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Jharkhand News

News from Jharkhand

Minority Affairs Minister Rehman to Visit Jharkhand in May

Ranchi : Rajya Sabha Member Mr. Parimal Nathwani met the Union Minister for Minority Affairs, Mr. K Rahman Khan in Delhi with a list of problems of minorities in Jharkhand. The major problem facing the minorities in Jharkhand are recognition to the Madrasas, mid-day-meal for Madarsas, appointment of Urdu teachers and payments to Block Resource Persons (BRP)/ Cluster Resource Persons (CRPs) etc. During the meeting of Mr. Nathwani with the Minister on March 20, 2013, the President of Jharkhand Students’ Union, Mr. S. Ali and others also joined.

खुद जेएमएम में भी कुछ लोग हुए षडयंत्र का शिकार

|| न्यूज विंग || अर्जुन मुंडा से खास बातचीत.. 

झारखंड में राष्ट्रपति शासन की मुहर लग चुकी है। झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) द्वारा समर्थन खींच लेने के बाद चुनी हुई मुंडा सरकार को हटना पड़ा। दरअसल, झामुमो को आशा थी कि कांग्रेस झट साथ मिलकर सरकार बना लेगी। लेकिन, तत्काल कुछ हुआ नहीं। बल्कि इसके उलट, शासन की बागडोर राज्यपाल को थमा दी गई।

अब झामुमो के नेता दिल्लीˆरांची किये हुए हैं। सरकार बनाने की उनकी आशाएं क्षीण होने लगी हैं। झामुमो सुप्रीमो शिबु सोरेन तो इतना तक कह चुके हैं, मुख्यमंत्री कोई बन जाए, सरकार बननी चाहिए। याद कीजिए, इसी मुख्यमंत्री पद के लिए, 28 28 महीने शासन की हिस्सेदारी और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अपना कब्जा मांगते हुए झामुमो ने मुंडा सरकार से समर्थन खींच लिया था। इधर, मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने के बाद अर्जुन मुंडा खाली पड़े हैं। लेकिन नहीं.. तीन तीन बार राज्य का शासन चला चुका कोई राजनेता यूं ही खाली पड़ा रहेगा!.. बड़ी सूर्खियां भले न बने, पर प्रेस मीडिया छोड़ेगी भला? न्यूज विंग ने भी कैफियत ली। न्यूज विंग के साथ एक लंबी बातचीत के दौरान मुंडा तरो ताजा लगे। जैसे, पुराना गिला शिकवा भूलकर नये सिरे से उर्जा एकत्र कर रहे हों। पिछले घटनाक्रम की चर्चा करने पर मुंडा कहते हैः ..खुद जेएमएम में भी कुछ लोग इस षडयंत्र का शिकार हुए हैं।.. भविष्य के चुनावों को मद्देनजर मुंडा के इस संयमित बयान के कई मतलब निकाले जा सकते हैं।

खुद मुंडा भी कहते हैं, उनका सारा ध्यान ‘मिशन 2014’ पर है। लेकिन, उनकी पार्टी?.. भाजपा!.. इन दिनों प्रदेश भाजपा में उफान आया हुआ है। सारा वितंडा नए प्रदेश अध्यक्ष के रूप में चुने गए रवींद्र राय को लेकर है। प्रदेश से लेकर केंद्र तक भाजपा के कई वरिष्ठ नेता इस चयन से नाखुश हैं, लामबंद हुए जा रहे हैं। इनमें कुछ तो खुद प्रदेशअध्यक्ष पद की रेस में थे। उन्हें बल मिल रहा है यशवंत सिन्हा, कड़िया मुंडा सरीखे वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी से। और, एकबार फिर निशाने पर हैं अर्जुन मुंडा। दरअसल, माना यह जा रहा है कि अपने प्रत्याशी रवींद्र राय के नाम की घोषणा करवाकर मुंडा ने एकबार फिर बाजी मार ली। उन्होंने पार्टी में फिर अपना कद साबित कर दिखाया। यशवंत सिन्हा तो इतना नाराज हैं कि उन्होंने पार्टी पदों से इस्तीफा देने तक की चेतावनी दे रखी है। इस बाबत पूछे जाने पर अर्जुन मुंडा का कहना है कि ‘कुछ लोग इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं..’। यशवंत सिन्हा की उनसे नाराजगी के सवाल पर मुंडा कहते हैं, यशवंत सिन्हा समय समय पर मुखर होकर बोलते हैं। उन्होंने तो केंद्रीय अध्यक्ष पद पर रहे गडकरी जी और अडवाणी जी पर भी टिप्पणी की..

