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अमित महतो को सजा सुनाए जाने के बाद विधायकी हुई रद्द, राज्यसभा में मत हो कैंसिल, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में पार्टी : बीजेपी

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Ranchi: राज्यसभा चुनाव में अपनी हार के बाद बीजेपी ने एक नया दांव खेला है. पार्टी अमित महतो को मोहरा बना रही है. शुक्रवार को आये नतीजों में कांग्रेस के उम्मीदवार धीरज साहू और बीजेपी के उम्मीदवार समीर उरांव की जीत की घोषणा हुई. जीत के बाद विधानसभा परिसर में ही दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच हाईवोल्टेज ड्रामा भी देखने को मिला. कांग्रेस अभी जीत के हैंगओवर से बाहर भी नहीं आया था कि बीजेपी की तरफ से नयी चाल चली गयी है. हालांकि इस खेल का अंत क्या होगा कहना मुश्किल है. क्योंकि देश की यह पहली घटना मानी जा रही है, जिसमें राज्यसभा के लिए मतदान करने वाले विधायक को किसी मामले में सजा हुई हो.

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हो रहा है उल्लंघन : दीपक प्रकाश

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एक तरफ विधानसभा परिसर में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी. दूसरी तरफ सिल्ली के झामुमो विधायक को सिल्ली के जिला न्यायलय में सजा सुनायी जा रही थी. विधायक को झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के साथ मारपीट करने के मामले में दो साल की सजा हुई है. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में यह फैसला दिया था कि किसी विधायक को किसी मामले में दो साल की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता उसी वक्त से रद्द हो जाती है. ऐसे में अमित महतो की भी सदस्यता रद्द मानी जानी चाहिए. इन बातों को बीजेपी के प्रदेश महामंत्री दीपक प्रकाश बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में मीडिया के सामने रख रहे थे. उन्होंने कहा कि जब सजा सुनाते ही अमित महतो की सदस्या रद्द हो गयी तो कैसे अमित महतो के वोट की गिनती हो सकती है. कहा अमित महतो के वोट को कैंसिल किया जाना चाहिए, क्योंकि सजा सुनाये जाने के बाद उनकी सदस्यता रद्द मानी जाएगी.

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रिटर्निंग अफसर ने दी थी जानकारी, बावजूद इसके वोट की गिनती हुई : अनंत

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मीडिया के सामने अपनी बात रखते बीजेपी के साहेबगंज विधायक अनंत ओझा ने कहा कि अमित महतो को दो साल की सजा हुई है, इस बात की जानकारी रिटर्निंग अफसर को 11.30 बजे ही दे दी गयी थी. लेकिन बावजूद इसके अमित महतो के मत की गणना हुई. जो सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर के खिलाफ जाता है. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और झामुमो ने इस बात की जानकारी छिपाने की कोशिश की. कांग्रेस और झामुमो को सुप्रीम कोर्ट के आदेश को काउंटिंग अफसर को बताना चाहिए था. लेकिन विपक्षी पार्टी ने ऐसा नहीं किया. कहा बीजेपी इस मामले को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी में है. कानूनी सलाह लिए जाने के बाद हाईकोर्ट में मामले ले जाया जायेगा. साथ ही कहा कि झामुमो को बताना चाहिये कि राज्य की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के बावजूद झामुमो ने अपना उम्मीदवार क्यों नहीं उतारा. आखिर दोनों के लिए क्या डील हुई है, यह जनता के सामने आना चाहिये.

एलजेपी ने भी की चुनाव आयोग से शिकायत
 लोकजन शक्ति पार्टी ने भी चुनाव आयोग से अमित महतो की सदस्यता को लेकर शिकायत की है. पर्टी के प्रदेश अध्यक्ष बबन गुप्ता ने चुनाव आयोग से कहा है कि झामुमो के विधायक अमित महतो को दो साल की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता खत्म हो जाती है. ऐसे में उनके मत को अमान्य किया जाना चाहिए. श्री गुप्ता ने आयोग से गुजारिश की है कि उनके वैलेट पेपर को अमान्य करार देकर फिर से वोटों की गिनती करायी जाए.

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