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Minority Affairs Minister Rehman to Visit Jharkhand in May

Ranchi : Rajya Sabha Member Mr. Parimal Nathwani met the Union Minister for Minority Affairs, Mr. K Rahman Khan in Delhi with a list of problems of minorities in Jharkhand. The major problem facing the minorities in Jharkhand are recognition to the Madrasas, mid-day-meal for Madarsas, appointment of Urdu teachers and payments to Block Resource Persons (BRP)/ Cluster Resource Persons (CRPs) etc. During the meeting of Mr. Nathwani with the Minister on March 20, 2013, the President of Jharkhand Students’ Union, Mr. S. Ali and others also joined.

छत्तीसगढ़ में गैरजमानती होगा इंटरनेट पर यौन उत्पीड़न

रायपुर :छत्तीसगढ़ में यौन उत्पीड़ण पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश के गृहमंत्री ने दंड विधान (छत्तीसगढ़ संशोधन) अधिनियम 2013 विधानसभा में पेश किया है। गुरुवार को इस पर चर्चा शुरू होगी। पेश विधेयक में महिला को मोबाइल पर अश्लील एसएमएस भेजने को गंभीर अपराध की श्रेणी में लाया जा रहा है।

Deepika releases the trailer of Yeh Jawaani Hai Deewani

Mumbai: It was an eventful day for Deepika as she launched the trailer of the much-awaited Yeh Jawaani Hai Deewani along with her co-star Ranbir Kapoor. The event was held at a suburban multiplex. The actress looked adorable in a pretty black dress as she enthusiastically spoke about her upcoming film.

The film brings Deepika and Ranbir together after four long years. A lot has been spoken about the duo’s on-screen chemistry and looking at the trailer, it has been worth the wait!! The three and half minute trailer is a fun-filled extravaganza. Deepika’s character sees a transformation as the trailer progresses. She plays the role of Naina, a nerdy girl that seems to come out of her shell to become her confident glamorous self.

This is the first time Deepika has worked with Dharma Productions, but her comfort level with Karan Johar and the team, spoke a whole other story!

रेलगाड़ियों में खाकी और खादी से भी महफूज नहीं महिलाएं

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में रेलगाड़ियों में सफर के दौरान महिला यात्री आए दिन सिर्फ आम यात्रियों से ही छेड़खानी और बदसलूकी का शिकार नहीं हो रही। अब वे जिम्मेदार खाकी, खादी और नौकरशाह से भी महफूज नहीं हैं।

यशवंत और रघुवर पर भारी पड़े मुंडा

|| विनोद कुमार ||
खुद को ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ कहने वाली भाजपा में भी कांग्रेस की तरह अध्यक्ष पद पर रवींद्र राय का मनोनयन हो गया। पार्टी झारखंड में उसी तरह गुटबाजी की शिकार है जिस तरह कांग्रेस। महज 18 विधायकों में सिमट गई इस पार्टी में कई खेमे हैं और उनमें गुटबाजी चलती रहती है। झामुमो के समर्थन वापस ले लेने के बाद अर्जुन मुंडा की सरकार गिर गई और पहले से चल रही गुटबाजी अचानक तीव्र हो गई। ताजा खबर यह कि अर्जुन मुंडा एक बार फिर यशवंत सिन्हा पर भारी पड़े और अपने मनमाफिक व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया। यशवंत सिन्हा ने पैतरा तो यहां तक दिया कि वे पार्टी से किनारा तक कर ले सकते हैं, लेकिन बाबूलाल मरांडी जैसा हौसला हर किसी में नहीं होता। रही रघुवर की बात, तो वे हमेशा भाजपा में ‘लो प्रोफाईल’ वाले नेता माने जाते रहे हैं।