और क्या कुछ कहा अर्जुन मुंडा ने..

- जेएमएम ने अलग झारखंड के औचित्य को नजरंदाज किया
- राज्यपाल शासन पर टिप्पणी?.. कुछ चीजें हैं, अभी मैं देख रहा हूं!..
- अब चुनाव हो। सरकार बनाने की कोशिश जनहित में नहीं।
- हां, मेरी प्रॉयरिटी लिस्ट में थे रवींद्र राय - कुछ लोग इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं
- यशवंत सिन्हा तो अडवाणीजी, गडकरीजी पर भी टिप्पणी करते रहे हैं..
- हां, रवींद्र राय झाविमो में गए थे, बाबूलाल को वापस लाने..
- मुझसे चूक हुई कि प्रदेशअध्यक्ष की घोषणा से पहले इस्तीफा दिया..
- बात ट्राइबल - नॉनट्राइबल सीएम की क्यों? योग्यता है तो सामने आयें!

न्यूज विंग के संपादक किसलय के साथ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की यह लंबी बातचीत विस्‍तार से पढिये..

चलिए, भाजपा के वर्तमान हालात से शुरू करते हैं.. नये प्रदेश अध्यक्ष के रूप में रवींद्र राय के नाम की घोषणा के तुंरत बाद पार्टी में जबरदस्त खलबली देखी जा रही है। विरोध के स्वर उठ रहे हैं। कई बड़े नेता मुखालफत कर रहे हैं इस निर्णय का। यह सब क्यों?

देखिये.. राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद प्रदेशों में तो चुनाव होना ही था। सभी प्रदेशों में हुआ है। यहां भी हुआ। यहां कुछ गलतफहमियां हुईं हैं, यह दूर हो जाएंगी।

लेकिन, बात छोटी सी नहीं। प्रदेश भाजपा में गुटबाजी दिखने लगी है। रवींद्र राय के चयन के खिलाफ यशवंत सिन्हा तो इस्तीफा तक की पेशकश कर रहे हैं..? 
देखिये, कुछ लोग इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं, मीडिया में खबर आने के बाद। ..मीडिया में यह बात कैसे आयी?.. जबकि यह बड़ा गोपनीय मामला था।

इस बीच आपने भी तो विधायक दल के नेता पद से इस्तीफा दे दिया। क्या यह भी इसी प्रकरण का हिस्सा नहीं?

मैंने स्वेच्छा से केंद्र से आग्रह किया कि मुझे सभी दायित्वों से मुक्त रखा जाए। मैं एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में दोगुणा समर्पण के साथ पार्टी के लिये काम करूंगा। ..यहां मुझे लगता है कि यह गलतफहमियां इसलिये हुईं चूंकि प्रदेश अध्यक्ष के नाम की घोषणा से पहले मैंने इस्तीफा दे दिया। यह बाद में देना था। ..हां, यह गलती शायद मुझसे हुई है। इसका मैंने ध्यान में नहीं रखा।

क्या अंतर पड़ता बाद में इस्तीफा देने से?

