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अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में फेसबुक यूजर्स की निजी जानकारियां बनी राजनीतिक हथियार, भारत के लिए भी खतरे की घंटी

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– यह भी जानें कि आप अपना फेसबुक डाटा कैसे सुरक्षित रख सकते हैं. 

Newswing desk: सोशल मीडिया आज की तारीख में हर किसी की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है. हमारे रोजमर्रा के रुटीन में ये शामिल है, जिसमें हम अपनी निजी और व्यवसायिक कई तरह की जानकारियां साझा करते हैं. फेसबुक उन्हीं सोशल साइट्स में से एक और शायद सबसे चर्चित भी है. लेकिन फेसबुक पर यूजर्स के निजी जानकारियों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का मामला प्रकाश में आया है. दावा किया जा रहा है कि फेसबुक पर करीब 5 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारियां लीक हुईं जिसका फायदा अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप के लिए काम कर रही फर्म कैम्ब्रिज एनालिटिका ने उठाया. बताया जा रहा है कि फर्म ने वोटर्स की राय को प्रभावित करने के लिए फेसबुक यूजर्स डेटा का इस्तेमाल किया. अब इस मामले में फेसबुक के संस्थापक जकरबर्ग से जवाब मांगा गया है.  जकरबर्ग को इस मामले में ब्रिटेन की संसदीय समिति के सामने पेश होने का फरमान मिला है. 

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कैम्ब्रिज एनालिटिका का भारत कनेक्शन 
ट्रंप का चुनावी कैंपेन संभाल चुकी कैम्ब्रिज एनालिटिका का भारत के चुनावों के साथ भी कनेक्शन है. इसकी वेबसाइट पर जानकारी दी गई है कि 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में इसे कॉन्ट्रैक्ट मिला था और कुल टारगेट सीटों में से 90 फीसदी से अधिक पर इसके क्लाइंट को भारी जीत हुई थी. इतना ही नहीं दावा भी किया जा रहा है कि गुजरात इलेक्शन में बीजेपी को मात देने के लिए कांग्रेस ने इस कंपनी को ठेका दिया था. और डील चुनाव से दो साल पहले ही तय हो चुकी थी. हालांकि कैम्ब्रिज एनालिटिका कांग्रेस के लिए कुछ खास नहीं कर पायी. अब इस बात के भी चर्चे हैं कि यह फर्म भारत में 2019 के आम चुनावों के लिए भी राजनीतिक दलों के संपर्क में है.  यानी केवल अमेरिका ही नहीं,  भारत समेत पूरी दुनिया के चुनाव को इस नई तरह के बिग डेटा ऐनालिसिस से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.

 

कैम्ब्रिज एनालिटिका पर क्या है आरोप ?

cambridgeकैम्ब्रिज एनालिटिका एक ब्रिटेन की कंपनी है. इसके मालिकों में रिपब्लिकन पार्टी को चंदा देने वाले अरबपति कारोबारी रॉबर्ट मर्कर भी हैं. इस कंपनी पर साल 2016 के अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने का आरोप है. ये कहा जा रहा है कि इस कंपनी ने करोड़ों फ़ेसबुक यूजर्स के एकाउंट्स की जानकारी उनकी इजाज़त के बग़ैर इस्तेमाल की. इसके लिए कंपनी ने ऐसा सॉफ़्टवेयर तैयार किया जिससे लोगों के राजनीतिक रुझान का अंदाज़ा लगाया जा सके.

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फेसबुक की क्या थी भूमिका ?

