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'सरकार सांप्रदायिक उन्माद फैलाना चाहती है'

गांधीजी, बिरसा मुंडा और कार्तिक उरांव ने कभी नहीं की सामाजिक विद्वेष की बात

News Wing

Ranchi, 12 August : दिनांक 11 अगस्त 2017 को राज्य के कई अखबारों के पहले पन्ने पर झारखंड सरकार का एक विज्ञापन प्रकाशित किया गया जिसमें गांधीजी का हवाला देकर एक वक्तव्य छपा है: यदि ईसाई मिशनरी समझते हैं कि ईसाई धर्म में धर्मान्तरण से ही मनुष्य का आध्यात्मिक उद्धार संभव है, तो आप यह काम मुझसे या मेरे निजि सचिव महादेव देसाई से क्यों नहीं शुरु करते. क्यों इन भोले-भाले, अबोध, अज्ञानी, गरीब और वनवासियों के धर्मान्तरण पर जोर देते हैं. ये बेचारे तो ईसा और मुहम्मद में भेद नहीं कर सकते. और न आपके धर्मोंपदेश को समझने की पात्रता रखते हैं. वे तो गाय के समान मूक और सरल हैं. जिन भोले-भाले अनपढ़ दलितों और वनवासियों की गरीबी का दोहन करके आप ईसाई बनाते हैं वे ईसा के नहीं "चावल" अर्थात पेट के लिए ईसाई होते हैं.'

विज्ञापन में प्रकाशित कथन गांधी जी का नहीं, संघ का

हम सरकार के इस करतूत से आहत, स्तब्ध और विचलित हैं और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. विज्ञापन में प्रकाशित कथन गलत और झूठा है. गांधी जि ने आदिवासियों के धर्मान्तरण को लेकर ऐसा कोई वक्तव्य नहीं दिया है और न ही कहीं लिखा है. यह कथन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक देवेन्द्र स्वरूप की किताब “गांधी जी : हिन्द स्वराज से नेहरु तक” से लिया गया है जिसमें धर्मांतरण पर गांधीजी के विचार को संघ के एजेंडे के अनुसार तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है. ये गांधीजी के शब्द नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भाषा है. इस विज्ञापन ने यह साबित कर दिया है कि रघुवर दास की सरकार भारत के संविधान के अनुसार नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सांप्रदायिक एजेंडे पर काम कर रही है और गांधी जी के नाम पर झारखंड को अशांत करने एवं बांटने का प्रयास कर रही है.

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झूठा सांप्रदायिक विज्ञापन संविधान पर हमला

हम मानते हैं कि यह झूठा सांप्रदायिक सरकारी विज्ञापन देश के संविधान पर हमला है और लोगों में द्वेष व नफरत फैलाने का प्रयास है. इस विज्ञापन को सरकार द्वारा हाल ही में कैबिनेट द्वारा पारित गैर-संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता बिल की कड़ी में देखना चाहिए जिसके द्वारा रघुवर दास की सरकार झारखंड की जनता को बांटने और झारखंड को अशांत करने का प्रयास कर रही है. झारखण्ड में हाल में हुई सांप्रदायिक घटनाओं में अल्पसंख्यकों के प्रति प्रशासन का उदासीन रवैया भी सरकार के नियत को दर्शाती है. यह भी निंदनीय है कि सरकार अमन और इंसानियत की बात न कर के समाज को बांटने में लगी है.

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बिरसा मुंडा-कार्तिक उरांव के विचारों का अपमान

झारखंड सरकार का यह विज्ञापन न सिर्फ झूठा है बल्कि स्वर्गीय कार्तिक उरांव के विचार के भी खिलाफ है जिनके सपनों को साकार करने की बात विज्ञापन में की गयी है. कार्तिक उरांव ने तो अपनी पुस्तक “ आदिवासी हिन्दू नहीं हैं” में कहा है कि हिन्दू मिशनरी द्वारा आदिवासियों को वनवासी हिन्दू कहना उनका अपमान है. जिस तरह से इस सरकारी विज्ञापन में आदिवासियों और दलितों को “मूक” और “अनपढ़” कहा गया है यह बेहद आपत्तिजनक है. यह उनका अपमान है और हम इसकी घोर निंदा करते हैं. इस झूठे उन्मादी विज्ञापन में शांतिप्रिय गांधीजी और झारखण्ड के नायक बिरसा मुंडा और कार्तिक ओरांव का सहारा लेकर उनकी सांप्रदायिक छवि प्रस्तुत करने की कोशिश की गयी है. यह न सिर्फ उनका अपमान है बल्कि आपराधिक कृत्य है. यह देश के सभी शांतिप्रिय नागरिकों एवं संविधान का अपमान है. सी.एन.टी-एस.पी.टी एक्ट में संशोधन के खिलाफ एक साथ संघर्ष कर झारखंड की जनता ने रघुवर सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया. इस बात से विचलित और परेशान होकर सरकार अब झारखंड के आदिवासियों को बांटने का प्रयास कर रही है. हमें आशंका है कि भाजपा सरकार द्वारा जनता के पैसे का दुरुपयोग कर छपवाए गए सांप्रदायिक भड़काऊ विज्ञापन के कारण झारखंड में कानून-व्यस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ दंगे भड़क सकते हैं. चूंकि इस विज्ञापन में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की तस्वीर है. अतः इस भडकाऊ, झूठे और सांप्रदायिक विज्ञापन के लिए हम उन्हें जिम्मेदार मानते हैं.

हम यह मांग करते हैं कि ःः

- गांधीजी के गलत कथन को छापने के लिए रघुवर दास सार्वजनिक रूप से माफी मांगे.

- झारखंड उच्च न्यायालय सरकार के इस भडकाऊ, गैर संवैधानिक एवं सांप्रदायिक विज्ञापन पर स्वतः संज्ञान ले क्योंकि झारखंड की कानून व्यस्था खतरे में पड़ सकती है .

- सरकार गैर संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता बिल को वापस ले.

वक्तव्य जारी करनेवाले सामाजिक कार्यकर्ता : स्टेन स्वामी, मेघनाथ, ज्यां द्रेज , बलराम, विनोद सिंह, वासवी कीड़ो, बी.बी चौधरी, जेम्स हेरेंज, सिराज दत्ता, धीरज कुमार, अंकिता अगरवाल, अफजल अनीस, नदीम खान, आलोका कुजूर, बिन्जू अब्राहम, अंजोर भास्कर, प्रवीर पीटर, जियाउल्ला, देवमाल्या, प्रांजल धान्दा, कुमार संजय

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