बाद में देने से यह विषय ही पैदा नहीं होता। पहले दे देने से कुछ लोगों के मन में ऐसा ख्याल आया है कि मैंने कोई दबाव.. (वाक्य पूरी करने की बजाय थोड़ा हंस देते हैं।)..

लेकिन, आपने अपनी कोई राय रखी तो होगी?

हां मैंने अपना मंतव्य दिया था केंद्र को। मैंने कई नाम दिये थे और कहा था कि इनमें से किसी को चुन ले केंद्र।

क्या आपने प्राथमिकता रवींद्र राय के नाम को दी थी?

उनमें एक नाम रवींद्र राय भी थे।

क्या आपने रवींद्र राय के नाम को प्रायॅरिटी (प्राथमिकता) दी थी?

हां, प्रायरिटी लिस्ट में रवींद्र राय भी थे।

चलिए आगे बढ़ते हैं.. इससे पहले भी कई बार देखा गया कि ऐसे मौके पर यशवंत सिन्हा प्रदेश की राजनीति में आपके खिलाफ नजर आये। यशवंत सिन्हा हमेशा आपकी ही मुखालफत क्यों करते हैं?

(हल्का ठहाका लगाते हैं मुंडा। फिर एकदम से सामान्य भाव मुद्रा बनाने की चेष्टा..) मुझे ऐसा नहीं लगता है। क्योंकि.. समय समय पर कई विषयों में वह मुखर होकर बोलते रहे हैं। उन्होंने अडवाणी जी के प्रकरण पर अपनी टिप्पणी की, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन गडकरी जी के समय में भी उन्होंने टिप्पणी की, और भी ऐसे कई विषय रहे। उन्हें लगता है कि इस विषय पर कहना चाहिए तो वे बोलते हैं।

(थोड़ी चुटकी लेते हुए) आपके अंदाज और उदाहरणों से आपका एक यह भाव भी सामने आता है, ‘अडवाणी जी, गडकरी जी.. दो राष्ट्रीय अध्यक्षों पर उन्होंने टिप्पणी की और मुझपर भी किया..’ यानी कहीं न कहीं उन्होंने आपके कद में इजाफा..?

(बीच में ही, विषय को थोड़ा मोड़ते हुए..) देखिये.. उन्होंने हमारे ऊपर कुछ नहीं कहा.. मुझे नहीं लगता है कि मेरे ऊपर कुछ कहा। अगर मुझे ऐसा लगे कि उन्होंने मेरे ऊपर कुछ कहा तो मैं उनसे जरूर बात करूंगा.. (सामान्य होने की कोशिश में अपने खास अंदाजा में ठहाका लगा देते हैं!)

चलिये.. आपको नहीं लगता कि रवींद्र राय के लिए फिलहाल काफी बड़ी चुनौतियां हैं?.. इन दिनों प्रदेश भाजपा में विरोधाभासी हालात काफी दिख रहे हैं.. आपसी मतभेद बहुत हैं..?

देखिये, मैं इसको स्वाभाविक मानता हूं। इसलिए कि पार्टी में तो कोई ‘पेड सर्वेन्ट’ होता नहीं है। सभी वर्कर होते हैं और अपनी क्षमता के अनुसार नतीजा चाहते हैं। यह गलत भी नहीं, सबको अवसर भी मिलना चाहिए, लेकिन एक चीज पर जब फैसला हो जाता है तो उसे ही आगे लेकर चलने की प्रथा है।

यानी रवींद्र राय अपना काम कर पायेंगे?

हां करेंगे.. यह हम सबकी भी जिम्मेदारी है।

यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि पिछले दिनों रवींद्र राय भाजपा छोड़कर मरांडी जी के झारखंड विकास मोर्चा में चले गए थे। उसके बावजूद उन्हें अध्यक्ष का यह महत्वपूर्ण पद क्यों सौंपा गया?

