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पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर बरौनी थर्मल पावर विस्तारित परियोजना के लिए उरमा पहाड़ी टोला कोल ब्लॉक देने व टेपरिंग कोल लिंकेज ( कोल ब्लॉक से उत्पादन शुरू न होने तक अस्थायी लिंकेज) के प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद दिया है. इसके साथ ही बरौनी थर्मल वार प्रोजेक्ट को स्टेट सेक्टर का एकमात्र पावर प्रोजेक्ट बताते हुए इससे अबाध उत्पादन जारी रखने में सहयोग मांगा है.
पत्र में उन्होंने कहा है कि बरौनी थर्मल पावर प्रोजेक्ट से 500 मेगावाट बिजली उत्पादित होने की उम्मीद है. राज्य सरकार प्रोजेक्ट को हर हाल में निर्धारित समय सीमा 2014 तक पूरा कर लेना चाहती है.
यहां से अबाध बिजली उत्पादन के लिए जरूरी है कि इसे पूरा कोयला मिले. उरमा पहाड़ी टोले में 2018 से कोयले की खुदाई शुरू होने के आसार हैं. केंद्र बरौनी थर्मल पावर प्रोजेक्ट को 2018 के बाद भी कम-से-कम तीन वर्षो तक कोयले की आपूर्ति करे.
19 जुलाई को प्रधानमंत्री की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे पत्र का जवाब देते हुए उन्होंने इस प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि बरौनी थर्मल पावर को पर्यावरणीय स्वीकृति जनवरी, 2013 से पहले प्राप्त कर लेनी है.
इसीलिए 31 अगस्त, 2012 तक कोयला मंत्रालय किसी कोयला खदान से कोल लिंकेज दे दे, तभी इस तय अवधि में पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त की जा सकेगी. चूंकि बरौनी थर्मल पावर राज्य सरकार की अपनी परियोजना है और यह बिहार के लिए काफी महत्वपूर्ण है. इस नाते कोयला मंत्रलय को आवश्यक निर्देश दिया जाये.
बिहार सरकार के मुख्य सचिव नवीन कुमार ने भी इसी मुद्दे पर कोयला मंत्रलय के सचिव एके श्रीवास्तव को पत्र लिख कर इस तकनीकी पहलु की ओर ध्यान दिलाया था. 27 जुलाई को लिखे पत्र में मुख्य सचिव ने कोयला सचिव को कहा था कि 27 जून, 2006 को ही बरौनी थर्मल पावर को कोल लिंकेज देने के लिए बिहार राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से प्रक्रिया शुल्क जमा किया जा चुका है.
जहां तक उरमा पहाड़ी टोले का सवाल है, खुदाई से पहले सर्वेक्षण का काम मार्च, 2013 तक किसी एजेंसी को दिया जा सकता है. ऐसे में यह जरूरी है कि अविलंब कोल लिंकेज की प्रक्रिया पूरी की जाये.
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