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पटनाः नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की बार-बार चेतावनी के बावजूद पटना एयरपोर्ट के इर्द-गिर्द पेड़ों की कटाई नहीं हुई. अब डीजीसीए के आदेश पर एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) ने तय किया है कि पटना एयरपोर्ट पर 16 अगस्त से बड़े विमानों का परिचालन बंद हो जायेगा.
सिर्फ एटीआर विमानों (छोटे विमान) का ही परिचालन हो सकेगा. बड़े विमानों के लिए लैंडिंग डिस्टेंस कम होने की वजह से परेशानी हो रही थी. बड़े विमानों का परिचालन बंद करने के बारे में एक-दो दिनों में सभी एयरलाइंस कंपनियों को नोटिस मिल जायेगा.
पटना एयरपोर्ट के रनवे की कम लंबाई होने से दो साल पहले ही इसे 11 खतरनाक हवाई अड्डों में शामिल किया जा चुका है. यहां रनवे का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है, क्योंकि एयरपोर्ट के पास चिड़ियाघर के बड़े-बड़े पेड़, सचिवालय की घड़ी टॉवर, फुलवारीशरीफ का बूचड़खाना आदि स्थित हैं. एएआइ ने पटना एयरपोर्ट के रनवे की लंबाई को नये सिरे से अधिसूचित किया है. इसमें लंबाई कम कर दी गयी है.
रनवे की कुल लंबाई 7500 फुट है, लेकिन 6409 फुट रनवे ही उपयोग में आ पाता है. यहां का लैंडिंग रनवे 025 छोर से 5971.12 फुट और 07 छोर से 5501.96 फुट है. टेक ऑफ करनेवाले रनवे की लंबाई 6409 फुट है. जबकि जंबो जेट, एयरबस 300 या एयर बस 321 आदि विमानों के लिए रनवे की लंबाई कम-से-कम 9000 फुट होनी चाहिए. रनवे को री-नोटिफाइ करने पर 07 छोर से 1141 मीटर और 25 छोर से 1289 मीटर कर दिया गया है.
पेडों की अधिक लंबाई रहने से लैंडिंग रनवे का सिर्फ 60 फीसदी ही उपयोग हो पाता है. रनवे के छोटा होने से पटना एयरपोर्ट पर पायलट विमानों की स्मूथ लैंडिंग नहीं करा पाते हैं. पायलट ब्रेक लगा कर ही फ्लाइट को उतारते हैं, जिससे यात्रियों को लैंड करते समय झटका महसूस होता है. 17 मई को एएआइ के चेयरमैन ने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर कहा था कि चिड़ियाघर के पेड़ों की कटाई करें, नहीं तो बोइंग और एयरबस पटना एयरपोर्ट पर ऑपरेट नहीं कर सकेंगे.
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