(थोड़ा ठहरकर) ..देखिये, मेरा मानना है कि.. उनके उस कालखंड को देखें और बाकी के कालखंड को देखा जाए तो कहीं ऐसा नहीं लगता है कि ‘कार्यकर्ता’ (रवींद्र राय) में कोई कमी है। हां यह है कि उस समय की परिस्थिति में उन्होंने जो निर्णय लिया था.. मुझे जहां तक स्मरण है, वह हमेशा कोशिश करते रहे कि बाबूलाल जी को वापस संगठन में ले आयें, और संगठन फिर से काम करे। यह सूचना मुझे उस समय भी मिलती रहती थी, उनका यह प्रयत्न होता रहा था। लेकिन उसमें सफल नहीं हुए, और लौट आये। ..तो इस बार उनके चयन के वक्त लोगों ने इस पक्ष को भी जरूर देखा होगा.. खासकर उन पहलुओं को भी देखा होगा जिसमें उन्होंने (रवींद्र राय) लगातार लोगों के संपर्क में रहकर यह प्रयास करते रहे कि पार्टी में हमलोग (मरांडी जी के साथ) फिर से वापस आ जाएं। लेकिन उन दिनों यह परिस्थिति नहीं बन सकी। कई कारण होंगे.. कई बातें होंगी।

अब कुछ दूसरे सवाल.. जेएमएम (झारखंड मुक्ति मोर्चा) से आपके अलगाव का क्या कारण रहा?

देखिये, आप स्वतः इस बात का अनुमान लगा सकते हैं कि इस अलगाव का क्या कारण था!.. इस राज्य को अ-स्थिर.. (थोड़ा ठहरकर) क्या राज्यपाल शाषण सही है?.. फिर चुनाव कराने का क्या मतलब.. इसी शासन को मान लेना चाहिए इस देश में। यदि नहीं, तो कारण क्या था?.. (ठहरकर) मुझे ऐसा लगता है कि जेएमएम में भी कुछ लोग षडयंत्र के शिकार हुए। और जेएमएम खुद भी, इस राज्य के भविष्य को लेकर उन बातों का ध्यान नहीं रख सका कि झारखंड अलग राज्य बनाने का औचित्य क्या था। ..तात्कालिक चीजों को देखते हुए, दीर्घकालिक चीजों को नजरंदाज किया गया। मैं कहूंगा कि राज्य के अहम् दीर्घकालिक कार्यक्रम सामने हों तो तात्कालिक या अल्पकालिक विषयों को, जो निजी संबंध रखता हो, गौण करना चाहिए था।

थोड़ा और स्पष्ट करें.. मुख्य कारण क्या था आपके और जेएमएम के अलागाव का?

देखिये, मुझे ऐसा लगता है कि इस राज्य में दीर्घकालिक चीजों को देखते हुए समझ बढ़ाने की जरूरत है।

क्या आपको नहीं लगता कि जनता में यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि आखिर क्या कारण था कि अचानक एक चुनी हुई सरकार सत्ता से हट गई?

मैं पहले भी स्पष्ट कर चुका हूं। अब इससे आगे ‘वे’ ही ज्यादा अच्छा बता सकते हैं।

कौन?

जिनलोगों ने सरकार से समर्थन वापस लिया।

लोकसभा चुनाव सामने है। क्या आनेवाले समय में एकबार फिर जेएमएम और भाजपा एकजुट हो सकते हैं?

देखिये, यह इस समय कहना मुश्किल है!.. (थोड़ा हंसते हुए) लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व क्या सोंचता है, नहीं सोंचता है, यह उस स्टेज की बात होगी। राज्यस्तर पर इस संदर्भ में कोई कमेंट नहीं किया जा सकता है।

अब थोड़ा झारखंड के बारे में.. मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के बाद, आज आपको कौन सी बातें सालती हैं। राज्य के लिए ऐसा कुछ महत्वपूर्ण काम जो आप नही कर पाये..?

