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शराब की कमाई नहीं छोड़ना चाहती सरकार

मनोज कुमार

साध्य और साधन की पवित्रता पर जोर देने वाले बुद्ध, महावीर और गांधी के देश में आज शराब की विक्री कैसे सुनिश्चित हो, इसके लिए सरकार कृत संकल्पित है. यूं तो वैदिक काल से ही शराब का प्रचलन रहा है, किन्तु शराब का सेवन गलत है तथा यह कई बुराइओं का जनक है. आशय शराब अन्य बुराइओं का मार्ग प्रशस्त करता है. इससे कानून की भी समस्या खड़ी होती है और सड़क दूर्घटना में भी काफी इजाफा होती है. उपद्रवकारी तत्व इसका सहारा लेकर लोगों को उपद्रव हेतु तैयार करते हैं. वजह इसके सेवन से विवेक शून्य हो जाता है. अतएव शराब की बिक्री बंद होनी चाहिए या इसकी बिक्री पर नियंत्रण होना चाहिए. लोग शराब का सेवन न करें, इसके लिए सरकार दोनों माध्यम अपना सकती है. पहला सकारात्मक माध्यम यानि जागरूकता फैला कर. लोगों को इससे होने वाले नुकसान को बता कर आदि. दूसरा नाकारात्मक माध्यम यानी कानून द्वारा यानि दंडात्मक कार्रवाही द्वारा. मुझे लगता है कि दोनों माध्यम को अपना कर शराब के सेवन को नियंत्रित कर सकते हैं. एक जनहित याचिका में उच्चत्तम न्यायालय नेशनल हाई वे पर शराब की दूकान लगाने पर रोक लगा दी और जो था उसे हटाने का आदेश दे दी. ऐसा आदेश न पारित हो, इसके लिए सरकार ने कई तर्क दी, जो अब्यवहारिक ही नहीं अपितु अनैतिक भी था. खैर माननीय न्यायालय ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले से कुछ छूट लेने हेतु सरकारें खूब एड़ी चोटी लगाई और सेवन सिस्टर के कुछ राज्यों को छूट प्राप्त हुयी. इधर, कुछ दिन पूर्व उत्तराखण्ड राज्य भी कुछ छूट हासिल करने में सफल रही. बिहार का मामला तो अदभुत है, पहले आमदनी बढ़ाने हेतु प्रखण्ड-प्रखण्ड शराब की दुकानें खुलवाई गयी और बाद में पूर्ण शराब बन्दी लागू की गयी. दोनों वक्त NDA की सरकार और दोनों वक्त नीतीश जी ही सीएम. कुछ लोगों का यह भी मानना है कि इस पूर्ण बन्दी से बिहार सरकार की आर्थिक स्तिति खस्ता हो गयी थी और यह खस्ता हाल एक प्रमुख वजह थी कि नीतीश जी NDA में जाने को मजबूर हुये. अभी कहने को तो "एक राष्ट्र, एक कर" यानि GST लागू की गयी और बड़े ताम झाम से, पर इससे शराब को बाहर रखा गया. केंद्र की सरकार हो या राज्य की सरकारें शराब से होने वाली मोटी कमाई को छोड़ना नहीं चाहती है. अभी झारखण्ड सरकार ने शराब की बिक्री अपने हांथ में ले ली. क्या आश्चर्य है कि इस विनिवेशीकरण के दौर में जहां सरकार सार्वजनिक उपक्रमों को बेच रही है, वहीं झारखण्ड की सरकार शराब बेच रही है. शराब की कमाई से भले जनकल्याणकारी कार्य किये जाएं, पर यह उचित नहीं. साधन और साध्य दोनों को पवित्र व नैतिक होना चाहिए. यही विशेषता भारत और गांधी को क्रमशः अन्य देशों से और अन्य महापुरुषों से श्रेष्ठ सिद्ध करता है.

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