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आजसू एक ऐसी पार्टी जो सत्ता के साथ भी और खिलाफ भी

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Ranchi: झारखंड गठन के बाद आजसू पार्टी हमेशा से ही सत्‍ता के साथ रही है. यह पार्टी राज्‍य के मुद्दों को अपने फायदे के अनुकूल बनाने और भुनाने में माहिर है. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो भले ही पिछला चुनाव हार गये, लेकिन पार्टी की सत्‍ता की लालसा वैसी ही बनी रही. वहीं अपनी हर रणनीति तय करने के लिए मुद्दों के विशेषज्ञों की एक मजबूत टीम आजसू के पास है. फिलहाल आजसू पार्टी झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 की तैयारी में लगी हुई है. इसके लिए पार्टी एनडीए सरकार को समर्थन देने वाली प्रमुख सहयोगी पार्टी होते हुए भी विपक्षियों की तरह प्रदर्शन करती रहती है. झारखंड विधानसभा सत्र के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला. शीतकालीन सत्र के दौरान कई मुद्दों को लेकर आजसू विधायक रामचंद्र सहिस विरोध प्रदर्शन करते दिखे. रामचंद्र सहिस कभी निर्मल महतो हत्‍याकांड की एनआईए जांच की मांग सदन के अंदर करते दिखे, तो कभी सदन के बाहर कुरमी जाति को एसटी में शामिल करने की मांग करते हुए धरने पर बैठे दिखे. वहीं, दूसरी ओर शीतकालीन सत्र के दौरान आजसू पार्टी विधान सभा के बाहर सड़क पर भी प्रदर्शन करती दिखी. वहीं आजसू पार्टी की महिला मोर्चा के नेतृत्‍व में रघुवर सरकार द्वारा शराब बेचे जाने के खिलाफ बिरसा चौक पर प्रदर्शन किया गया.

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कहां गये स्‍थानीयता, आरक्षण और विशेष राज्‍य का दर्जा जैसे मुद्दे

आजसू लंबे अरसे से स्‍थानीयता, आरक्षण और विशेष राज्‍य के दर्जा का मुद्दा उठाती रही है, लेकिन पिछले कुछ सालों में यह मुद्दे गौण होते गये. झारखंड मुक्ति मोर्चा के विनोद पांडेय का कहना है कि आजसू पार्टी भाजपा के साथ-साथ सरकार के साथ शामिल है. सरकार ने जितने भी जनविरोधी फैसले लिये हैं, चाहे वो शराबबंदी का मामला हो, स्‍थानीय नीति का मामला हो, सीएनटी-एसपीटी में संशोधन का मामला हो, भूमि अधिग्रहण का मामला हो, चाहे नियोजन नीति का मामला हो, इन सारे मुद्दों पर कैबिनेट के अंदर आजसू पार्टी के प्रतिनिधि ने सहमति जताया है.

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विनोद पांडे ने बताया कि विधानसभा के अंदर जब कोई बिल लाया जाता है और विपक्ष जब उस जनविरोधी बिल का विरोध करता है, तब आजसू पार्टी विधानसभा के अंदर उस बिल का समर्थन करती है और विधानसभा के बाहर निकल के मीडिया के माध्‍यम से लोगों को दिग्‍भ्रमित करने का काम करती है, कि आजसू पार्टी इसके विरोध में है, लेकिन सच्‍चाई यही है कि उनकी सहमति होती है, उन सारे जनविरोधी फैसलों में जिसको सरकार के द्वारा पास किया जाता है.

