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इसी माह बढ़ेगी बिजली टैरिफ, लौह उद्योगों पर लटक जायेंगे ताले, लाखों हो जायेंगे बेरोजगार

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Ranchi : झारखंड में बिजली टैरिफ में बढ़ोत्तरी को लेकर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के द्वारा आयोजित हर जन सुनवाई में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के प्रस्ताव का भारी विरोध हो चुका है. इसके बाद भी नियामक आयोग इस माह के आखिरी सप्ताह में नयी बढ़ी हुई टैरिफ लागू करने का निर्देश जारी कर सकता है. नियामक आयोग जैसे ही टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति देगा, वैसे ही झारखंड राज्य के उद्योग धंधे बुरी तरह प्रभावित होंगे. साथ ही यहां के हजारों युवा मजदूर बेरोजगार हो जायेंगे.

Ranchi : झारखंड में बिजली टैरिफ में बढ़ोत्तरी को लेकर झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के द्वारा आयोजित हर जन सुनवाई में झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के प्रस्ताव का भारी विरोध हो चुका है. इसके बाद भी नियामक आयोग इस माह के आखिरी सप्ताह में नयी बढ़ी हुई टैरिफ लागू करने का निर्देश जारी कर सकता है. नियामक आयोग जैसे ही टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकृति देगा, वैसे ही झारखंड राज्य के उद्योग धंधे बुरी तरह प्रभावित होंगे. साथ ही यहां के हजारों युवा मजदूर बेरोजगार हो जायेंगे. नियामक आयोग की सलाहकार समिति के सदस्य अजय भंडारी ने कहा है कि बिजली टैरिफ बढ़ने पर सबसे ज्यादा प्रभाव फर्नेस (अंगीठी) वाले कल कारखानों पर पड़ेगा. झारखंड के लौह उद्योगों पर ताले लग जायेंगे. जो राज्य के औद्योगिकीकरण की रीढ़ की हड्डी है. वहीं दूसरी ओर दूसरे उद्योग धंधों का उत्पादन भी प्रभावित होगा. लोकल डिस्ट्रीब्यूटर भी हमारा महंगा माल छोड़कर दूसरे राज्यों से सस्ता सामान मंगायेगा. ऐसे में हमारी यूनिट पर ताला लग जायेगा.

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राज्य में बिजली की दरें बढ़ाने का पुरजोर विरोध 

राज्य में बिजली की दरें बढ़ाने का पुरजोर विरोध हो रहा है. पिछले बुधवार को राज्य विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में भी भारी विरोध देखने को मिला. बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) की ओर से टैरिफ बढ़ाये जाने का भारी विरोध किया गया. अजय भंडारी ने कहा है कि बिजली टैरिफ बढ़ोत्तरी के खिलाफ लड़ाई खत्म  नहीं हुई है. कानूनी लड़ाई जारी है. नियामक आयोग के कोर्ट में सुनवाई चल रहा है. वहां न्याय नहीं मिला तो हम एपेक और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटायेंगे.

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नियामक आयोग अपने ही नियम का धज्जी उड़ा रहा है

झारखंड स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सेक्रेटरी अंजय पछेरीवाला का कहना है कि बिजली टैरिफ बढ़ाने के लिए नियामक आयोग अपने ही नियम का धज्जी उड़ा रहा है. बीते साल जब जेबीवीएनएल को टैरिफ बढ़ाने की अनुमति दी गई थी तो वह पांच साल के लिए थी. फिर वह पांच साल के पहले कैसे बिजली दर बढ़ा सकती है. नियामक आयोग का यह रवैया आने वाले समय के लिए अनुकूल नहीं रहेगा, भविष्य में कोई भी कंपनी नियामक आयोग के नियमों की धज्जियां उड़ायेगा. इससे यहां के लोग त्रस्त रहेंगे. बिजली के मामले में अराजकता और अव्यवस्था बढ़ जायेगी. टैरिफ तय करने में कई नियमों को तोड़ा गया है. इस पर जेसिया ने आपत्ति दर्ज करा दी है. फिर भी दर बढ़ती है तो कानूनी लड़ाई भी लड़ेंगे.

बिजली टैरिफ बढ़ेगी तो प्रॉफिट-मार्जिन भी प्रभावित होगा

इधर रांची के जाने माने बिजनेस प्रतिष्ठान कश्मीर वस्त्रालय के संचालक सुरेश मल्होत्रा का कहना है कि बिजली टैरिफ बढ़ेगी तो प्रॉफिट-मार्जिन भी प्रभावित होगा. बिजली टैरिफ बढ़ने से स्टाफ खर्च और दूसरे खर्च भी बढ़ जायेंगे. कहा कि न हमें सही क्वालिटी की बिजली मिलती है और न सर्विस मिलती है. पावर फ्लेक्चुएशन, लो‍ड शेडिंग यहां आम बात है. इससे बल्ब, ट्यूब लाइट, एसी और दूसरे इलेक्ट्रिकल सामान खराब होते रहते हैं. जब ये क्वालिटी पावर भी नहीं दे रहे हैं तो टैरिफ बढ़ाने का क्या मतलब है.

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सरकार की ओर से सब्सिडी देने का प्रावधान

बिजली के उपभोक्ताओं को बढ़ी टैरिफ दर का झटका लगना तय है. लेकिन इस पर मरहम लगाने के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी देने का प्रावधान किया जा रहा है. राज्य विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ अरविंद प्रसाद ने कहा कि आम उपभोक्ताओं की सारी शिकायतों की आयोग गंभीरता से समीक्षा करेगा. लेकिन इसके साथ बिजली की गुणवत्ता व सेवा को भी ध्यान में रखा जायेगा. सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अप्रैल माह में ही टैरिफ में बढोत्तरी हो सकती है. सरकार ने आम लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े, इसके लिए दो हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान किया है. यह राशि न तो जेबीवीएनएल को मिलेगी और न ही उपभोक्ताओं के खाते में भेजी जायेगी. इसको बिल में ही समाहित कर दिया जायेगा. नियामक आयोग के अध्यक्ष ने व्यवसायियों से स्पष्ट तौर पर कहा कि टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, लेकिन आने वाले दिनों में टैरिफ में बढोत्तरी के लिए उनको तैयार रहना होगा. इससे निपटने के लिए उनको दूसरे स्रोत से बिजली लेने की ओर रुख करना चाहिए. जिससे जेबीवीएनएल भी अपना टैरिफ कम करने पर विचार करे.

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