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महिला सशक्तीकरण का उत्तम उदाहरण हैं जसप्रीत कौर

नई दिल्ली: 'जहां चाह वहां राह' की कहावत को छत्तीसगढ़ की जसप्रीत कौर ने भलिभांति सच कर दिखाया है और अपनी इस राह से वह अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की न केवल प्रेरणा दे रही हैं, बल्कि इसमें उनकी मदद भी कर रही हैं।

विश्व की सबसे उम्रदराज समुद्री चिड़िया एक बार फिर मां बनेगी

न्यूयार्क: हवाई में दुनिया की सबसे उम्रदराज 66 वर्षीय समुद्री चिड़िया दोबारा मां बनने वाली है।

दुनिया में पक्षियों की 18,000 प्रजातियां : अध्ययन

न्यूयार्क: पक्षियों की प्रजातियों की कमी को लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक समय-समय पर चिंता जताते रहे हैं, लेकिन इस बीच एक शोध में पता चला कि पूरे विश्व में पक्षियों की 18,000 प्रजातियां हैं और यह पूर्व अनुमानित संख्या से दोगुनी है। अमेरिकन म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के शोधकर्ता जोएल क्राक्राफ्ट ने

भारत में अघोषित आपातकाल : तीस्ता सीतलवाड़

कोलकाता: मानवाधिकार कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ का कहना है कि देश अघोषित आपातकाल की पीड़ा से जूझ रहा है। उन्होंने स्थिति में सुधार के लिए मानवाधिकार आंदोलनों को जन आंदोलनों में बदलने पर भी जोर दिया।

पूर्वी यूक्रेन में 94 मानवीय परियोजनाएं शुरू करेगा संयुक्त राष्ट्र

कीव: संयुक्त राष्ट्र पूर्वी यूक्रेन में संघर्ष से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए अपनी ह्यूमनेटेरियन रिसपॉन्स प्लान (एचआरपी) के तहत अगले साल 94 मानवीय परियोजनाओं का शुभारंभ करेगा।

रस्किन बांड को 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड'

नई दिल्ली: जानेमाने लेखक रस्किन बांड को साहित्य के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए टाइम्स लिट् फेस्ट में यहां 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से नवाजा गया। इस पुरस्कार को पाने के बाद बांड ने लेखिका पारो आनंद से बातचीत में अपने कम उम्र के पाठकों को जलवायु परिवर्तन की याद दिलाई।

यौन कर्मियों की मदद के लिए आगे आए आम लोग

पुणे (महाराष्ट्र): हाल में हुई नोटबंदी से कुछ पेशे सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। इनमें महाराष्ट्र के पुणे और अन्य क्षेत्रों में यौनकर्मियों (सेक्स वर्कर) और ट्रांसजेंडर का पेशा भी शामिल है। पूरी तरह से नकद भुगतान पर आश्रित दुनिया के इस सबसे पुराने पेशे को बधवार पेठ और आस पास के इलाके में पूरी तरह से

'शोध प्रकाशित कराने पर सालाना 24 लाख डॉलर खर्च करते हैं भारतीय'

कोलकाता: भारत के लोग अपने वैज्ञानिक शोधों को ओपेन एक्सेस (ओए) जर्नल में प्रकाशित कराने पर सालाना करीब 24 लाख डॉलर खर्च करते हैं।

एक नए शोध में यह पता चला है। इसमें बताया गया है कि कई बार वैज्ञानिकों को अपना शोध प्रकाशित कराने के लिए दो महीने की तनख्वाह तक खर्च करनी पड़ती है।

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