देखिये, काम तो मैं ट्रैक पर लेकर आ गया था। क्योंकि हमलोगों को बिल्कुल अव्यवस्थित ढ़ांचा में मिला था यह राज्य। उसे व्यवस्थित करने में समय तो लगा, लेकिन ट्रैक पर आ गया। कई महत्वपूर्ण फैसले हुए, नीतियां बनीं और काम करने की पद्धत्ति जोर पकड़ी। आत्मविश्‍वास जगा.. जब मैं आया था तो झारखंड ‘पब्लिक आई’ (जनता के बीच छवि) में बहुत खराब था। कन्फिडेन्स लेवेल बहुत नीचे था। हमलोगों ने वह कन्फिडेंस बनाया। बहुत सारे पदाधिकारियों ने अच्छी भूमिका निभायी और काम आगे बढ़ा।

कौन सी चीजें बच गईं?

पावर में.. जो ऐक्चुअल ट्रान्समिशन का काम था वह तो अब पूरा हो जाएगा। इसी पर डिसिजन नहीं हो रहा था। मुझे दुःख इस बात का है कि इसपर डिसिजन लेने में नौ महीनों तक लोगों ने ‘इधर से उधर’ करने की कोशिश की। लेकिन हुआ!.. और कुछ योजनाएं.. देखिये, डेवेलॉपमेंट का ऐसा मॉडेल होना चाहिए कि जनता.. यूथ और यहां के इन्फ्रास्ट्रक्चरल डेवेलॉपमेंट को लिंक करने की जरूरत है। इससे आम युवा प्रोडक्टिव हो जाएगा। इसके लिए इन्फ्रास्ट्रक्चरल डेवेलॉपमेंट, मोटिवेशनल प्रोग्राम और यूथ स्किल डेवेलॉपमेंट को, सब एकसाथ चलाना होगा। वह हमने प्लान किया था। इसलिए मैंने यूथ में स्किल डेवेलॉपमेंट की बात की थी। आज कोई इसपर बात ही नहीं कर रहा है!..

आज की तारीख में राज्य में राष्ट्रपति शासन है। अब क्या होना चाहिए? क्या चुनाव से पहले सरकार बन पाएगी?

मेरा तो मत था कि विधानसभा भंग कर चुनाव कराया जाना चाहिए था। लेकिन, इस बीच सरकार बनाने की कोशिश होती है तो यह कोशिश राज्य की जनता के हित में नहीं होगी।

आपकी समझ में यह राष्ट्रपति शासन और कितना चलेगा.. क्या मांग करेंगे आप?

देखिये, छह महीना तो राष्ट्रपति शासन चलेगा। और एक एक्सटेंशन मिल गया तो एक साल। लेकिन मैं तो यही कहूंगा कि जल्द से जल्द चुनाव होने चाहिए।

चुनाव होता है तो भाजपा का गठबंधन किस किस के साथ होगा?

होगा। लेकिन अभी बताना जल्दबाजी होगी।

एक अनुभवी शासक होने के नाते वर्तमान शासनतंत्र को आप कोई संदेश देना चाहेंगे?

आज मैं जो देख रहा हूं.. कुछ दिनों पहले तीनों फ्लाईओवर निर्माण को ड्रॉप कर दिया गया था। अब खबरें आ रही हैं कि एक फ्लाईओवर को अनुमति दी गयी। जबकि, पिछली सरकार ने तीनों के निर्माण पर काफी काम किया था। कन्सल्टेंट बहाल करके फिजिबिलिटी हुई, पूरी डिटेलिंग के साथ, उसपर सैद्धांतिक सहमति दी गयी। इसके बावजूद उसको पूरा नहीं करते हैं तो यह समय जाया करना होगा। कल होकर पॉपुलर गवर्नमेंट आयेगी और उसे बनायेगी तो उसकी लागत बढ़ जाएगी। इसलिए मैं कहूंगा कि पहले से तैयार फाइव ईयर प्लान में किसी तरह की कटौती नहीं करनी चाहिए।

अभी इस राष्ट्रपति शासन के काम काज पर आपकी कोई खास टिप्पणी?

