युवक-युवतियों को प्रशिक्षित कर आठ से 45 हजार का रोजगार दे रहे हैं : निदेशक कौशल विकास मिशन

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 01/13/2018 - 18:50

स्किल समिट 2018 के आयोजन को लेकर उठ रहे कई सवाल, झारखंड कौशल विकास मिशन के निदेशक ने न्‍यूज विंग को दिया जवाब

Ranchi: झारखंड की रघुवर सरकार ने एक साथ 25 हजार से भी अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का रिकॉर्ड बनाया. इस पूरे प्रकरण में हुई गड़बडियों का न्‍यूज विंग लगातार पर्दा उठा रहा है. वहीं दूसरी ओर सरकार इसे न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश और दुनिया में इस तरह का सबसे बड़ा आयोजन बता रही है.  दूसरी ओर जिन युवाओं को नियुक्ति पत्र मिला है, उनके मन में भी कई तरह की शंका है. कहीं उन्‍हें सात-आठ हजार की नौकरी के लिए झारखंड से दूसरे राज्‍य के शहरों में जाना पड़ेगा. इसी तरह के कई सवालों और शंका का जवाब जानने के लिए न्‍यूज विंग की टीम ने झारखंड कौशल विकास मिशन के निदेशक रवि रंजन से खास बातचीत की.

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सवालः स्किल समिट 2018 को आप झारखंड सरकार की कितनी बड़ी उपलब्धि मानते हैं.

जवाबः रांची में आयोजित स्किल समिट 2018 का आयोजन राज्‍य में ही नहीं पूरे देश का सबसे बड़ा आयोजन है. मेरा मनना है कि यह पूरे विश्‍व का सबसे बड़ा आयोजन हुआ है. हमने इंटरनेट आदि में सर्च किया है. रोजगार के लिए इतना बड़ा आयोजन अब तक कहीं नहीं हुआ है.

सवालः स्किल समिट 2018 में  झारखंड कौशल विकास मिशन के साथ-साथ सरकार के कितने विभाग शामिल हुए और उनकी भूमिका क्‍या थी.

जवाब: स्किल समिट 2018 के आयोजन में झारखंड कौशन विकास मिशन के साथ राज्‍य सरकार के 15 विभाग भी शामिल थे. हमारा कार्यक्रम बड़ा होता है. छोटे स्‍तर पर ही सही सभी विभाग कुछ न कुछ अपनी सहभागिता दिखाते हैं. सभी विभागों के द्वारा प्र‍शिक्षित लोग जिन्‍हें रोजगार मिला है, वह भी आयोजन में शामिल थे.

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सवालः  झारखंड में कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए किस तरह की योजनायें चलाई जा रही है. किस तरह के युवाओं

Jharkhand skill summit
Jharkhand skill summit

को क्‍या प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

जवाबः  हमारा यह कार्यक्रम हर तरह के युवाओं के लिए है, चाहे वह स्‍कूल ड्रॉप आउट और कॉलेज ड्रॉप आउट ही क्‍यों न हो. बहुत सारे प्रशिक्षण कार्यक्रम है. खास कर महिलाओं के लिए.  हम युवाओं को ऐसी प्रशिक्षण दे रहें हैं, जहां उन्‍हें नौकरी मिलने की चांस ज्‍यादा है. स्किल समिट 2018 में 27500 युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया गया, इसमें से 6500 युवाओं को टेक्‍सटाइल क्षेत्र से जॉब ऑफर मिला. टेक्‍सटाइल के क्षेत्र में युवाओं के लिए अच्‍छा स्‍कोप है. इसके अलावे आईटी, कंप्‍यूटर, हार्डवेयर, नेटवर्किंग, रिटेल, टेलिकॉम, कस्‍टमर केयर एग्‍जीक्‍यूटिव, कैपिटल गुड्स, कंस्‍ट्रक्‍शन अच्‍छे क्षेत्र हैं.  जहां हुनरमंद युवाओं की जरूरत है और इसके लिए हम ट्रेनिंग करा रहे हैं.

सवालः  झारखंड में कितनी एजेंसियां और कंपनियां कौशल विकास योजना के साथ जुड़ी हैं.

जवाबः हमारे तीन तरह के कार्यक्रम चलते हैं. पहला है सक्षम झारखंड कौशल विकास योजना. इसमें केंद्र का साइज थोड़ा छोटा होता है. इसमें प्रशिक्षण केंद्र कम से कम 3000 वर्ग फीट का होना चाहिए. छोटा इसलिए है क्‍योंकि ऐसे केंद्र सुदूर प्रखंड स्‍तर पर चलाये जा रहे हैं. वहां बड़ा प्रशिक्षण केंद्र चलाने का कोई मतलब  नहीं है. हर कोई अपने घर के आस-पास ट्रेनिंग चाहता है, इसलिए ये कारगर भी हैं. दूसरी है दीनदयाल कौशल विकास केंद्र. यह मेगा स्‍कली डेवलपमेंट सेंटर होते हैं. यहां पर एक साथ 40 बैच तक चलाये जा रहे हैं और 1200 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. और तीसरा कार्यक्रम है एक्‍सेल. यह चलता है डिग्री कॉलेजों में. इसमें ज्‍यादातर लोग इंटरनेट, आईटी, डिजिटल लिट्रेसी, फाइनेंशियल लिट्रेसी, लिगल लिट्रेसी यह सब पढ़ाते हैं. क्‍योंकि देखा गया है कि झारखंड के जो ग्रेजुएड हैं वह नौकरी पाने में इसलिए भी पिछड़ जाते हैं क्‍योंकि उनमें स्‍कील नहीं है और आज का जो नियोक्‍ता है उसे सिर्फ किताबी कीड़ा वाला आदमी नहीं चाहिए. वह देखता है कि उसमें लीडरशिप क्‍वालिटी कितनी है, अपने आइडियाज को कितने अच्‍छे से एक्‍सप्रेस कर सकता है. उसी गैप को पूरा करने के लिए हमने एक्‍सेल कार्यक्रम को चलाया है. अभी यह बहुत छोटे स्‍तर पर यह 27 कॉलेजों में यह शुरू हुआ है और आने वाले समय में इसका विस्‍तार होगा.