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साल 2014 में फ़ेसबुक पर एक क्विज़ में यूज़र्स को उनके व्यक्तित्व के बारे में जानने का मौका दिया गया. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एलेक्ज़ेंडर कोगान ने ये क्विज़ डिजाइन की थी. हालांकि कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का कैम्ब्रिज एनालिटिका से कोई संबंध नहीं है. उस वक़्त फ़ेसबुक पर चल रहे ऐप्स और गेम्स में ये आम बात थी कि क्विज़ में भाग ले रहे व्यक्ति की जानकारी के अलावा उसके दोस्तों से जुड़े डेटा भी ले लिए जाते थे. हालांकि फ़ेसबुक ने अब काफी बदलाव किए हैं और डेटा डेवलपर्स अब इस तरह से यूज़र डेटा इकट्ठा नहीं कर सकते. कैम्ब्रिज एनालिटिका के लिए काम कर चुके क्रिस्टोफ़र वाइली आरोप लगाते हैं कि इस क्विज़ में 2लाख 70 हजार लोगों ने हिस्सा लिया और तक़रीबन पांच करोड़ लोगों से जुड़ा डेटा उनकी मर्जी के बगैर इकट्ठा किया गया. इनमें से ज़्यादातर लोग अमरीकी थे और वे क्विज़ में भाग लेने वाले लोगों की फ़्रेंड लिस्ट में थे. क्रिस्टोफ़र वाइली का दावा है कि ये डेटा कैम्ब्रिज एनालिटिका को बेचा गया और उन लोगों के राजनीतिक रुझान के हिसाब से ट्रंप समर्थक प्रचार सामाग्री फ़ेसबुक विज्ञापनों के जरिए उन तक पहुंचाई गई. बड़ी बात ये भी है कि क्विज़ में भाग ले रहे लोगों को इस बात का जरा सा भी गुमान नहीं था कि उनकी जानकारियों का इस्तेमाल डोनल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान में किया जाएगा.

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फेसबुक और कैम्ब्रिज एनालिटिका का आरोपों से इनकार

हालांकि कैम्ब्रिज एनालिटिका इन आरोपों से इनकार करती है और उसका कहना है कि ट्रंप के इलेक्शन कैम्पेन को मुहैया कराई सेवाओं में ये सब कुछ शामिल नहीं था. ये डेटा उस वक्त फ़ेसबुक के नेटवर्क का इस्तेमाल करके इकट्ठा किया गया था. कई डेटा डेवलपर्स ने इसका फ़ायदा उठाया था. लेकिन फ़ेसबुक को अपने यूजर्स से जुड़े ये डेटा दूसरी पार्टियों के साथ शेयर करने का अधिकार नहीं था. वही फ़ेसबुक का कहना है कि जब उन्हें पता चला कि उनके नियम तोड़े जा रहे हैं और उन्होंने इस क्विज़ ऐप को हटा दिया और क्विज़ तैयार करने वाले से ये आश्वासन भी मांगा कि यूजर्स की जानकारी डिलीट कर दी जाएगी. वही कैम्ब्रिज एनालिटिका कांड के सामने आने के बाद फ़ेसबुक पर हैशटैग #DeleteFacebook ट्रेंड करने लगा है. 

 फेसबुक पर कैसे सुरक्षित रखें डेटा ?

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फेसबुक पर 5 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारी लीक होने के बाद से यूजर्स को अपने डेटा की सुरक्षित होने की चिंता सताने लगी है. जाहिर से बात है हमारे निजी, व्यवसायिक जिंदगी से जुड़ी कई तरह की जानकारियां हम फेसबुक पर शेयर करते हैं, ऐसे में निजता के हनन का डर सताना लाजमी है. लेकिन आप चंद तरीके अपनाकर अपने डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं.

  1. सबसे पहले फेसबुक पर लॉगइन करें और फिर सेटिंग में जाएं
  2. इसके बाद ऐप्स पर क्लिक करें. अब ऐप्स, वेबसाइट्स और प्लगइन के नीचे दिख रहे एडिट बटन पर टैप करें.
  3. अब प्लैटफॉर्म को डिसेबल कर दें.
  4. ऐसा करने से आप फेसबुक पर किसी भी थर्ड पार्टी ऐप या साइट का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे.

बरतें सावधानी  
इसके अलावा कई बार आप किसी थर्ड पार्टी साइट पर लॉगइन करने के लिए फेसबुक के जरिए लॉगइन करते हैं. ऐसा करने से बचें, क्योंकि भले ही यह आसान तरीका हो, लेकिन सुरक्षित नहीं है. लॉगइन करने से यूजर्स ऐप डिवेलपर को अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर मौज़ूद जानकारियों को एक्सेस करने की अनुमति दे देते हैं. किसी भी गेम या क्विज या आकर्षित करने वाले पेज को लाइक न करें. 

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