jharkhand tribes

ग्रामसभा से अनुमोदित वनाधिकार के तहत झारखंड में 45 प्रतिशत दावे को सरकार ने किया निरस्त

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 05/12/2018 - 16:41
Ranchi : वनाधिकार अधिनियम, 2006 लागू होने के बाद झारखंड जैसे राज्य में वन भूमि पर अपनी आजीविका संचालन करने वाले आदिवासी परिवारों को उन जमीन पर मालिकाना हक देने की बात कही गई. कई वन क्षेत्र में रहने वाले परिवारों में उक्त कानून आने के बाद काफी उत्साह का माहौल दिखा, लेकिन कानून के लागू होने के 10 साल बाद भी वन क्षेत्र में रहने वाले परिवार को अब तक दावा प्रस्तुत करने के बाद भी वन विभाग से पट्टा नहीं मिल सका. जिन्हें पट्टा मिला भी है उसे ग्रामसभा के अनुमोदन के बाद दिए गये भू-सीमा क्षेत्र में कटौती करते हुए दिया गया है. यह हालात सिर्फ झारखंड में ही नहीं बल्कि पूरे देश में ऐसी ही स्थिति है.

आदिवासी अधिकार को पूर्ण रूप से लागू करने की मांग को लेकर जयस करेगा एक अप्रैल को संसद का घेराव

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 03/27/2018 - 19:21

Ranchi : जयस के द्वारा रांची में आदिवासी आक्रोश रैली कर सत्ताधारी एवं विपक्षी रजनीतिक दल के नेता को खुली चुनैती दी थी. अदिवासी अधिकार को लेकर आदिवासी युवा किसी तरह का समझौता करने के मुड में नहीं दिख रहे थे. इस रैली में भारी संख्या में आदिवासी युवा शमिल होकर कुर्मी और तेली समाज को आदिवासी की सूची में शमिल करने की अनुंशसा का विरोध किया गया था. साथ ही जयस के द्वारा संसद घेराव कार्यक्रम की भी तैयारी की जा रही थी. जयस ने झारखंड में युवाओं के बीच एक अलग पहचान बनाने की कोशिश की है.

आक्रोश महारैली 10 को, 50 कार्यकर्ता करेंगे बीजेपी कार्यालय की सुरक्षा

Publisher NEWSWING DatePublished Fri, 03/09/2018 - 19:17

Ranchi : कुरमी और तेली जाति को आदिवासी का दर्जा दिये जाने की अनुशंसा करने के खिलाफ जय आदिवासी युवा शक्ति के आह्वान पर 10 मार्च को हरमू मैदान में आदिवासी संगठनों के द्वारा रैली आहूत की गयी है. रैली को देखते हुए जिला प्रशासन अपनी तैयारी में जुटा हुआ है.  बता दें कि सीएनटी आंदोलन के समय 9 जून 2017 को निकाली गयी रैली में शामिल लोगों ने बीजेपी कार्यालय पर पत्थर चलाये थे. घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसे लेकर आयोजकों के साथ-साथ जिला प्रशासन भी सशंकित है.

कुर्मी को आदिवासी में शामिल करने की अनुशंसा करने वाले नेताओं को 2019 में नेस्तानाबूद कर देंगे - जयस (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Thu, 03/08/2018 - 19:58

Ranchi : राज्य में जहां आदिवासी की श्रेणी में शामिल होने के लिए तेली और कुर्मी समाज अपनी राजनीतिक ताकत दिखा चुकी है, वहीं आदिवासी समाज इसे आज अपने हक और अधिकार में दूसरे समुदाय के द्वारा सेंधमारी के रूप में देख रहा है. कुर्मी समाज अनुसूचित जनजाति में शामिल होने के प्रयास के तहत दो सांसदों और 42 विधायकों के समर्थन पत्र मुख्यमंत्री को सौंपने के बाद आदिवासी जनमानस आक्रोशित है और हस्ताक्षर करने वाले सांसद और विधायकों का राज्य भर में 200 से अधिक सभा और पुतला दहन हो चुका है.

सरकार की अनदेखी और कुदरत की मार झेल रही ये आदिम जनजाति

Publisher NEWSWING DatePublished Sat, 02/17/2018 - 19:00
Ranchi : हम जिंदगी कैसे जी रहे हैं कभी गांव आकर देखिए. स्कूल, सड़क, बिजली-पानी तो दूर स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में जान तक गंवानी पड़ती है. गुमला के दिरगांव पंचायत से पांच मंदबुद्धि बच्चों को लेकर रांची के रिम्स इलाज के लिए पहुंचे बुधमान खड़िया एक सांस में ये बोलकर खमोश हो जाते हैं. तब साथ में आए मंदबुद्धी कमलदेव मुंडा (15) और रामनाथ खड़िया (17) उनका चेहरा देखने लगता है.

प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासी समुदाय के स्वामित्व का अधिकार है या नहीं प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट और सरकार की राय विरोधाभासी

Publisher NEWSWING DatePublished Tue, 01/23/2018 - 11:36

जानें आदिवासी होने और नक्सली होने के बीच के संबंध और इन्हें लेकर सरकार की नीतियों के साथ ही कुछ खास मामलों में सुप्रीम कोर्ट के जवाब

Ranchi: 'प्राकृतिक संसाधनों पर आदिवासी समुदाय के स्वामित्व का अधिकार है' वर्तमान समय में यह प्रश्न अपने आप में जितना पेचीद

पेसा कानून में ही छिपा है झारखंड के विकास का सूत्र : बंदी उरांव (देखें वीडियो)

Publisher NEWSWING DatePublished Sun, 01/14/2018 - 12:56
Ranchi:  बंदी उरांव 16 जनवरी 2018 को 86 साल के हो जायेंगे. बंदी झारखंड के एक ऐसे शख्सियत हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी अपने विचारों, सिद्धांतों और झारखंडी जनमानस के हित के लिए लगा दिया. इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कुछ ऐसे काम किये हैं जो कि संवैधानिक प्रावधान के रूप में पूरे देश में लागू है. 1980 में गिरिडीह जिले के एसपी के पद पर रहते हुए बंदी उरांव ने नौकरी से त्यागपत्र देकर कार्तिक उरांव के प्रेरणा से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की. पेसा कानून को लेकर इन्होंने लंबा संघर्ष किया है और यह मानते हैं कि झारखंड का विकास तभी हो सकता है अक्षरशः पेसा कानून राज्य में लागू हो.