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Opinion

Article by our Columnists

एक दल की सरकार बनाम खिचड़ी सरकार

मीडिया की भाषा में कहें तो झारखंड में दंगल जारी है। तमाम दल इस राज्य को स्वर्ग बना देने के दावे और वादे कर रहे हैं। चुनाव आयोग के साथ अनेक सामाजिक संगठनों व संस्थाओं के अलावा मीडिया वाले भी मतदाताओं को जागरूक करने के नेक काम में लगे हुए हैं। तमाम अखबारों में मतदाताओं को उनके कर्तव्य की याद दिलाते

अनिवार्य मतदान : अव्यावहारिक और असंवैधानिक भी

सफल लोकतंत्र की एक बुनियादी शर्त है जागरूक जनमत; और व्यवहार में इसका एक प्रमाण होता है अधिकाधिक मतदाताओं का मतदान में हिस्सा लेना। अफसोस कि इन पैमानों पर भारत की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, जहां 50 से 60 फीसदी मतदान को ही ‘पर्याप्त’ मान लिया जाता है। मगर क्या इस कमी को अनिवार्य मतदान का कानून बना

झारखंड में आदिवासियों के वजूद का सवाल

एक लंबे संघर्ष के बाद झारखंडी जनता को उनका राज्य तो मिल गया लेकिन उनके अस्तित्व और अस्मिता का संकट बरकरार है। बल्कि उस पर खतरा और ज्यादा घनीभूत हो गया है। संसदीय राजनीति और पंचायती राज व्यवस्था उनके स्वशासन और स्वाबलंबन की मजबूत परंपरा को तो निरंतर कमजोर कर ही रही है, अबादी के एक बड़े हिस्से को भ्

काले धन पर कितने गंभीर हैं हम?

विदेशी बैंकों में जमा काले धन के मुद्दे पर जितना शोर हो रहा है, उससे यह आभास होता है, मानो सरकार, तमाम राजनीतिक दल और आम लोग भी मानते हैं कि अपने देश में कोई काला धन नहीं है। भारतीय नागरिकों ने अपनी सारी काली कमाई विदेशी बैंकों में जमा कर रखी है। जबकि सच इसके उलट है। विदेशों में कितने भारतीयों का

झारखण्ड: यानि ख्वाबों की सौदागिरी

झारखण्ड राज्य आदिवासियों के लिए एक हसीन सपना था जो राज्य बनते ही टूट गया. अब मोदी नया सपना बुन रहे हैं.

§ फ़रज़न्द अहमद

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