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|| रणजीत वर्मा ||
रांची : खूंटी में बेलगाम होती आपराधिक घटनाओं की जांच कर लौटी टीम को चौंकाने वाले कई तथ्यों का पता चला है। तहकीकात के क्रम में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) की टीम ने पाया कि ग्रामीणों का पुलिस से संपर्क लगातार कटता जा रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों से पूछताछ की गयी तो टीम को पता चला कि अपनी खानापूर्त्ति करने के लिए कई थाना क्षेत्र में निर्दोष ग्रामीणों को झूठे मुकद्दमे दायर कर उन्हें जेल भेजा गया। इस संबंध में टीम को ग्रामीणों के कुछ मामलों का जिक्र भी किया है।
पुलिस की इस तरह की कार्रवाई का परिणाम हुआ कि ग्रामीणों में पुलिस के प्रति रोष बढता गया। टीम के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस तरह की घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना देने का काम बंद कर दिया है। अपराध से पहले पुलिस को किसी तरह की सूचना नहीं मिल पा रही है। टीम में शामिल दूसरे सहयोगी ने इस संबंध में कहा कि 90 प्रतिशत से ज्यादा सूचनाओं की जानकारी पुलिस को आम जनता से मिलती है। अब जनता जब सहयोग करना छोड़ दे तो समझ सकते हैं स्थिति क्या बन जाएगी।
टीम का एक वाकया पता चला मुरहू से सात किमी अंदर बसे गांव के एक हाट में। ग्रामीणों से बातचीत के बाद सीआईडी की टीम ने जाना कि पुलिस इन ग्रामीणों पर नक्सलियों का सहयोग करने का आरोप लगाती है। ग्रामीणों का कहना था कि वो छोटे दुकान लगाकर कुछ पैसे कमा लेते हैं। अगर वो नक्सलियों द्वारा बंदूक के बल पर मांग किए जाने पर नाश्ता पानी या तम्बाकू उपलब्ध नहीं करावाएं तो उनका जीना दुर्भर हो जाएगा। इस बात पर पुलिस उन्हें तरह तरह से प्रताडित करती है।
इधर, ग्रामीणों की इस बात पर सीआईडी टीम के सदस्य सहमत हैं। उन्होंने इस पक्ष में तर्क दिया कि पुलिस जब ऐसे अंदरूनी इलाकों में जांच अभियान के लिए जाती है तो उनके पास एक बड़ा दल होता है। पुलिस की सुरक्षा के लिए। तब सवाल ये उठता है कि ये ग्रामीण नक्सलियों की मांग पूरी नहीं करें तो क्या करें। बहरहाल टीम ने रिपोर्ट तैयार कर ली है जिसे वरिष्ठ अधिकारियों के सुपुर्द किया जाएगा। हालांकि इसे अंतिम रिपोर्ट पुष्ट नहीं किया गया है।
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