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मांडू के बागी विधायक जेपी पटेल की पहचान इतनी कि वे टेकलाल महतो के बेटे हैं : फागू बेसरा

Ranchi : झारखंड विधानसभा चुनाव में जेएमएम के लिए मांडू सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. पार्टी के बागी विधायक जयप्रकाश भाई पटेल जल्द ही बीजेपी का दामन थामने जा रहे हैं.

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जाहिर है कि उन्हें यहां का प्रत्याशी बनाकर बीजेपी मांडू किला जीतने की तैयारी कर चुकी है. हालांकि बीजेपी के इस प्रयास को रोकने के लिए जेएमएम भी हर रणनीति पर काम कर रही है.

बताया जा रहा है कि पार्टी इस बार अपने बागी विधायक के खिलाफ पार्टी के केंद्रीय महासचिव फागू बेसरा को उतारने की तैयारी में है. उनके चुनाव लड़ने की संभावना, जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की नीतियों से बागी नेता की नाराजगी सहित कई मुद्दों पर उन्होंने न्यूज विंग संवाददाता ने बातचीत की.

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सवाल – मांडू विधायक जेपी पटेल बीजेपी में शामिल होने वाले हैं. बताया जा रहा है कि वे पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की नीतियों से नाराज थे. क्या यह सच है ?

जवाब – उनका कहना पूरी तरह से गलत है. दरअसल, समय से पहले किसी को ज्यादा चीज मिल जाए, तो वह अति महत्वाकांक्षी हो जाता है. लोकसभा चुनाव में गिरीडीह सीट मांगना इसी महत्वाकांक्षा की एक कड़ी थी.

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय टेकलाल महतो के उत्तराधिकारी के रूप में पहला हक उनके बेटे का था. लेकिन महतो जी की पत्नी के कहने पर हेमंत जी ने जेपी पटेल को मांडू का टिकट दिया था.

इतना ही नहीं, हेमंत ने न केवल उनका डोर टू डोर चुनावी प्रचार किया बल्कि उसे कैबिनेट में भी जगह दी. ऐसे में यह कहना कि हेमंत जी की नीतियां जेपी पटेल के खिलाफ थी, सही नहीं है.

सवाल – स्वर्गीय टेकलाल महतो के बेटे का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के लिए कितना घातक है ?

जवाब – स्वर्गीय टेकलाल महतो, गुरूजी जैसे नेताओं का झारखंड राज्य के निर्माण में बहुत योगदान था. वहीं जेपी की स्थिति क्या है, यह सभी जानते हैं. उनकी पहचान बस इतनी है कि वे स्वर्गीय टेकलाल महतो के बेटे हैं.

जब हेमंत जी ने उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया, तो उन्हें झारखंड में पहचान मिली. फागू बेसरा ने कहा कि टेकलाल महतो हमेशा भगवाकरण वाली बीजेपी की नीतियों के खिलाफ थे.

उनका मानना था कि बीजेपी पूंजीपतियों की जमात वाली पार्टी से ज्यादा कुछ नहीं है. अब जब उनके बेटे बीजेपी में जाने वाले हैं, तो तय है कि उनकी पहचान भी अब नहीं रहेगी. ऐसे में उनका जाना पार्टी के लिए कोई घातक नहीं है.

सवाल – लोकसभा चुनाव में हजारीबाग संसदीय सीट (मांडू विधानसभा सीट शामिल है) कांग्रेस के हिस्से में थी. महागठबंधन के तहत जेएमएम का कांग्रेस को समर्थन मिला था. चुनाव बाद वोटों को देखें, तो मांडू में बीजेपी और कांग्रेस के बीच 1 लाख से अधिक वोटों का अंतर था. तो क्या माना जाए, कि कांग्रेस प्रत्याशी को कांग्रेस का समर्थन नहीं मिला था ?

जवाब – ऐसा नहीं है. जेएमएम कार्यकर्ताओं ने पूरी तरह से महागठंबधन धर्म का पालन किया था. लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दा ज्यादा हावी रहता है. बीजेपी के राष्ट्रवाद के नारे पर जो धुर्वीकरण हुआ, उसका असर केवल हजारीबाग ही नहीं रांची सीट में भी देखा गया.

जहां तक वोटों के अंतर की बात है, तो इसके पीछे बीजेपी द्वारा ईवीएम में छेड़छाड़ भी एक कारण था. उन्होंने कहा कि अगर बूथ स्तर का हिसाब लिया जाए, तो मांडू सीट पर यूपीए उम्मीदवार को जेएमएम ने करीब 55,000 वोटों का लाभ दिया है.

सवाल – पार्टी के अंदर आप एक बड़े पद हैं. क्या आप मांडू सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेगे ?

जवाब – टेकलाल महतो जब जिंदा थे, तभी से वे मांडू क्षेत्र में आंदोलनरत हैं. टेकलाल जी गिरीडीह से सांसद थे, उस समय भी उन्होंने मांडू से दावेदारी पेश की थी. हालांकि पार्टी के अंदर गुरूजी ने जो निर्णय लिया, उसका उन्होंने पालन किया.

क्षेत्र में भविष्य का नेता मानकर उन्होंने भी जेपी पटेल को प्रोजेक्ट किया. लेकिन अब वे बागी हो गये हैं, पार्टी अगर उन्हें टिकट देती है, तो वे निश्चित रूप से मांडू सीट जेएमएम के खाते में ही लायेंगे.

सवाल – बदलाव रैली की सफलता पार्टी के लिए कितनी महत्वपूर्ण है ?

जवाब – जेएमएम की बदलाव रैली चुनाव की दहलीज में हुई है. निश्चित रूप से रैली की सफलता सरकार के बदलाव का संकेत है. रैली में राज्य से युवाओं, महिलाओं, दलितों की उमड़ी भीड़ से संकेत है कि जेएमएम से लोगों की उम्मीद बढ़ गयी है.

गैर झारखंडी को राज्य का सीएम बनना, बीजेपी की स्थानीय नीति, किसानों और विस्थापितों के अधिकारों का हनन जैसे मुद्दें से हर क्षेत्र के लोग नाराज हैं. बदलाव रैली की भीड़ सरकार की इसी नाराजगी का संकेत है.

सवाल – महागठबंधन पर आपका क्या कहना है. क्या यह धरातल पर नजर आयेगा ?

जवाब – पिछले लोकसभा में तय हुआ था कि युवा नेता हेमंत सोरेन के नेतृत्व में महागठबंधन चुनाव लड़ेगा. सीट शेयरिंग पर सभी दलों से हेमंत जी की बातचीत चल रही है. जल्द ही महागठबंधन का स्वरूप धरातल पर नजर आयेगा.

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