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इराक जाने को तैयार 6000 भारतीय शिया मुस्‍लमानों ने वीजा मांगा

नई दिल्ली: सुन्नी आतंकी संगठन ISIS के हमलों का सामना कर रहे शियाओं की मदद के लिए भारतीय शिया इराक जाने की तैयारी में हैं। 6000 के करीब भारतीय शियाओं ने इराक के वीजा के अप्लाई किया है। ये लोग वहां जाकर शियाओं का साथ देना चाहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 हजार से भी ज्यादा शिया इराक जाने के इच्छुक हैं।

इराक जाने के इच्छुक ज्यादातर शियाओं का कहना है कि वे अपने भाइयों का साथ देना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि शियाओं की पवित्र जगहों की हिफाजत करें और राहत कार्य चलाएं। इंग्लिश न्यूज पोर्टल डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक वीजा के लिए अप्लाई करने वाले ज्यादातर शिया दिल्ली, लखनऊ और मेरठ से हैं।

इराक में नजफ और करबला ऐसी दो जगहें हैं, जो दुनिया भर के शियाओं के लिए महत्व रखती हैं। नजफ में पैगंबर मुहम्मद के दामाद इमाम अली का मकबरा है, जिन्हें शिया सच्चा खलीफा मानते हैं। शियाओं के लिए मक्का और मदीना के बाद नजफ तीसरी सबसे पवित्र जगह है। करबला की बात करें तो यहां पैगंबर के पोते इमाम हुसैन का मकबरा है।

इराक में ISIS के आतंकी शियाओं को निशाना बना रहे हैं। इस आतंकी संगठन ने अभी तक मौसुल और तिकरित समेत कई अहम शहरों पर कब्जा कर लिया है। लड़ाई वाले इलाके में फंसीं 46 भारतीय नर्सें तो सुरक्षित स्वदेश लौट आई थीं, लेकिन मौसुल में अभी भी 39 भारतीय मजदूर फंसे हुए हैं।

भारत की सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इराक जाने के इच्छुक शिया भले ही यहां से राहत कार्यों के लिए जाना चाहते हैं, लेकिन वहां जाकर वे लड़ाई में हिस्सा ले सकते हैं। वे वहां पर ISIS का निशाना भी बन सकते हैं। वैसे भी आईएसआईएस नेता और इस्लामिक स्टेट के स्वयंभू खलीफा अबु बकर अल बगदादी ने भारत को दुश्मन देश घोषित किया हुआ है। उसका कहना है कि भारत में मुस्लिमों को उनके हक नहीं मिलते हैं।

अगले हफ्ते शिया समुदाय के पांच लोगों का समूह भारत से इराक जा सकता है। इसमें मौलाना कल्बे जवाद और जाने-माने वकील महमूद प्राचा भी शामिल हैं। इराक के वीजा के लिए अप्लाई करने वाले लोगों में कुछ सुन्नी और हिंदू भी हैं, जो इराक जाकर राहत कार्यों में लगना चाहते हैं।

इस बीच सुरक्षा एजेंसियां उन 18 भारतीयों का पता लगाने की कोशिश कर रही है, जो इराक में आतंकी संगठन ISIS की तरफ से ‘जिहाद’ में भाग ले रहे हैं। खबर है कि इनमें से 4 महाराष्ट्र से हैं।

बगदादी के निशाने पर भारत
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इराक जाने के इच्छुक शिया भले ही यहां से राहत कार्यों के लिए जाना चाहते हैं, लेकिन वहां जाकर वे लड़ाई में हिस्सा ले सकते हैं. वे वहां पर आईएसआईएस का निशाना भी बन सकते हैं. वैसे भी आईएसआईएस नेता और इस्लामिक स्टेट के स्वयंभू खलीफा अबु बकर अल बगदादी ने भारत को ‘दुश्मन देश’ घोषित किया हुआ है. उसका कहना है कि भारत में मुस्लिमों को उनके हक नहीं मिलते हैं.

अगले हफ्ते शिया समुदाय के पांच लोगों का समूह भारत से इराक जा सकता है। इसमें मौलाना कल्बे जवाद और जाने-माने वकील महमूद प्राचा भी शामिल हैं। इराक के वीजा के लिए अप्लाई करने वाले लोगों में कुछ सुन्नी और हिंदू भी हैं, जो इराक जाकर राहत कार्यों में जुटना चाहते हैं।

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