दरअसल, यशवंत सिन्हा पार्टी में आदर के तो पात्र हैं और उनकी बातों को तवज्जो भी दिया जाता रहा है, लेकिन पार्टी के शीर्ष नेताओं की समझ है कि वे चुनाव के वक्त वोटरों को आकर्षित नहीं कर सकते। वे प्रशासनिक सेवा के बड़े अधिकारी थे जो कई दलों से होते हुए भाजपा में पहुंचे और भाजपा के शासन में वित्त मंत्री, विदेश मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे। लेकिन जो सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में अपने नाम से कालोनी बनवाने के चक्कर में रहे, उसकी शक्ति और सीमा को सभी जानने समझने लगते हैं। इसके अलावा पार्टी अध्यक्षों को सामान्यत: क्षत्रप के रूप में अपने से कमजोर नेता की दरकार रहती है। यशवंत या कड़िया मुंडा जैसे सीनियर नेता की नहीं। यह अलग बात की सीनियर नेताओं की चाहत केंद्र में दूसरे स्थान की जगह अपने गृह प्रदेश में पहले स्थान पर रहने की होती है। माना जाता है कि यशवंत सिन्हा ने ऐलानिया कभी कहा नहीं, लेकिन वे झारखंड के मुख्यमंत्री या प्रदेश अध्यक्ष जैसे पदों के दावेदार रहे हैं। लेकिन गडकरी के मुकाबले खुद को खड़ा करने का पैंतरा देकर जिस तरह उन्होंने केंद्र में राजनाथ सिंह का रास्ता प्रशस्त कर दिया, उसी तरह यहां अर्जुन मुंडा के मुकाले खड़े हो कर उन्होंने रवींद्र राय का रास्ता प्रशस्त कर दिया। वैसे, रवींद्र राय के नाम की सिफारिश खुद अर्जुन मुंडा ने की थी जिसे राजनाथ सिंह ने झट मान लिया और उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद पर मनोनीत कर दिया। यहां याद दिलाना जरूरी है कि इस लिहाज से भाजपा और कांग्रेस दोनों में कोई खास अंतर नहीं। दोनों पार्टियां लोकतंत्र का दम तो भरती हैं, लेकिन दोनों में पार्टी अध्यक्ष का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नहीं, मनोनयन से होता है। खैर, बात हो रही है ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ की। तो, भाजपा में हमेशा नेता की ‘डिगनिटी’ से ज्यादा महत्व उसके ‘मैनेज’ करने की क्षमता को दिया जाता है। झारखंड के गठन के बाद भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी बने। कमाऊ मंत्रिमंडल की खींचतान में जदयू नेताओं ने सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी। यही राजनाथ सिंह रांची आये। उनके सामने अवसर था कि वे सरकार खो कर अपनी पार्टी की गरिमा बचा लेते, लेकिन उन्होंने बाबूलाल की बलि दे कर सरकार बचा ली। अर्जुन मुंडा उनके आकलन पर खड़े उतरे और उन्होंने जदयू के भ्रष्ट नेताओं को मैनेज कर लिया।

पार्टी और सरकार को चलाने की कला अर्जुन मुंडा को आती है और इसका प्रमाण उन्होंने एक बार फिर 2005 के चुनाव के बाद दिया। एक कांख में सुदेश महतो को रखा और दूसरे कांख में निर्दलीय विधायकों-एनोस एक्का और हरिनारायण राय- को और दिल्ली राजस्थान की हवा खिला कर वापस झारखंड आये और विधानसभा में बहुमत साबित कर शिबू सोरेन की सात दिनी सरकार का पत्ता साफ कर दिया। टाटा की जमींदारी का नवीकरण किया और अपने चरित्र पर दाग नहीं लगने दिया। राजनाथ ही नहीं, पूरी भाजपा, यानी, ‘पार्टी विथ डिफरेंस’ उनकी कायल हो गई। लेकिन जनता कायल नहीं हुई। 2010 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के विधायकों की संख्या 30 से घट कर 18 पहुंच गई। अर्जुन मुंडा की ‘मैनेज’ करने की क्षमता एक बार फिर काम आई और राज्य में भाजपा और झामुमो की सरकार बन गई।

