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आखिर क्यों नाराज हैं सिमरिया विधायक गणेश गंझू !

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Chatra/Ranchi: चतरा जिले के सिमरिया विधायक गणेश गंझू आज कल सरकार से नाराज चल रहे हैं,  गुस्से में हैं. गुस्से में विधायक जी ने कुल मिला कर मिली एक पद को भी लात मार दी है. वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव में वह झारखंड विकास मोर्चा से जीत हासिल कर सरकार बनने के वक्त बीजेपी में शामिल हो गये थे. इस काम के लिए उन्हें ईनाम के तौर पर झारखंड राज्य के कृषि विपणन पर्षद का अध्यक्ष बना दिया गया. किसी तरह समझा-बुझा कर सरकार ने इस पद को ग्रहण करने के लिए गणेश गंझू को राजी कर लिया था. लेकिन गणेश गंझू ने दो अप्रैल को इस पद से इस्तीफा दे दिया.

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सीएम रघुवर दास को लिखे त्याग पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी बात विभाग में नहीं सुनी जाती. इसलिए वो त्याग पत्र दे रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि विभाग के एमडी मनमाने तरीके से रिक्तियां भर रहे हैं. वहीं विभाग के एमडी ने पलटवार करते हुए सचिव को लिखे एक पत्र में लिखा है कि अध्यक्ष महोदय की सारी बातें मानीं जाती हैं. साथ ही उन्होंने किसी तरह की कोई बहाली नहीं की है.

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टीपीसी सुप्रीमो के भाई हैं गणेश गंझू

गणेश गंझू चतरा में सक्रिय उग्रवादी संगठन टीपीसी के सुप्रीमो ब्रजेश गंझू के भाई हैं. वर्ष 2005 में टीपीसी का गठन हुआ था. जिसके बाद से अब तक कभी टीपीसी के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई नहीं हुई. टीपीसी के उग्रवादी चतरा के टंडवा के अशोका, आम्रपाली, मगध और पिपरवार कोल परियोजना में काम करने वाले ट्रांसपोर्टरों से लेवी वसूलते रहें. यह बात किसी से छिपी नहीं है कि टीपीसी के उग्रवादी टंडवा व पिपरवार में हर माह 12 करोड़ से अधिक की लेवी वसूल रहे हैं. वर्ष 2015 में तत्कालीन एडीजी अभियान अनिल पाल्टा ने जब टीपीसी के खिलाफ कार्रवाई शुरु की, तब उन्हें पद से हटा दिया गया. चतरा जिला के पुलिस प्रशासन से लेकर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी तक पिछले तीन सालों से यही कह रहे हैं कि वसूली की जांच की जाये. पर किसी भी स्तर से जांच का आदेश जारी नहीं किया गया. एसआईटी का प्रस्ताव बना, पर उसे सरकार की मंजूरी नहीं मिली. इधर, पिछले दो माह से चतरा की पुलिस टीपीसी के खिलाफ मुखर होकर कार्रवाई कर रही है. गणेश गंझू के राजनीतिक विरोधी उनके इस्तीफे को इसी पुलिसिया कार्रवाई से जोड़ करके भी देख रहें हैं. कहा तो यह भी जा रहा है कि जेवीएम से पाला बदल चुके विधायक गणेश गंझू अपनी पुरानी वफादारी की कीमत सरकार से मांग रहे हैं. लेकिन सरकार उऩकी नहीं सुन रही है. ऐसे में उनका नाराज होना लाजिमी माना जा रहा है.

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