अभी मैं कुछ नहीं कहूंगा, जल्दबाजी होगी। कई चीजें हैं.. अभी मैं देख रहा हूं।

चलते चलते एक सवाल.. आपकी पार्टी के रघुवर दास गैर आदिवासी मुख्यमंत्री की बात बार बार उठाते हैं, क्या कहेंगे?

संविधान में न तो आदिवासी की बात की गई है न गैर आदिवासी की। नेता विधायक दल का चुनाव विधायक करते हैं। इसमें कोई भी हो सकता है। लेकिन, इसे इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि हर जाति को प्रतिनिधित्व का मौका मिले। देखिये, हिंदुस्तान में सबसे ज्यादा जातियां हैं। उस हिसाब से पांच हजार साल लगेगा सब जाति को प्रतिनिधित्व देते देते। मुख्यमंत्री का चुनाव योग्यता पर होना चाहिए। क्षमता है तो सामने आये! 

Pitiable Amenities In Jharkhand Govt. Schools : Nathwani

Delhi: Rajya Sabha MP Parimal Nathwani in a press release has requested government to improve the infrastructures in Jharkhand's government schools. Nathwani adds that conditions of basic infrastructures in schools of Jharkhand available for boys and girls are pitiable.

वरिष्ट खेल पत्रकार शशिकांत पाठक का निधन

रांची : वरिष्ट खेल पत्रकार शशिकांत पाठक का सोमवार 11 मार्च को उनके आवास पर निधन हो गया। वे पिछले एक वर्ष से फेफड़े के कैंसर से पीड़ित थे। उनकी उम्र पचास वर्ष थी। शशिकांत पाठक प्रभात खबर रांची के स्थानीय संपादक विजयकांत पाठक के बड़े भाई हैं। उन्होंने 1985 में प्रभात खबर से ही अपने कैरियर की शुरुआत की थी। न्‍यूज विंग की और से स्‍व पाठक को श्रद्धांजलि!

लड़कियां खौफ से करती हैं बंधुवा मजदूरी

रणजीत वर्मा || रांची ||
बीते सप्ताह तीन ऐसे मामले सामने आये जिससे पता चलता है कि नाबालिग लड़कियों को घर की मजबूरी या मालिक की जबरदस्ती की वजह से घरेलू नौकर बनाकर रखना आम बात हो गयी है। मामला रसूखदार परिवार का हो तो केस दर्ज करने से पुलिस भी घबराती है।

पहला वाकया दो मार्च का है जब कांग्रेस पार्टी के नेता और प्रमुख व्यवसायी में गिने जानेवाले निवारणपुर निवासी चंचल चटर्जी के घर से नाबालिग सुषमा भागी भागी थाना पहुंची, मारपीट, ज्यादतियों की रिपोर्ट लिखवाने। कुछ स्थानीय लोगों के मुताबिक उस वख्त लड़की मात्र कुछ चिथड़ों में लिपटी थी। अब कांग्रेस पार्टी की एक जांच कमेटी बनायी गयी है जो इस मामले पर रिपोर्ट पेश करेगी।

इस बीच सुषमा को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने प्रस्तुत कर परिजनों को सौंप दिया गया। आरोपी चंचल चटर्जी पर धारा 323 (मार पीट), 370 (गुलाम की तरह काम करवाना), 374 (गैरकानूनी तरीके से सहमति के बिना काम करवाना), 23 (जुविनायल जस्टिस एक्ट) जेजे अधिनियम और धारा 14 (बाल श्रम निषेध अधिनियम) के तहत मामला दर्ज हुआ है। गिरफ्तारी नहीं हुई है।