लेकिन 28 महीनें की करार पर तकरार के बाद झामुमो ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया और अर्जुन मुंडा सरकार का पतन हो गया। साथ ही संभावित विधानसभा और संसदीय चुनावों को देखते हुए पार्टी में गुटबाजी तेज हो गई। भाजपा के भीतर एक खेमा इस बात को प्रचारित करने में लग गया कि आदिवासी वोट तो भाजपा को एकमुश्त मिलने से रहा, फिर गैर आदिवासी वोट, खास कर अगड़े वोटों को भाजपा के पक्ष में गोलबंद करने के लिए पार्टी का नेतृत्व किसी अगड़े को क्यों न सौंप दिया जाये। पार्टी में एक मजबूत खेमा इस बात का भी पक्षधर है कि झारखंड का मुख्यमंत्री जरूरी नहीं कि आदिवासी ही हो। इस मुहिम को यशवंत सिन्हा, रघ्ाुवर दास और सरयु राय जैसे नेता बहुत पहले से चला रहे हैं। स्थिति को भांपते हुए अर्जुन मुंडा ने रवींद्र राय की चाल चल दी। अब सब बिलबिला रहे हैं। गौरतलब यह है कि राजनाथ और अर्जुन मुंडा के बीच पुराने संबंध हैं। अर्जुन मुंडा, झारखंड में राजनाथ सिंह के सबसे विश्‍वस्त व्यक्ति माने जाते हैं। इसलिए राजनाथ जब तक पार्टी के अध्यक्ष रहेंगे, तब तक झारखंड में अर्जुन मुंडा का पलड़ा भारी रहेगा। अर्जुन मुंडा प्रदेश अध्यक्ष रहे या न रहें। रवींद्र राय से बेहतर इस बात को और कौन जानता है? (लेखक विनोद कुमार राजनीतिक समीक्षक है)

मप्र में विदेशी महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म

दतिया | स्विजरलैंड से भारत भ्रमण पर आई एक महिला के साथ मप्र में सात हथियारबंद व्यक्तियों द्वारा दुष्कर्म किए जाने का मामला प्रकाश में आया है।

मोहाली टेस्ट : धवन के बल्ले की 'धार' के आगे चित्त हुए कंगारू

मोहाली (पंजाब): दिल्ली के बल्लेबाज शिखर धवन अपने पहले ही टेस्ट मैच के साथ स्टार बन गए। धवन ने शनिवार को पंजाब क्रिकेट संघ मैदान पर एक ऐसी पारी खेली, जिसकी गुणवत्ता की उम्मीद न तो उन्होंने की होगी और न ही आस्ट्रेलियाई टीम ने।

रजामंदी से यौन संबंध की उम्र सीमा न घटाएं : मुस्लिम संगठन

नई दिल्ली | सहमति से शारीरिक संबंध बनाने की उम्र सीमा घटाने के सरकार के प्रस्ताव का मुस्लिम समुदाय के तीन अहम संगठनों ने जोरदार विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों पर आघात पहुंचेगा।

भारत की तरक्की का दिल से समर्थन : अमेरिका

वाशिंगटन | अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के एक शीर्ष सहयोगी ने कहा कि अमेरिका न सिर्फ भारत की तरक्की को स्वीकार करता है, बल्कि भारत के नई शक्ति के रूप में उभरने का दिल से समर्थन करता है। ओबामा के इस सहयोगी ने उभरती शक्तियों के साथ घनिष्ठ साझेदारी को एशिया-प्रशांत के लिए अमेरिकी नीति का एक प्रमुख स्तम्भ बताया।

दुष्कर्म रोधी विधेयक पर कैबिनेट में मतभेद

नई दिल्ली | दुष्कर्म के खिलाफ कड़ी सजा के प्रावधानों वाले कानून से संबंधित विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गई, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए। इसके बाद इसे मंत्री समूह (जीओएम) के पास भेजने का निर्णय लिया गया, ताकि मतभेदों का समाधान निकाला जा सके। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि गुरुवार तक मतभेद दूर कर लिए जाएंगे और इसे 22 मार्च को पारित कर दिया जाएगा।