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कश्मीरी किशोर ने खिलौने से किया था विमान का अपहरण

श्रीनगर, 20 मार्च | दुनिया में विमान अपहरण के सबसे पुराने मामलों में से एक को पिस्तौल के खिलौने से एक 16 वर्षीय कश्मीरी किशोर ने अंजाम दिया था। आज वह किशोर हासिम कुरैशी 59 वर्ष का हो चुका है और भारत तथा पाकिस्तान के बीच शांति की वकालत करता है।

हासिम ने इंडियन एयरलाइंस के श्रीनगर से जम्मू जाने वाले विमान का अपहरण एक पिस्तौल के खिलौने तथा लकड़ी के बने नकली ग्रेनेड से किया था। अपहरण कर वह विमान को लाहौर ले गया था।

हासिम ने कहा कि वह 1968 में अपनी बहन से मिलने पाकिस्तान गया था, जिसका विवाह पाकिस्तान में हुआ था।

हासिम ने आईएएनएस से कहा, "मेरी मुलाकात पेशावर में जेकेएलएफ के संस्थापक मकबूल भट से हुई। भट ने उसे कश्मीर की आजादी के लिए काम करने के लिए उकसाया।"

इसके बाद फिर वह पाकिस्तान गया, जहां उसे विमान का अपहरण करने का प्रशिक्षण दिया गया।

हासिम ने कहा, "मकबूल भट ने कहा कि कश्मीर की आजादी का मुद्दा उछालने के लिए हमें विमान का अपहरण करना चाहिए। एक सेवानिवृत्त पायलट जावेद मंटू ने मुझे फोकर फ्रेंडशिप विमान से परिचित कराया। वह मुझे चकलाला हवाईअड्डे लाया, जहां मैंने विमान को अंदर से देखा।"

इसके बाद सियालकोट सीमा से वह वापस कश्मीर आ गया।

हासिम ने बताया कि एक दिन अखबार में नकली पिस्तौल का विज्ञापन छपा। इसमें बताया गया था कि यह आपको चोरों से बचाने में मदद कर सकता है। उसने डाक से इसके लिए ऑर्डर दे दिया। इसके बाद उसने लकड़ी का एक ग्रेनेड बनाया और उसपर मेटलिक रंग कर दिया।

हासिम ने अपने चचेरे भाई के साथ 30 जनवरी 1969 के लिए श्रीनगर से जम्मू जाने वाले इंडियन एयरलाइंस के फोकर फ्रेंडशिप विमान का टिकट कटाया।

विमान में सवार होने के बाद वह कॉकपिट में गया तथा पायलट की कनपटी पर पिस्तौल का खिलौना सटाकर उसे विमान का अपहरण हो जाने की घोषणा की तथा विमान को पाकिस्तान लेकर चला गया। चालक दल सहित विमान में कुल 34 लोग सवार थे।

लाहौर हवाईअड्डे पर विमान दो फरवरी 1969 तक रहा। इस दौरान समाचार की सुर्खियों में छाने के मकसद से पाकिस्तान सरकार से बातचीत जारी रखा गया। आखिर में विमान में आग लगा दी गई।

करीब तीन महीने तक पाकिस्तान में हीरो जैसा सम्मान पाने के बाद उसे अप्रैल 1971 में गिरफ्तार कर लिया गया और 1980 में छोड़ा गया।

हासिम ने कहा कि छोड़े जाने के बाद पाकिस्तान के खुफिया अधिकारियों ने उससे कहा कि वह कश्मीरी युवकों को गोली चलाने का प्रशिक्षण देने में मदद करे।

हासिम के मुताबिक, "उनलोगों ने कहा कि कश्मीर में उग्रवाद फैलने के बाद पाकिस्तान आक्रमण कर कश्मीर पर कब्जा कर लेगा। इससे यह स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान अपनी छिपी लड़ाई लड़ने के लिए कश्मीरियों को खोज रहा है।"

हासिम ने कहा, "मैं अगस्त 1986 में पाकिस्तान से हॉलैंड चला गया और 2000 में कश्मीर लौटा।"

हासिम आज चाहता है कि कश्मीर के मुद्दे को 20 वर्षो के लिए छोड़ दिया जाए और इस दौरान दोनों देशों के बीच फैली नफरत को कम किया जाए। (शेख कयूम)

This Article Posted on: March 21st, 2012 by admin in : Sections.

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