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Opinion

Article by our Columnists

2014-कौन बनेगा प्रधानमंत्री? : आपकी धड़कनें शुरू होती हैं अब

|| अमलेन्दु उपाध्‍याय || 
2014 का लोकसभा चुनाव अभी बहुत दूर है लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से ही चुनाव की तैयारियां जारी हैं। भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में 'पीएम इन वेटिंग लिस्ट के अपने प्रतिद्वंदी नरेंद्र मोदी की गरिमामयी अनुपसिथति में लालकृष्ण अडवाणी ने गर्जना की कि बहुत जल्द मध्‍यावधि चुनाव होंगे। अब मध्‍यावधि चुनाव भले ही हों या न हों लेकिन देश के सियासी माहौल को देखकर लग तो यही रहा है कि चुनावी युद्ध का मैदान सज चुका है। हालांकि ऐसा माहौल बनने के लिए अकेले भाजपा ही दोषी नहीं है बलिक काफी हद तक यूपीए सरकार के अयोग्य और जनाधारविहीन मैनेजर तथा 10 जनपथ और सात रेसकोर्स के बीच बढ़ता तनातनी का माहौल भी जिम्मेदार है।

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दो आंदोलनों की दास्तान

मणिपुर वूमेन गन सर्वायवर्स नेटवर्क की संस्थापक बीनालक्ष्मी नेप्राम ने मुझसे अपनी सुपरिचित व्यग्रता के साथ पूछा: ‘आप इरोम शर्मिला के एक दशक से चल रहे अनशन का कवरेज उतनी ही मुस्तैदी से क्यों नहीं करते, जैसा आपने अन्ना हजारे के तेरह दिन के अनशन का किया था?’ एक लाइव प्रोग्राम में स्टेज पर पूछे गए इस सवाल से बच निकलने की कोई गुंजाइश नहीं थी। मैंने एक कमजोर-सा जवाब दिया: ‘शायद इम्फाल की तुलना में रामलीला मैदान टीवी स्टूडियो के अधिक निकट है।’

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Killing, Denial And Manipulation

|| by Gladson Dungdung || 
30 year-old Mangri Honhanga along with her 4 month-old son Dula Honhanga and other family-members had desperately come to Ranchi the capital city of Jharkhand after travelling for more than 6 hours right from Saranda forest in West Singhbhum district of Jharkhand last week with the hope of getting justice. Both the mother and child have been suffering from illness – Dula is grade-3 malnourished patient and Mangri has been suffering from anaemia but they have no choice rather than facing all kinds of sufferings.

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क्‍या भारतीय इतना मैच्‍युअर हुए हैं कि लोकतंत्र चला सके?

अन्‍ना के बहाने..
अब तो सचमुच यह संदेह गहराने लगा है कि क्‍या भारत वाकई अभी लोकतंत्र का हकदार था? क्‍या हम भारतीयों में लोकतंत्र प्रणाली की समझ है, इस प्रणाली के जरिए प्रबंधन का माद्दा है हममें? ..हम भी विचित्र हैं. हर पांच साल बाद लोकतंत्रीय प्रणाली से चुनाव का मौका मिलता है. लेकिन, मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्‍या लगातार गिरती जा रही है. शहरों तक में मतदान का प्रतिशत बामुश्किल 35-40 पहुंचने लगा है. नतीजन, संसद-विधानसभाएं

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नहीं चाहिए लोकतंत्र विरोधी लोकपाल

|| अमलेन्दु उपाध्याय ||
इस बार आजादी की सालगिरह कुछ अलग किस्म की होने की उम्मीद है। कारण है कि महात्मा गांधी के इक्कीसवीं सदी के अवतार अन्ना हजारे ऐलान कर चुके हैं कि अगर 15 अगस्त तक ‘जनलोकपाल’ विधेयक पास न किया गया तो वे 16 अगस्त से फिर आमरण अनशन करेंगे। 

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Congress on Downhill Slide: Act or Perish

|| by MOHAN SAHAY ||
Ground is sleeping beneath the feet of the Congress Party. To keep the flock under one roof is a different thing and to lead the Nation is quite another. To me it appears that Sonia Gandhi has picked up her advisors wrong. Once she decided and rightly so, that she will nothold the office of Prime Minister of India, her obvious next step was to promote her sibling in politics.

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प्रमोद जोशी ने लिखा- 'मशहूर होने की पत्रकारिता'

बरखा दत्त की पत्रकारिता शैली और साहस की तारीफ होती है। वे करगिल तक गईं और धमाकों के बीच रिपोर्टिंग की। न्यूयार्क टाइम्स ने इस मामले पर एक रपट प्रकाशित की है जिसमें बरखा दत्त के बारे में जानकारी देते वक्त उस उत्साह का विवरण दिया है जो उन्हें विरासत में मिला है।

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‘Special plan for Naxal-hit districts’ - a mask..

The govt has for quite some time been making a big noise that it is going to develop the naxal-affected districts in such a way that naxalism will fail to attract young Adivasis to its fold in future. At last it has come out with this Special plan for Naxal-hit districts as per which each of the 35 naxal-affected districts would get Rs 25 crore every year for undertaking developmental work in healthcare, schooling, sanitation and drinking water sectors.

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CVC- Caesar's wife not above suspcision

|| by Mohan Sahay ||
Caesar’s wife has to be above suspicion! The appointment of P J Thomas as the Chief Vigilance Commissioner is indefensible. When the objection raised by Sushma Swaraj, the leader of the Opposition in the Lok Sabha was rejected by the Prime Minister Dr Manmohan Singh and the Home Minister P Chidambaram over the government’s preference to Thomas as the new CVC it smacked of total disregard to probity in appointment of the CVC which is a Constitutional office.

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The People Friendly Police?

Since inception of the state, the Jharkhand government has been carrying on anti-naxal operations and building up the people friendly police in the state simultaneously. In the recent development, Neyaz Ahmed, the director general of police and the executive officer of the ‘operation green hunt’, who is also the first top cop in the history of Jharkhand to get promotion after retirement, has promised to make his police men the ‘people friendly’.

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लावारिस लाशों के वारिस

|| शाह आलम ||
सभी ताल ठोकतें हैं कि अयोध्या हमारी है। यही वह दावा है जिसने अयोध्या की ऊर्जा को सोख लिया है। पिछले दो दशक से मंदिर-मस्जिद के नाम पर हुई सियासत ने जीवन की तमाम खूबसूरती को छीन लिया है। शालीनता और धैर्य की चादर में लिपटी इस ऐतिहासिक नगरी में विकास का पहिया ऐसा थमा है कि लगातार पिछड़ता ही चला गया है।

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