इधर, चार मार्च(2013) की देर शाम, यानी पहली घटना के दो दिन बाद धुर्वा इलाके से दो बच्चियों को सामाजिक संगठन से जुड़े लोगों ने मुक्त करवाया। उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। सुकरो कुमारी (12 साल) को अशोक राय के क्वार्टर नंबर सीडी 79/खखख से जबकि सुनिता कुमारी (12 साल) को सीडी 78/खखख से बाहर निकाली गयीं। लगाये गये आरोपों के मुताबिक दोनों बच्चियों को घर में बंद रखकर बंधुवा मजदूर की तरह काम करवाया जाता था। बाहर जाने आने की छूट नहीं थी। दोनों बच्चियों का बयान लेने के बाद श्रम न्यायालय में बाल मजदूरी करवाने के जुर्म में मालिकों पर 20 हजार रूपया जुर्माना लगाया। दोनों बच्चियों को परिवारवाले वापस घर ले गये। जिसमें एक बच्ची की शादी करवा दी जायेगी।

सुकरो खूंटी में कर्रा प्रखंड में सांगोर की रहनेवाली है। उसने न्यूज विंग को बताया कि धुर्वा के सेक्टर दो में अशोक राय के घर से उसे एक योजना बनाकर छुड़ाया गया। पिछले साल (2012) दीपावली से पहले उसे घर का काम करने रांची लाया गया। सुकरो ने कहा, पिताजी ने किसी दूसरे से कर्जा लिया था। हम सोचे थे कि काम करके पैसे ...। पर हम किसी के घर नहीं आये ...। उसे जेली नाम के स्थानीय व्यक्ति ने पैसे का लालच देकर रांची लाया। यह कहते हुए कि इससे उसके पिता का उधार चुकता हो जायेगा। पिता से कहा गया कि बेटी को अच्छा खाना पीना मिलेगा। सुकरो ने आगे कहा कि गांव के स्कूल में दूसरे क्लास में पढ़ती थी। पर रांची आने के बाद पढाई छूट गयी। उसने बताया कि सर और मैडम घर पर पोछा, छाड़ू, बर्त्तन के अलावा घर के बाकी सारे काम करवाते थे। सुनीता आगे बताती है कि मारने के बाद वह गुस्सा होकर एकदम शांत हो जाती, एकदम चुपचाप। इसपर भी उसे पीटा जाता। थप्पड़ मारा जाता।
दूसरी बच्ची खुर्रा (गढवा) से आयी सुनीता संजीत नाम के आदमी के साथ मकर संक्रांति के दिन रांची लायी गयी। उसे अच्छे अच्छे कपड़ों का लालच दिया गया। यहां धुर्वा स्थित सीडी 78/खखख में राकेश सिंह के घर का सारा काम कर रही थी। जैसा उसने बताया कि मालिक उससे तेल मालिश करवाते थे। कुछ गलती करने पर पिटाई की जाती थी। खाने को आलू, चावल, रोटी मिलता था। घर पर उसे ज्यादा खाना खाने का ताना सुनना पड़ता। उसने आगे कहा कि हम विरोध नहीं करते थे। वो लोग बड़ा बड़ा आदमी है तो कैसे बोलेंगे?

पोक्टा कानून के तहत दर्ज हो मामला : बैद्यनाथ
दीया सेवा संस्थान के सदस्य बैद्यनाथ कुमार ने कहा कि इन क्वार्टरों में बच्चों को सेक्सुअल अब्यूस किया जाता था। यानी उनके सामने मालिक का कपड़े खोलकर आना। अपने शरीर में तेल लगवाना, मालिश करवाना। ये पूरी तरह से सेक्सुअल अब्यूस का मामला बनता है। इसके तहत पोक्टा कानून के तहत प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए्। जिसमें आरोपियों को खुद को निर्दोष साबित करना होता है। रांची में चाइल्डलाइन हालत देखिये कि ये सालों से बंद है। बाल संरक्षण आयोग का गठन हुआ है लेकिन वो भी कागजों में सिमटकर रह गया है। अगर बाल अधिकार का हनन इसी प्रकार होता रहा तो बाल अधिकार संरक्षण आयोग का कोई मतलब नहीं रहा।

