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आंध्र की राजधानी में निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की योजना, काम पसंद ना आया तो ‘हटा’ सकेंगे मतदाता

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Amravati : आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती में एक ‘‘अलग तरह की सरकार होगी’’ जिसमें मतदाताओं के पास निर्वाचित प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों को ‘‘वापस बुलाने’’ की विशिष्ट शक्ति होगी. राजधानी क्षेत्र के इस और ऐसे ही कुछ अन्य विशिष्ट पहलुओं का खुलासा आंध्र प्रदेश कैपिटल रीजन डेवलेपमेंट अथॉरिटी (सीआरडीए) द्वारा तैयार ‘‘शासन मामलों पर विशेषज्ञ पूर्व पाठ (दस्तावेज)’’ में किया गया.

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विफल रहने पर यहां वापस बुलाने का प्रावधान 

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सीआरडीए द्वारा आयोजित दो दिवसीय गहन मंथन कार्यशाला में यह दस्तावेज बांटा गया. दस्तावेज में कहा गया, ‘‘मेट्रोपॉलिटिन सरकार के निर्वाचित प्रतिनिधि और कर्मचारी प्रदर्शन और प्रतिपादन के लिये मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होंगे. प्रदर्शन और प्रतिपादन में विफल रहने पर यहां वापस बुलाने का प्रावधान भी होगा.’’ दस्तावेज में कहा गया, ‘‘संविधान के तहत प्रत्येक छह महीने में मतदाताओं के साथ वार्ड सभा का आयोजन होगा जिसमें निर्वाचित प्रतिनिधि और प्रमुख कर्मचारियों के बने रहने पर फैसला होगा.’’ रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शुरुआत में राजधानी के प्रशासन के लिये कोई निर्वाचित निकाय नहीं होगा जैसा कि आंध्र प्रदेश सरकार ने यहां नामित अमरावती सिटी कांउसिल गठित करने का प्रस्ताव किया है जब तक कि शहर में पर्याप्त आबादी नहीं हो जाती. इसमें कहा गया है कि एक निर्वाचित परिषद तक बनेगी जब अमरावती के शहरी क्षेत्र में ‘‘जरूरी आबादी’’ नहीं हो जाती.

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झारखंड के लिए सबक और सीख

झारखण्ड की राजधानी और यहां के जन प्रतिनिधियों के लिए यह एक बड़ा सबक और सीख है. रांची के विकास के लिए जवाबदेह एजेंसियां जब पूरी फेल हैं और दोष मढने में व्यस्त है, तब आंध्र में ‘राईट तो रिकॉल’ की पहल हमें मुंह चिढाती है. दरअसल, झारखण्ड में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि एक बार जीत हासिल कर लेने  के बाद पार्षद से लेकर मेयर, डिप्टी मेयर तक आश्वासनों से राजधानीवासियों का दिल बहलाते रहते हैं.

 

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