दी जाती है, लेकिन सरकार की ओर इसको रोकने के लिए कोई कोठर कानून का हवाला देकर इसको रोका नहीं जाता है. संगठन के नाजिमे आला मौलाना कुतुबुद्दीन रजवी ने बताया कि गत दो सितंबर को मुस्लिम अल्पसंख्यकों के बकरीद से ठीक दो दिन पहले कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार ने राज्य जीव जन्तु कल्याण बोर्ड, झारखंड द्वारा आवश्यक सूचना विज्ञापन निकाल कर कहा गया कि गोवंशीय पशु जैसे गाय,बछड़ा, बछिया, सांड,बैल ऊॅट आदि को काटना एवं कुर्बानी देना खरीदना बेचना, परिवहन करना, संग्रह करना आदि संज्ञेय अपराध है. साथ ही पशु क्रुरता निवरण अधिनियम के अंर्तगत आता है. एफएसएसए एक्ट का हवाला देकर राज्य के मुस्लिम अल्पसंख्यकों को इतना भयभीत कर दिया गया कि अधिकतर गरीब-गुरबा कुर्बानी नहीं कर सके. चूंकि  लोगों को इतना डरा दिया गया कि वे बकरों तक की कुर्बानी नहीं दे सके. वहीं नवरात्र के पर्व के दौरान सरकार द्वारा पशु बली को लेकर कोई विज्ञापन नहीं निकाली इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार केवल पशु बली के नाम पर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को डरा रही है. संगठन के सरपरस्त मो सईद ने कहा कि सरकार पशु बली को लेकर दोहरी पॉलिसी बनना बंद करें, अगर सरकार पशु बली एवं पशु क्रूरता निवारण को लेकर इतना ही गंभीर है तो हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई या किसी भी धर्म के धार्मिक परम्परा में पशु बली को बंद किया जाना चाहिए. साथ ही सबके लिए एक समान कानून बनाना चाहिए.

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