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अपने 60 दिन के अनुभव से मोदी आश्वस्त .. “जनता की आकांक्षाएं पूरी करूंगा!”

नई दिल्ली: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा और कहा कि 60 साल में कुछ न करने वाले उनसे 60 दिन का हिसाब मांग रहे हैं। मोदी ने नाम लिए बगैर राहुल को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि चुनाव में घोर पराजय के बाद भी लोग वोट बैंक की पुरानी आदतों को छोड़ नहीं पा रहे हैं। ऐसे लोग समाज के ताने-बाने को बिखेरने में लगे हैं। राहुल ने शुक्रवार को एक अखबार से बातचीत में कहा था कि उत्तर प्रदेश में जारी सांप्रदायिक संघर्षों की कृत्रिम तरीके से और सोच-समझकर साजिश रची गई है।

मोदी ने WTO को लेकर भी कांग्रेस पर हमला बोला और कहा कि जो लोग पूरे चुनाव में फूड सिक्यॉरिटी बिल के नाम पर वोट मांगते रहे, उन्होंने गरीब को फूड न मिले ऐसा निर्णय WTO में साइन कर दिया था। मोदी ने कहा कि WTO में भारी दवाब के बावजूद उनकी सरकार ने गरीब किसानों के हित के साथ कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने कहा कि देश में पूर्ण बहुमत के साथ नई सरकार के आने से भारत के प्रति दुनिया का नजरिया बदल गया है। अपने भाषण में मोदी ने लोकसभा चुनाव में जीत का श्रेय तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और तब यूपी के प्रभारी रहे अमित शाह को दिया। मोदी ने कहा कि लोकसभा चुनाव में राजनाथ कैप्टन थे, तो मैन ऑफ द मैच अमित शाह रहे।
मोदी के भाषण की खास बातें…
अमित शाह की तारीफ: लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत पर मोदी ने कहा, ‘तब राजनाथ टीम के कैप्टन थे। उनकी कैप्टनशिप में लाखों कार्यकर्ताओं ने यह जीत हासिल की। इसके मैन ऑफ द मैच अमित शाह थे। अमित शाह राष्ट्रीय टीम में न आए होते और यूपी का प्रभार न मिला होता तो शायद देश उनकी शक्तियों से परिचित नहीं होता। मोदी ने शाह की तारीफ करते हुए कहा, ‘अमित शाह को मैंने नजदीकी से जाना, पहचाना है। मुझे विश्वास है कि पार्टी ने शाह को जो दायित्व दिया है, उसे वह भली-भांति निभाएंगे।’

लोकसभा चुनाव में जीत का भरोसा थाः मुझे लोकसभा चुनाव में जीत का भरोसा था। इस चुनाव में पॉलिटिकल पंडितों को बड़ी मुश्किल थी। शुरुआत ऐसे हुए थी कि मोदी को गुजरात के बाहर जानता कौन है? मामला वहीं से शुरू हुआ था। देश की जनता बता देने के मूड में थी। आपको ध्यान होगा जब 2013 फरवरी की राष्ट्रीय परिषद थी। उसमें मुझे बोलने का मौका मिला था। तब मैंने कहा था कि हम चलें या न चलें, देश चल पड़ा है। सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले व्यक्ति को जनता के मूड का अहसास होता है।

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300 सीटों के दावे पर लोग टोकते मुझे थे: मैंने चुनाव अभियान के एक हफ्ते के बाद 300 सीट की बात की तो साथी भी टोकते थे कि संख्या क्यों बोल रहे हैं। लेकिन मुझे लगता था कि जनता को भी लगता है कि कोई मांगने वाला तो आए। मांगने वाले में दम कितना है, जनता देने को तैयार थी। देश की जनता ने इस चुनाव में उत्तम तरीके से अपना कर्तव्य निभाया, अब बारी हमारी है।

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कांग्रेस पर निशानाः पिछले 2 महीनों के अनभुव से मैं दावे से कहता हूं कि देश की जनता की आशा-अकांक्षा को हम भली-भांति पूरा करेंगे। आने के बाद ही मेरा काफी समय सफाई में गया है… वर्क कल्चर बदलने में गया है। लोगों को अचरज होगा कि चुनावी घोषणापत्र के इतने मुद्दे बजट में आ गए और रोडमैप तैयार कर लिया गया है। 60 दिन में इतनी तेजी से चीजें बदलनी शुरू हो गई हैं… मैं हैरान हूं कि जो 60 साल में कुछ नहीं कर पाए वह 60 दिन में हिसाब मांग रहे हैं।

60 दिन के काम से बढ़ा विश्वासः मैं 60 दिन के अनुभव के बाद देश को विश्वास दिलाता हूं कि हमारी सरकारी की दिशा सही है। हम पुरुषार्थ की पराकाष्ठा कर रहे हैं… हालात को जांच और भांप गए हैं.. बदलाव के बाद सफलता हासिल करेंगे।

नई सरकार से बदला दुनिया का नजरियाः चुनाव जीतने के बाद जो मैंने नहीं सोचा था, वह पहलू मेरे सामने आया। नई सराकर बनने के बाद पूरी दुनिया का नजरिया और व्यवहार भारत के साथ बदला है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यह सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आई सरकार है। दुनिया के देशों पर इस बात का बहुत असर है। पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी है। पूरी दुनिया के अंदर निर्णायक स्थिति का अवसर है। मैं विश्वास के साथ कहता हूं कि हिंदुस्तान का डंका चलेगा।

एक नहीं कई ‘PM’ चाहिएः इतने बड़े देश में एक पीएम से काम नहीं चल सकता है। बीजेपी को हर पोलिंग बूथ में 100-200 पीएम होने चाहिए। पीएम मतलब प्राइमरी मेंबर से है (मुस्कुराते हुए)। इससे हम राजनीतिक गतिविधियों को नई दिशा दे सकते हैं।

हमारे लिए कठोर मानदंडः हम अकेले ऐसे हैं, जिनकी कसौटी के तराजू भी अलग है। नापने के लिए मानदंड भी अलग हैं। ऐसा क्यों है, समय बताएगा। इसमें से भी हम अच्छा कर सकते हैं। अच्छी बात है कि हमारे लिए मानदंड कठोर रखा जाता है… ऐसे तराजू में तौला जाता है, जिसमें किसी दूसरे दलों को नहीं तौला जाता… मैं इस चुनौती को स्वीकार करता हूं। मैं 14 साल तपकर निकला इंसान हूं। अगर देश के लिए समर्पित भाव से काम करें तो कठोर से कठोर कसौटियों से खरा उतरेंगे।

WTO में गरीब किसानों के लिए अड़ेः WTO के फैसले को लेकर बहुत भ्रम फैलाने की कोशिश हुई, दनिया में भारत को अलग-थलग करने की कोशिशें हो रही हैं। क्या हमें भारत के किसानों की भलाई का रास्ता चुनना चाहिए या फिर दुनिया के अखबारों में अच्छे आर्टिकल छप जाएं यह रास्ता चुनना चाहिए था। मुझे श्रेय और प्रेय में चुनना था। हमारी सरकार ने श्रेय का रास्ता चुना है। गरीब देश के गरीबों की चिंता के लिए ऐसा रास्ता चुना है। WTO को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधने हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने वहां हस्ताक्षर कर दिए थे। (साभार: नवभारत टाइम्‍स)

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