|| जी के पिल्लई, (सीएमडी, एचईसी) से किसलय की बातचीत ||
दस साल में, बदहाली, ढुलमुल राजनीति, कुशासन, भ्रष्टाचार, जनµधन की बंदरबांट झारखंड की पहचान बन गयी है. ऐसा पहले नहीं था। इलाका उपेक्षित जरूर था लेकिन यह हाहाकार नहीं था. याद कीजिए, जब इस इलाके की पहचान एचईसी से होती थी. 1958 में स्थापित उन संस्थानों में से एक जिसने जवाहर लाल को युगद्रष्टा की उपाधि दिलायी थी.