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अशरफ सहराई चुने गए तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष, गिलानी का लेंगे स्थान

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Sri Nager:  मोहम्मद अशरफ सहराई को तहरीक-ए-हुर्रियत का अध्यक्ष चुना गया. वह सैयद अली शाह गिलानी का स्थान लेंगे. गिलानी पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से ही लगातार 15 साल तक अध्यक्ष पद पर रहे. तहरीक- ए- हुर्रियत का गठन2003 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस में विभाजन के बाद हुआ था.

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 कॉन्फ्रेंस के प्रमुख के तौर पर गिलानी की जगह लेगें अशरफ सेहराई

अलगाववादी पार्टी के सूत्रों ने बताया कि गिलानी ने अपने पद से इस्तीफा देने का फैसला किया जिसके बाद पार्टी की कार्य समिति की बैठक में सहराई को अध्यक्ष चुना गया. सूत्रों ने बताया कि बहरहाल, गिलानी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के प्रमुख बने रहेंगे जिसका एक घटक तहरीक-ए-हुर्रियत है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सेहराई हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख के तौर पर 88 वर्षीय गिलानी का स्थान लेंगे.

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राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद गिलानी ने उठाया इस्तीफा देने का कदम

गौरतलब है कि गिलानी ने वर्ष 2001 में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की स्थापना की थी और तभी से वह इसके अध्यक्ष थे. माना जा रहा है कि टेरर फंडिग मामले में घेरे में आए गिलानी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद मजबूर होकर इस्तीफा देने का  कदम उठाया है. इससे पहले गिलानी ने शुक्रवार को दावा किया था कि उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी आईबी के एक अधिकारी की ओर से वार्ता का ऑफर मिला था जिसे उन्होंने खारिज कर दिया था. एनआईए ने पिछले दिनों जमात-उद-दावा के प्रमुख हाफिज सईद से जुड़ी आतंकवाद फंडिंग जांच के मामले में पाकिस्तान समर्थक अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के बेटों से पूछताछ की थी. एनआईए के निशाने पर गिलानी और उनके परिवार की 150 करोड़ रुपये की 14 प्रॉपर्टी हैं. गिलानी के बड़े पुत्र नईम पेशे से सर्जन हैं और छोटे बेटे नसीम जम्मू-कश्मीर सरकार के कर्मचारी थे. नईम अपने पिता के बाद पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी समूहों के अलगावादी संगठन तहरीक-ए-हुर्रियत के स्वाभाविक उत्तराधिकारी माने जाते थे. 

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