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झारखंड धर्म स्वतंत्र बिल पास, अब धर्म परिवर्तन से पहले लेना होगा डीसी से आदेश

News Wing

Ranchi, 12 August: झारखंड विधानसभा के चालू मॉनसून सत्र में झारखंड स्वतंत्र विधेयक 2017 पास हो गया. पास होते ही अब यह बिल कानून का रूप ले लिया. बिल को सदन में सरयू राय ने पेश किया. बिल पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन और स्टीफन मरांडी ने इसे प्रवर समिति में पेश करने का प्रस्ताव दिया. लेकिन सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया. 

बिल को लेकर किसने क्या कहा

हेमंत सोरेन- विधेयक को लाने के पीछे एक साज़िश है. नहीं तो इसे आनन फ़ानन में पास कराने की क्या जरूरत थी. 

स्टीफन मरांडी- जबरन धर्म परिवर्तन पर दंड का प्रावधान तो पहले से ही है. फिर इस विघधेयक का क्या औचित्य है. धर्म परिवर्तन के लिए उपायुक्त से अब अनुमति लेनी होगाी जो आसान नहीं होगा. यह विधेयक मौलिक अधिकार का हनन है. विधेयक का नाम ही गलत है. 

राधा कृष्ण किशोर- यह विधेयक महत्वपूर्ण विधेयकों में से एक है. झारखंड निर्माण के वक्त ही इस विधेयक को पास होना चाहिए था. 2010 में राज्य में ईसाई धर्म के लोगों की आबादी 10 लाख 13 हजार थी. जो 2014 में बढ़ कर 14 लाख 18 हाजर हो गयी. पूरे देश की 30 फीसदी बढ़ोतरी झारखंड में ही है. भोले-भाले लोगों को लालच देकर जमकर धर्म परिवर्तन का काम झारखंड में हुआ है.   



भानु प्रताप- धर्म परिवर्तन सिर्फ झारखंड में नहीं हो रहा है. सनातन धर्म ही सिमटता जा रहा है. यह बिल सभी धर्म की रक्षा करेगा. सभी दल को इस बिल का समर्थन करना चाहिए . 



साइमन मरांडी - यह विधेयक असमंजस बढ़ाने का काम करेगा. बिल को लाने की कोई जरूरत नहीं थी. इस विधेयक से झगड़ा बढ़ेगा . 

इरफान अंसारी- इस राज्य में कानून की धज्जियां उड़ायी जा रही है. और ये काम खुद सरकार कर रही है. आखिर उपायुक्त होता कौन है धर्म परिवर्तन की इज्जात देने वाला.  हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सबको लड़ाए बीजेपी भाई. 

 

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