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इंटक के नाम पर चल रहा है फर्जी संगठन, फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी ने किया खुलासा (देखें वीडियो)

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News Wing Ranchi, 04 December: राष्‍ट्रीय मजदूर कांग्रेस ‘इंटक’के जनरल सेक्रटरी केके तिवारी रांची दौरे पर हैं. उन्‍होंने ‘न्‍यूज विंग’ से खास बातचीत में खुलासा किया है कि मजदूरों के मेहनत की चंदे की बड़ी राशि का दुरूपयोग करने के लिए इंटक के नाम का गलत इस्‍तेमाल किया गया है. केके तिवारी जी संजीवा रेड्डी का नाम लेते हुए बताया कि उन्‍होंने 2002 में इंटक में विवाद होने के बाद इंटक नाम से ही साल 2007 में अलग मजदूर संगठन बना लिया और वो इस संगठन के स्‍वयंभू अध्‍यक्ष बन गये, ताकि मजदूरों के फंड का गबन कर सकें.

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12 दिसंबर को आयेगा कोर्ट का फैसला

केके तिवारी ने बताया कि इंटक का विवाद समाप्‍त हो गया है. कुछ लोग फर्जी तरीके से ट्रेड यूनियन कर रहे हैं. उन्‍होंने बताया है 12 दिसंबर को कोर्ट इस मामले पर फैसला सुनायेगी और यह हमारे हक में होगा. इंटक का झारखंड में महत्‍व ज्‍यादा है, क्‍योंकि यहां पर कई कोल फिल्‍ड हैं और यहां हमारे संगठन से हजारों कोल मजदूर सद्स्य हैं.

यह भी पढ़ेंः सचिव से भी ज्यादा सैलरी विभाग के कंसल्टेंट्स को, मार्च तक का एडवांस वेतन भी ले चुकी है कंपनी, लेकिन विभाग के किसी काम के नहीं

3 मई 1947 से फेडरेशन को प्राप्त है मान्यता

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केके तिवारी ने दावा किया है कि वे उस फेडरेशन से हैं जो 3 मई 1947 को सरकार से मान्‍यता प्राप्‍त है. उनका कहा कि इसका विधिवत चुनाव हुआ था. इसमें झारखंड से वीरेंद्र प्रधान उपाध्‍यक्ष हैं. वाइएन उपाध्‍याय सेक्रेटरी हैं और राणा संग्राम सिंह जनरल सेक्रेटरी हैं. नवंबर को चुनाव हुए थे.

4 जनवरी को कोर्ट ने फर्जी इंटक पर लगाया है रोक

उन्‍होंने बताया कि अब इस पर कोई विवाद नहीं रह गया है. बीते 4 जनवरी 2017 को फर्जी इंटक पर सरकार ने रोक लगा दिया है. वे लोग कोर्ट में बेनकाब हो चुके हैं, जहां कहीं भी चोरी छिपे कुछ लोगों के द्वारा फर्जी संगठन चलाया जा रहा है वह अवैध है. 

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