opinion

राहुल गांधी ने सच ही तो कहा...

Submitted by NEWSWING on Fri, 01/19/2018 - 14:33

Firdaus Khan

अच्छे लोगों के लिए पूरी दुनिया ही अपना परिवार हुआ करती है. उन्हें किसी से कोई बैर नहीं होता. वे जहां जाते हैं वहां के लोगों को अपना बना लिया करते हैं

राजबाला के बहाने जानें कि एक नौकरशाह सत्ता का अभय पाकर कितना ‘दबंग’ हो सकता है

Submitted by NEWSWING on Wed, 01/17/2018 - 15:50

Roopak Raag

एक नौकरशाह के सर पर यदि सरकार की छत्रछाया हो तो वह कितना दबंग और मनमौजी हो सकता है, इसे झारखण्ड की परिस्थिति में समझ सकते हैं. राज्य कार्यपालिका की सर्वोच्च पद पर बैठे अफसर ही नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाते फिरें तो लोकतंत्र में शासन व्यवस्था का बेड़ा गर्क होकर रहेगा. डेढ़ दशक के बाद हमारे राज्य की मुख्य सचिव ने सरकार द्वारा मांगे गये सवालों का जवाब दिया है. करीब 30 रिमाइंडर के बाद.

क्या जिस व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हों, उसे देश का मुख्य न्यायाधीश बनाया जाना चाहिए?

Submitted by NEWSWING on Tue, 01/16/2018 - 17:50

Shanti Bhushan

27 अगस्त को प्रधान न्यायाधीश जस्टिस जेएस खेहर का कार्यकाल पूरा हो रहा है. उनके बाद इस पद पर जस्टिस दीपक मिश्रा को मनोनीत करने का प्रस्ताव खुद जस्टिस खेहर ने दिया था, जिस पर राष्ट्रपति और केंद्र की मंजूरी भी मिल चुकी है. पर क्या उन्हें सिर्फ इस आधार पर इतने बड़े पद की ज़िम्मेदारी सौंपनी चाहिए कि वे सुप्रीम कोर्ट में मौजूद वरिष्ठतम जज हैं?

गुजरात: मोरबी, वांकानेर के टाइल्स उद्योग में दिहाड़ी मजदूरों का हो रहा है शोषण, ठेकेदारी प्रथा के चलते श्रमिक बने बंधुआ मजदूर

Submitted by NEWSWING on Tue, 01/16/2018 - 10:42

रीता विश्वकर्मा

श्रमिक शोषण और उन्हें बन्धक बनाकर बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराने की प्रथा अंग्रेजों के जमाने से लेकर वर्तमान स्वाधीन राष्ट्र में भी कायम है. अंग्रेजी शासनकाल में हिन्दुस्तानियों के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए उनका और उनके श्रम का शोषण अंग्रेज किया करते थे. चाहे वह देश में रहा हो या अन्य मुल्कों में ले जाकर श्रम कानून की अनदेखी कर हिन्दुस्तानियों का शोषण करना आम बात रही. तब की बात और थी तब देश गुलाम था लेकिन अब स्वाधीन भारत में यदि ब्रितानियाँ हुकूमत के कारनामों की पुनरावृत्ति हो तो यह अवश्य ही शोचनीय विषय बन जाता है.

क्या साल 2018 के अंत तक नक्सलवाद-उग्रवाद मुक्त होगा झारखंड, या फिर बढ़ेगी समयसीमा

Submitted by NEWSWING on Sat, 01/13/2018 - 14:40

Manjusha Bhardwaj

Ranchi : झारखंड अलग राज्य बनने के साथ ही उग्रवाद और नक्सलवाद से प्रेरित हिंसाएं इसे विरासत में मिली थीं. तभी से बहुत कोशिशों के बावजूद भी इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है. झारखंड में समस्याओं की कोई कमी नहीं है. शिक्षा, स्वास्थ्य, भुखमरी, कुपोषण जैसी समस्याएं तो हैं ही लेकिन इन सबसे बड़ी और गंभीर समस्या है- नक्सलवाद. इसने झारखंड राज्य के लिए बड़ी चुनौती पेश की है.

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