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‘‘आईएसआईएस दवा’’ ट्रामाडोल मादक पदार्थ की श्रेणी में शामिल

New Delhi : केंद्र सरकार ने दर्दनिवारक दवाई ट्रामाडोल को मादक पदार्थ घोषित किया है और अब देश भर में इसकी बिक्री पर सख्त नजर रखी जाएगी. इसके पहले नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने कहा था कि इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी हो रही है और इसकी आपूर्ति के तार वैश्विक आतंकी समूह आईएसआईएस से भी जुड़े हो सकते हैं. केंद्रीय वित्त मंत्रालय इस दवा को मादक पदार्थ संबंधी कानून (एनडीपीएस) के अधीन लाया है और इस संबंध में 26 अप्रैल को एक गजट अधिसूचना जारी की गयी. ये आंकड़े पीटीआई के पास मौजूद है. वित्त मंत्रालय एनडीपीएस कानून के कुछ हिस्सों का नियमन करता है. इनमें दवाइयों का मादक पदार्थों की श्रेणी में वर्गीकरण शामिल है. 

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आईएसआईएस आतंकवादी पीड़ा पर काबू तथा ताकत के लिए मादक पदार्थों का करते हैं दुरूपयोग

तथाकथित आईएसआईएस के आतंकवादी पीड़ा पर काबू के लिए तथा ताकत के लिए मादक पदार्थों का दुरूपयोग करते हैं. इसलिए इसे ‘‘फाइटर ड्रग’’ भी कहा जाता है. राष्ट्रीय एजेंसी एनसीबी मादक पदार्थों से जुड़ी विभिन्न कानून प्रवर्तन संस्थाओं, पुलिस और केंद्रीय विभागों के बीच समन्वयक की भूमिका निभाती है. एनसीबी ने पिछले साल जुलाई में सरकार से इस दवाई को ” विनियमन और नियंत्रण ” के तहत लाने के लिए कहा था ताकि इसका केवल औषधीय उद्देश्यों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सके तथा इसके दुरुपयोग पर रोक लग सके. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय के तहत राजस्व विभाग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद, ट्रामाडोल अब भारत में दुकानों में स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इसे एनडीपीएस कानून के तहत विनियमित किया जाएगा जिससे एनसीबी और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अधिकार मिल सकेगा और वे बिना अनुमति के इसे तैयार करने वाले लोगों पर छापा मार सकेंगे तथा मुकदमा चला सकेंगे.

Sanjeevani

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