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विधानसभा चुनाव को लेकर आजसू पार्टी के प्रमुख मुद्दे

आजसू पार्टी कुरमी-महतो को अपना खास वोट बैंक मानती है. आजसू प्रमुख जिस सिल्‍ली विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं वहां के ज्‍यादातर वोटर कुरमी-महतो हैं. इस लिहाज से पार्टी कुरमी-महतो से जुड़े मुद्दों पर ज्‍यादा जोर दे रही है. यह बताना जरूरी है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में सुदेश महतो अपनी सीटिंग सीट बुरी तरह हार गये थे. इसलिए पार्टी प्रमुख का सीट वापसी के लिए एक महिम शुरू कर दी गई है और वहां के वोट बैंक को देखकर ही मुद्दों की राजनीति की जा रही है. चाहे वह निर्मल महतो हत्‍याकांड की एनआईए जांच की मांग हो, या फिर कुरमी जाति को एसटी में शामिल करने की मांग. इन्हें पूरे जोर-शोर से आजसू उठा रही है. वहीं आजसू पार्टी धनबाद के तोपचांची के पास जीटी रोड पर स्‍व विनोद बिहारी महतो की 150 फीट उंची प्रतिमा निर्माण कर रही है. इस राज्‍य के सभी हिस्‍सों के लोगों की भावनाओं को जोड़ने के लिए पांच जिलों बोकारो, धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, गिरिडीह की मिट्टी इकट्ठा कर मूर्ति में लाकर डाली गई है. इसके अलावा आजसू पार्टी विनोद बिहारी महतो के कार्यों से संबंधित डॉक्‍यूमेंट्री फिल्‍म भी तैयार करवा रही है.

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पूरे झारखंड में संगठन को मजबूत कर रही है आजसू पार्टी

आजसू पार्टी झारखंड के जिलों में कई स्‍तरों पर कार्यक्रम आयोजित कर संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है. अभी पार्टी पंचायत स्‍तर, प्रखंड स्‍तर, जिला स्‍तर और राज्‍य स्‍तर पर लोगों के बीच पार्टी के विचारों और लोगों की समस्‍याओं और मुद्दों को टटोलने का काम कर रही है.

छात्र संगठन : आजसू की शुरुआत एक छात्र आंदोलन से हुई थी, लेकिन आज इस पार्टी में कॉलेज और विश्‍वविद्यालयों के स्‍टूडेंट्स से जुड़े मुद्दों के लिए एक अलग ईकाई काम करती है. आजसू छात्र संगठन से जुड़े हरीश कुमार ने बताया कि अभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी में छात्रों से जुड़ी समस्‍यायें प्रमुख मुद्दे हैं. यहां कैंटीन, वाई-फाई, बस सुविधा, छात्र बीमा, ई-लाइब्रेरी की स्‍थापना जैसे मुद्दे हैं, जिसके लिए आजसू संघर्ष कर रही है. इसमें हमें अच्‍छा समर्थन मिल रहा है. हम रांची, पलामू, कोल्‍हान, विनोवा भावे विश्‍वविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की तैयारी कर रहे हैं.

आजसू बुद्धिजीवी मंच: पार्टी की इस ईकाई में ज्‍यादातर रिटायर्ड सरकारी सेवक हैं. आजसू बुद्धिजीवी मंच के अध्‍यक्ष डॉ बीके चांद ने बताया कि हमारे संगठन में रिटायर डॉक्‍टर, वकील, आईएएस, आईपीएस, जुड़े हुए हैं. अभी हमने गोड्डा, संताल, देवघर, समेत राज्‍य के कई जिलों में जाकर बुद्धिजीवियों के बीच में चर्चा की है. पार्टी हमसे संगठन को बेहतर करने के लिए हमारी राय-विचार लेती है.

आजसू महिला संगठन:  पार्टी की यह महिला ईकाई इन दिनों सरकार के शराब बेचने के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रही है. महिला ईकाई की इस मुहिम से पार्टी की सक्रियता को सामने ला कर रख दिया है और समझा जा रहा है कि सरकार के रहते हुए आजसू विपक्ष की भूमिका में है. इसे विपक्षी पार्टियां आसानी से पचा भी नहीं पा रही हैं.

आजसू मजदूर संगठन: पार्टी के इस ईकाई की सक्रियता एक मजदूर यूनियन की तरह है, जो खास कर कोयला उत्‍पादन क्षेत्रों में देखी जाती है. मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के भाई रोशनलाल चौधरी इस ईकाई के अगुआ हैं. रांची में बीते कई महीनों से आजसू मजदूर संगठन की कोई हलचल नहीं देखी गई है. 

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