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अपने खेलने के दिनों में अक्सर क्रिकेट बोर्ड से टकराव मोल लेने वाले शोएब ने रावलपिंडी में पत्रकारों से कहा कि पाकिस्तान में विदेशी टीमों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने नहीं बुलाना चाहिये.
उन्होंने कहा कि हमारी अवाम ही महफूज नहीं है और देश में जंग चल रही है. ऐसे हालात में टीमों को बुलाना जोखिमभरा होगा. उन्होंने कहा कि अगर किसी विदेशी टीम पर फिर हमला हो जाये तो क्या होगा. मैं पीसीबी को सलाह दूंगा कि विदेशी टीमों को देश में ना बुलाये क्योंकि हम किसी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की मेजबानी की स्थिति में नहीं हैं. बोर्ड के एक अधिकारी ने इस पर कहा कि शोएब को कुछ मसलों की संवेदनशीलता समझनी चाहिये.
उन्होंने कहा कि हर किसी को पाकिस्तान की जमीनी हकीकतों का इल्म है लेकिन सरेआम कुछ बातें नहीं की जाती लेकिन चूंकि वह रिटायर हो चुका है लिहाजा उसे अपनी राय जाहिर करने का हक है हालांकि इससे पीसीबी का कोई भला नहीं होने वाला.
श्रीलंकाई टीम पर मार्च 2009 में लाहौर पर आतंकी हमला होने के बाद किसी विरोधी टीम ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया. पीसीबी को अपनी घरेलू श्रृंखलायें संयुक्त अरब अमीरात में खेलनी पड़ी हैं.
जाका अशरफ ने पिछले साल अक्तूबर में पीसीबी अध्यक्ष का पद संभाला है, तभी से विदेशी टीमों को पाकिस्तान आने के लिये मनाने का दौर जारी है. अप्रैल में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को दो मैचों की श्रृंखला खेलने बुलाया था लेकिन आखिरी मौके पर ढाका की एक अदालत के रोक लगाने के बाद श्रृंखला रद्द हो गई. बोर्ड को शोएब का यह बयान भी नागवार गुजरा है कि बोर्ड में बैठे 70 बरस के हुक्मरान पाकिस्तान प्रीमियर लीग का आयोजन नहीं करा सकते.
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