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सीएजी की रिपोर्ट पेशः सरकारी वायदे झूठे, घोषणाएं हवा-हवाई - एक

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RANCHI, 12 AUGUST : झारखंड बनने के बाद से ही सभी सरकारों ने निवेश और औद्योगिक विकास को लेकर तरह-तरह के वायदे-घोषणाएं किए. बाबूलाल मरांडी से लेकर रघुवर दास तक औद्योगिक क्षेत्र में निवेश बढ़ाने को लेकर सक्रिय रहे. अर्जुन मुंडा तो दर्जनों मंत्रियों-अफसरों के कुनबे के साथ कई देशों का दौरा तक कर आए. वर्तमान सीएम रघुवर दास पद संभालते ही उद्योग स्थापना को लेकर कड़े और अाक्रामक फैसले लेने लगे. भूमि अधिग्रहण कानूनों में बदलाव से लेकर मोमेंटम झारखंड और कंपनियों के हितों में प्रशासनिक सख्ती रघुवर सरकार की खासियत रही है. इन्हीं के कार्यकाल में गोला, बड़कागांव और साइको में पुलिस फायरिंग हुई. जिनमें सात लोग पुलिस की गोली से मारे गये. दर्जन भर से अधिक लोग घायल हुए. रघुवर सरकार ने उद्योगों की स्थापना को प्राथमिक एजेंडे में रखा और राज्य के विकास को औद्योगिक विकास से लिंक किया.

सीएजी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें 
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9  ( सुनिये/देखिये वित्तीय गड़बड़ी के बारे में क्या कहा सीएजी नें )

 
उद्योग व निर्माण क्षेत्र का योगदान सात प्रतिशत घटा

शनिवार को विधानसभा में पेश हुए सीएजी की रिपोर्ट सरकार के अौद्योगिक विकास के झूठे दावों की जमीनी हकीकत बयां करती है. वर्ष 2012 में सरकार ने नई औद्योगिक नीति लागू की थी. दावा किया था कि इससे राज्य में औद्योगिक विकास की गति कई गुना तेज होगी. सीएजी ने नई और पुरानी उद्योग नीति के संदर्भों में औद्योगिक विकास का आंकलन किया है. रिपोर्ट के अनुसार जीएसडीपी यानी राज्य सकल घरेलु उत्पाद की वृद्धि दर में बीते पांच-छह वर्षोंं में भारी गिरावट आई है. वित्तीय वर्ष 2010-11 में जीएसडीपी में वृद्धि का दर 26.50 प्रतिशत था. वर्ष 2015-16 में यह घट कर 14.63 प्रतिशत हो गया. साफ है कि वर्ष 2010-11 की तुलना में 2015-16 में जीएसडीपी की वृद्धि दर में करीब 12 फीसदी की कमी दर्ज की गई. इसी दौरान जीएसडीपी में उद्योग और निर्माण क्षेत्र की भागीदारी और योगदान में भी लगातार कमी आयी. वर्ष 2010-11 में जीएसडीपी में उद्योग क्षेत्र का योगदान 42 प्रतिशत था अौर निर्माण क्षेत्र का योगदान 21.55 प्रतिशत था. वित्तीय वर्ष 2015-16 में यह घट कर क्रमश : 34.78 अौर 14.17 प्रतिशत हो गया. साफ है राज्य के विकास में उद्योग क्षेत्र का योगदान 7.22 प्रतिशत की कमी अायी अौर निर्माण क्षेत्र के योगदान में 7.38 प्रतिशत की कमी अायी. आखिर औद्योगिक विकास की सारी कोशिशों की जमीनी सच्चाई इतनी दुर्भाग्यपूर्ण क्यों है? सरकार ने हजारों करोड़ रुपये निवेश मेलों, विदेश दौरों और रोड शो में राजकोष से खर्च किए. उसका हिसाब सरकार को देना चाहिए.

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