अपराधी को सजा दिलाने की ऐसी जिद कि आठ साल से सह रहे दर्द, स्पाइनल कॉर्ड में अटकी गोली का नहीं करा रहे ऑपरेशन

Publisher NEWSWING DatePublished Wed, 05/16/2018 - 15:20

आठ साल पहले शिक्षक रवीन्द्र राय को अपराधियों ने मारी थी गोली जो स्पाइनल कॉर्ड में अटकी है

Muzzafarpur : 29 सितंबर 2010 को मनियारी थाना अंतर्गत सुस्ता माधोपुर निवासी शिक्षक रवींद्र राय को अपराधियों ने गोली मारी थी. अपराधियों को सजा दिलाने के लिए आठ साल से दर्द सहकर शिक्षक स्पाइनल कॉर्ड में फंसी गोली नहीं निकलवा रहे हैं. पीएमसीएच के एक डॉक्टर की गवाही नहीं होने के कारण शिक्षक को अबतक इंसाफ नहीं मिला है. इंसाफ के इंतजार में वे पिछले 8 वर्षों से स्ट्रेचर व व्हील चेयर के सहारे जिंदगी काट रहे हैं. गोली उनके स्पाइनल कॉर्ड में फंसी है. डॉक्टरों का कहना है कि गोली निकालने में जान भी जा सकती है या फिर अपंगता हो सकती है. इसलिए शिक्षक इंसाफ मिलने तक गोली न निकलवाने का निर्णय लिया है. उनका कहना है कि गोली मारने वाले अपराधी को सजा मिल जाये उसके बाद वे ऑपरेशन करा लेंगे. उस दौरान अगर जान भी चली जाती है तो कोई मलाल नहीं होगा.

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29 सितंबर 2010 को अपराधियों ने शिक्षक रवींद्र राय को मारी थी गोली

पवन भगत के शूटर अरविंद राय व साथियों ने 29 सितंबर 2010 को मनियारी थाना अंतर्गत सुस्ता माधोपुर निवासी शिक्षक रवींद्र राय को गोली मार दी थी. गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गये थे. उनको इलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था. गोली उनकी कमर के पास स्पाइनल कॉर्ड में अटक गई. उनका इलाज पीएमसीएच के चिकित्सक डॉ. केके केसरी ने किया. मामला दर्ज होने के बाद कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के दौरान कई लोगों की गवाही भी हुई. एक महत्वपूर्ण गवाही डॉ. केसरी की भी थी. लेकिन, करीब 8 वर्ष गुजर जाने के बाद भी उनकी गवाही नहीं हो सकी है, जिस कारण कोर्ट में शूटर अरविंद राय व उसके भाई विशिष्ट राय के खिलाफ ट्रायल लंबित है.

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एसपीपी ने पीएमसीएच के अधीक्षक को लिखी चिट्ठी, गवाही के लिए डॉक्टर को भेजने का किया आग्रह

पीड़ित शिक्षक की स्थिति ठीक नहीं है. दर्द से उनका हाल बेहाल है. जिसे देखते हुये विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) कृष्णदेव साह ने पीएमसीएच के अधीक्षक को पत्र लिखकर उन्हें मामले की गंभीरता से अवगत कराया और गवाही के लिए डॉ. केके केसरी को कोर्ट भेजने का अनुरोध किया है. एसपीपी के अनुसार डॉ. केसरी ने उनका इलाज किया है. मेडिकल रिपोर्ट भी दी है. इसलिए मामले में उनकी गवाही बेहद जरूरी है. एसपीपी ने कहा कि यदि वे नहीं आ सकते हैं तो इलाज के समय उनके साथ काम किए दूसरे चिकित्सक, कंपाउंडर या अन्य स्टाफ को भी कोर्ट भेज दें, जो डॉ. केसरी की मेडिकल रिपोर्ट में हैंडराइटिंग की पहचान कर दे. मामला एडीजे-6 की कोर्ट में विचाराधीन है.

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पीड़ित शिक्षक ने खुद के प्रयास से थानाध्यक्ष से गवाही दिलवायी

शिक्षक मामले में बहुत दिन बीत जाने के बाद भी तत्कालीन मनियारी थानाध्यक्ष राजेश कुमार की गवाही नहीं हो पाई थी. बार-बार कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद भी थानाध्यक्ष गवाही देने नहीं पहुंची. फिर पीड़ित शिक्षक ने अपने स्तर से पहल शुरू की. उस वक्त राजेश कुमार शाहपुर पटोरी के थानाध्यक्ष बन चुके थे. एंबुलेंस से पीड़ित शिक्षक राजेश कुमार के पास पहुंचे और गवाही देने की गुहार लगाई, जिसके बाद थानाध्यक्ष ने जाकर गवाही दी. मामले में केस के आईओ दारोगा कृष्णा राम की भी गवाही हो चुकी है.

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