ग्रामीणों की इच्छाशक्ति से बनलोटवा गांव बना नशामुक्त व ओडीएफ, मगर सरकार नहीं दिखा रही इच्छाशक्ति

Publisher NEWSWING DatePublished Mon, 02/12/2018 - 15:28

Ranchi: नशामुक्‍त गांव 'बनलोटवा' मुस्‍कुराते हुए आईए यह स्‍लोगन राजधानी रांची के 30 किलोमीटर दूर अनगड़ा प्रखंड में स्थित इस गांव में आने पर सबसे पहले देखने को मिलता है. यह गांव न सिर्फ नशामुक्‍त है, बल्कि खुले में शौच से मुक्‍त यानी ओडीएफ गांव भी है. यह किसी सांसद या विधायक का गोद लिया हुआ गांव नहीं है, बल्कि इसकी तस्‍वीर बदली है यहां के ग्रामीणों ने. इसके पीछे इनकी सालों की कड़ी मेहनत और एकजुटता के साथ इच्‍छा शक्ति है.

आपस में मिलकर ग्रामीण चलाते हैं सफाई अभियान

बनलोटवा गांव के वन प्रबंधन समिति के अध्‍यक्ष शंकर महतो ने बताया कि हमारा गांव दिखने में साफ और सुंदर है. इसके लिए हम एक रूटीन बनाकर आपस में काम बांटकर इसे पूरा करते हैं. सफाई के लिए गांव में 10-12 लोगों की अलग-अलग टीम बनी हुई है. सभी मिलकर सुबह-सुबह 6:30 से 7:30 तक सबसे पहले सफाई करते हैं. यह व्यवस्था इस गांव में 1987 से चल रही है.

रांचीनशामुक्ति के लिए ग्रामीणों ने खुद नियम बनाये और उसका पालन भी कराया

गांव के पारा शिक्षक लखीराम महतो बताते हैं कि गांव को नशामुक्‍त करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. पिछले 11 महीने से हमारा गांव नशामुक्‍त है. हम गांव वालों ने मिलकर नियम बनाये और कड़ाई से उसका पालन कराया. जिन लोगों का शराब बनाना ही रोजगार था, उनके लिए भी हमें काम करना पड़ा. आज इस बदलाव से सभी ओर खुशहाली है.

बुनियादी समस्याओं से जुझ रहा है बनलोटवा गांव

नशामुक्ति और स्‍वच्‍छता के लिए मिसाल बनी बनलोटवा गांव भी दूसरे गांवों की तरह बुनियादी समस्‍याओं से घिरी हुई है. यहां के प्रधान देवचरण महतो ने बताया कि गांव में बहुत बदलाव देखने को मिला है. हमारा गांव ओडीएफ भी है. लेकिन अभी भी हम बुनियादी समस्‍याओं से जूझ रहे हैं. गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. बनलोटवा में सिर्फ दो ही परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की मंजूरी मिली है. जबकि ज्‍यादातर परिवारों का कच्‍चा मकान है. यहां की बुढ़ी महिलाओं को वृद्धा पेंशन भी नहीं मिल रहा है.

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गांव में स्वास्थ्य सुविधा बदहाल

शंकर महतो बताते हैं कि गांव में शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा का भी अभाव है. गांव में सिर्फ के उत्‍क्रमित मध्‍य विद्यालय है, जिसमें 80 विद्यार्थियों के लिए सिर्फ 2 पारा शिक्षक है. बच्‍चों को आगे की पढ़ाई के लिए 5 किलोमीटर दूर दूसरे गांवों में जाना पड़ता है. इसी तरह स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था का भी हाल बेहाल है. बीमार लोगों के इलाज के लिए गांव में कोई इंतजाम नहीं है. पीएचसी गांव से 14 किलोमीटर दूर है.

रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाते हैं लोग

शंकर महतो ने बताया कि गांव में करीब 481 लोगों की आबादी है. हम मूल रूप से खेती किसानी करते हैं, लेकिन यह काम सालों भर नहीं चलता है. सिंचाई के अभाव में सिर्फ बारिश के दिनों में ही एक सीजन की खेती करते हैं. उसके बाद गांव के लोग रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाते हैं.

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