केस रजिस्टर्ड करवाना टेढी खीर : शालिनी संवेदना
लोक स्वर संस्था शालिनी संवेदना का बच्चियों को मुक्त करवाने में तत्परता दिखायी इस दौरान उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कर्रा की रहनेवाली सुकरो को लानेवाला सुरेन्द्र स्वासी का पेशा ही है कि लड़कियों को बेचना। जबकि सुनीता को लानेवाला संदीप उरांव गढवा में सहिया का बेटा है। उसने भी बच्ची को रांची में बेचा दिया था। शालिनी ने कहा कि दानों लड़कियों के अभिभावकों की काउंसीलिंग किया गया। ताकि उन्हें आगे पढाया जा सके। पर वो राजी नही हुए्। उन्होंने कहा कि पुलिस केस रजिस्टर्ड नहीं कर रही थी। इससे पहले कुछ दबंग लोगों ने हमारे घर पर हमला किया गया। पूरी व्यवस्था का ये हाल है। आखिरी में केस सीआईडी सेल में बयान लेने के बाद एसएसपी को सौंपा गया। बाद में एसएसपी ने थाना में केस रजिस्टर्ड दर्ज करने का आदेश दिया। तब केस रजिस्टर्ड हुआ।

..ताकि आतंक का मंजर नहीं मानवीयता मंजरित हो!

मंजर इमाम की गिरफ्तारी हुई। होनी चाहिए, अगर हैदराबाद बम ब्लास्ट या अन्य घटनाओं में उसकी संलिप्तता के पुख्ता सबूत जांच एजेंसियों के पास हैं। उसे जांच पड़ताल के लिए दक्षिण के उन राज्यों में ले जाया गया है जहां वह आतंकी घटनाएं हुई। बच गए हैं तो उसके परिवार के लोग। पांच युवा भाई, तीन बहनें और गंभीर बीमारी से ग्रस्त बूढ़ी मां। वे मानने को तैयार नहीं कि मंजर किसी भी गैरकानूनी घटना में शामिल हो सकता है। उर्दू में गोल्ड मेडलिस्ट मंजर तो क्रिकेटर बनना चाहता था। क्या से क्या हो गया!..

राजीव कुमार नये डीजीपी

रांची : भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी राजीव कुमार झारखंड के नौवें डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) बनाये गए हैं। गुरुवार को आयोजित एक सभा में कुमार ने गौरी शंकर रथ से डीजीपी का प्रभार लिया।

राज्य में जेल प्रशासन उपेक्षित : हाईकोर्ट

रांचीः हाइकोर्ट ने जेल प्रशासन में कुव्यवस्था को चिन्हित करते हुए राज्य सरकार की भूमिका पर नाराजगी जतायी है। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि राज्य में जेल प्रशासन के पास कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे यह पता चले कि कितने आरोपी या कैदी औपबंधिक जमानत लेकर फरार हैं। कोई देखने सुननेवाला नहीं है। जब कोई जेल में आता है, तो उसकी इंट्री की जाती है।

सीबीआई ने झारखंड विधानसभा से कागजात जब्त किया

रांचीः राज्यसभा चुनाव 2010 में हॉर्स ट्रेडिंग की जांच कर रही सीबीआई ने झारखंड विधानसभा से महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किये हैं। एसके झा के नेतृत्व में सीबीआइ अधिकारियों का एक दल गुरूवार शाम करीब पांच बजे विधानसभा पहुंचा।

बजट का झारखंड में चौतरफा विरोध

रांची : संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार द्वारा पेश आम बजट का झारखंड राज्य में विरोध किया जा रहा है। अधिकांश जिलों में केन्द्र सरकार का विरोध किया गया।