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सवालः कौशल विकास कार्यक्रम में अब तक कितना खर्च हुआ और आने वाले बजट में क्‍या उम्‍मीद करते हैं.

जवाबः  वर्तमान वित्तिय वर्ष 2017-18 में कौशल विकास के लिए हमारा बजट 200 करोड़ रूपये का था. अगले साल के लिए बजट बन रहा है, देखते हैं और उम्‍मीद करते हैं कि पिछले साल से ज्‍यादा बजट मिलेगा.

सवाल : जिन युवाओं को जॉब के लिए ऑफर लेटर दिया गया है, उनके मन में डर है कि 6 हजार और 7 हजार के नौकरी के लिए राजस्‍थान और नोएडा जैसे दूसरे शहरों और राज्‍यों में पोस्टिंग होगी. एेसे में घर भी छुटेगा और पैसा भी कम मिलेगा.

जवाबः  मेरी जानकारी में नहीं है कि किसी को 6-7 हजार के जॉब का ऑफर मिला है. जो भी है मार्केट डिमांड एंड सप्‍लाई पर चलता है. जॉब मार्केट बहुत अलग होता है. आप देखियेगा कि एक इंजीनियर को भी कितना का पैकेज मिलता है. आप कहेंगे बहुत कम मिल रहा है, लेकिन लोग जाने को तैयार हैं. अगर किसी घर में 2 हजार रूपये का आय है और उसे 8 हजार रूपये मिल रहा है तो क्‍या वह नहीं जायेगा.

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सवालः  क्‍या आज के समय में 6-7 हजार रूपये में दूसरे शहर में जॉब करते हुए कैसे गुजारा कर सकता है और परिवार चला सकता है.

जवाब : हर किसी को अपनी काबिलियत के हिसाब से पैसा मिलता है. युवाओं को हम 8 हजार और 45 हजार का जॉब भी दे रहे हैं. तो आप यह नहीं कह सकते है किसी को इतना कम पैकेज क्‍यों मिल रहा है. जो कुछ नहीं जानता है चौथा-पांचवा पढ़ा है. उसे कितना बड़ा नौकरी मिलेगा. शुरूआत में फ्रेशर के तौर पर कम पैकेज मिल रहा है तो वह भी ठीक है. बाद में यह बढ़ जाता है. सात-आठ हजार तो इन हैंड है, लेकिन उसके साथ बोर्डिंग-फूडिंग और लॉजिंग कंपनी फ्री में मुहैया कराती है.

सवालः युवाओं और खास कर युवतियों के साथ जॉब की सिक्‍युरिटी को लेकर खतरा बना रहता है, जब वे दूसरे शहरों में काम करेंगे तो किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए विभाग युवाओं के लिए क्‍या उपाय कर रही है.

जवाबः  हम किसी परफेक्‍ट सोसाइटी में नहीं रहते हैं, इसलिए बहुत बार ऐसी कुछ-न-कुछ घटनायें हो जाती हैं, जिसमें रोजगार देने वाली कंपनियों पर सवाल उठता है. हम उन्‍हीं कंपनियों को बुलाते हैं जो बहुत प्रतिष्ठित कंपनियां होती हैं. फिर भी कुछ ऐसे मामले आ सकते हैं, जिसमें सैलरी कुछ ऑफर किया गया हो और दिया जा रहा है कुछ. हमारे कार्यक्रम के दौरान अभी तक ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है. हमारी कोशिश है कि ऐसे अपवाद को कम से कम किया जाय.

Jharkhand skill summit
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सवालः क्‍या विभाग सभी इम्‍पलायर कंपनियों का डाटाबेस तैयार कर रही है, क्‍या युवा उन कंपनियों पर भरोसा कर सकते हैं.

जवाबः सभी कंपनियों और एजेंसियों का डाटाबेस तैयार है. एक-एक इंप्‍लायर का डाटा बेस तैयार है. इम्‍पलायर का भी चयन काफी सोच समझ कर किया गया है. कोई अगर कह दे कि हमें 50 आदमी चाहिए और हम इंटरव्‍यू करना चाहते हैं, तो हम कतई उन्‍हें अपने बच्‍चों के सामने नहीं करेंगे. जो हमारे ट्रेनिंग सर्विस प्रोवाइर्स हैं उनका काफी सालों से प्‍लेसमेंट कंपनियों से करार रहता है. इसके अलावा हमारा अपना मैकेनिज्‍म है हम भी उन्‍हें अलग से वेरीफाई करते हैं.

सवालः कौशल विकास योजना के तहत वैसी कंपनियों और एजेंसियों का भी चयन किया गया जिनके पास कोई अनुभव और विशेषज्ञता नहीं थी. उन कंपनियों को चुन लिया गया जिनकी दक्षता किसी दूसरे क्षेत्र में रही है.

जवाबः  हमारे कार्यक्रम में ऐसी गड़बडियों की शिकायत अभी तक नहीं मिली है. यह दूसरे कार्यक्रम जैसे एनयूएलएम में हो सकता है, हमारे पार्टनर्स में यह गड़बड़ी नहीं हुई.

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