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Opinion

Article by our Columnists

गर्व से कहो, हम ‘असहिष्णु’ हैं

|| श्रीनिवास ||
हम यह कहते नहीं अघाते कि भारत विश्‍व का ‘सबसे बड़ा’ लोकतांत्रिक देश है। यह और बात है कि ‘सबसे बड़ा’ कोई इतरानेवाला विशेषण नहीं है, बल्कि तमाम प्रयासों के बावजूद आबादी वृद्धि की रफ्तार रोक पाने में हमारी विफलता के कारण हमारी विशाल जनसंख्या है। सच यह है कि हमने लोकतांत्रिक शासन प्रणाली अपना भर ली है, लोकतांत्रिक मूल्यों को हम पूरी तरह आत्मसात नहीं कर पाये हैं। सभी जानते और मानते हैं कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र और सभ्य समाज व व्यवस्था की आवश्यक शर्त है। इसे इस तरह भी कहा जा सकता है कि असहमति और खुद से भिन्न विचार के प्रति सम्मान व सहिष्णुता लोकतंत्र की मूल मान्यता है। लेकिन हाल की कुछ घटनाओं से सिद्ध हो गया है कि हम भारत के लोग मूलत: असहिष्णु हैं और लगातार और भी असहिष्णु होते जा रहे हैं।

स्वतंत्र पुलिस या पुलिसिया राज?

|| श्रीनिवास || 
भारत में तरह तरह के सुधारों - राजनीतिक सुधार, न्यायिक या कानूनी सुधार, प्रशासनिक सुधार, चुनाव सुधार तथा पुलिस सुधार आदि - की चर्चा अक्सर होती रहती है। दिल्ली में हुए गैंग रेप के बाद पुलिस सुधार पर अधिक जोर है। उस हादसे के बाद गठित जस्टिस वर्मा कमेटी ने जो सुझाव दिये, उनमें भी एक प्रमुख सुझाव यह था कि पुलिस को सरकार के नियंत्रण से मुक्त कर दिया जाये; और इस पर, टीवी चैनलों पर जारी बहसों के दौरान, अमूमन आम सहमति दिख रही है। इसलिए कि लोगों की नजर में राजनीतिक जमात की साख बेहद खराब हो चुकी है; और देश-समाज की तमाम गड़बड़ियों के लिए हम सत्ता प्रतिष्ठान या अपने शासकों को जवाबदेह मानने लगे हैं। नतीजतन हम यह भी भूल जाते हैं कि इसी पुलिस पर हम आये दिन संवेदनहीन, भ्रष्ट, जनविरोधी व जुल्मी होने के आरोप लगाते रहते हैं। तो क्या पुलिस में ये सारी गड़बड़ियां महज इस कारण हैं कि वह सरकार, यानी राजनीतिक नेतृत्व के नियंत्रण में है? और क्या नियंत्रण मुक्त होते ही हमारी वही पुलिस ईमानदार, जनपक्षी और सक्षम हो जायेगी?

अपने गेम प्लान में कांग्रेस कामयाब

|| विनोद कुमार ||

कांग्रेस की जो मंशा थी वह पूरी हुई। उनके ही पियादे की बदौलत भाजपा ने झारखंड की राजनीति में जो उन्हें लगड़ी मारी थी, झारखंड में सरकार बना कर उन्हें जो शिकस्त दी थी, उसका बदला उन्होंने ले लिया। झामुमो के छोटे सरकार की पीठ थपथपा कर पहले तो अर्जुन मुंडा की सरकार गिरा दी, राष्ट्रपति शासन की आड़ में झारखंड की सत्ता पर काबिज हो गये और अब झामुमो को उनकी औकात बताई जा रही है।

The Buck Stops at Your Door Mr. Chidambaram

|| Gladson Dungdung ||
The Adivasis live and die with the Nature. They believe in the super natural God, therefore; they worship the Nature in every occasion. The Adivasis’ economy is totally based on the Agriculture and Forest, which also depends merely on rainfall. Therefore, the villagers get together and pray to their Super Natural God before and after the harvesting.

Corruption is necessary in a globalised, liberalised, privatised economy

|| Stan Swamy ||
The celebrated Swedish economist and nobel laureate Gunnar Myrdal in his eventful book Asian Drama (1968) wherein he analysed the reasons for the mass poverty in the countries of South Asia, categorized India as a “soft state”. By that he meant India is a state which can make policies and laws but cannot carry them out.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम नंदीग्राम डायरी के लेखक का खुला पत्र

'सुश्री ममता जी, नंदीग्राम में खड़े होकर बंगाल और भारत को देखने की कोशिश करिए तो आपको विराट बंगाल के भीतर विराट भारत दिखेगा. ग्रामेर मानुष, कृषक मानुष की समृद्धि के बिना बंगाल और भारत का उद्धार संभव नहीं है. नंदीग्राम में छूटी हुई आकाँक्षाओं को अंजाम दीजिये और अपनी चूकों के लिए भूल-सुधार व क्षमायाचना सार्वजनिक करिए...'

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