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भवष्यि में एचआईवी नहीं रहेगा लाईलाज ।

न्यूज विंग डेस्क पांच
हाल ही में एचआईवी के साथ पैदा हुए एक दक्षिण अफ्रीकी बच्चे ने एचआइवी और उससे जुड़े सभी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को आश्चर्य में डाल दिया है. एड्स वायरस के प्रभावी उपचार शुरु होने के सिर्फ एक साल बाद उस बच्चे ने साढ़े आठ साल तक दवा नहीं ली. इसके बावजूद भी आज वह पूरी तरह स्वस्थ है. जबकि अब तक हुए रिसर्च में यही कहा जाता रहा है कि एचआईवी से पीड़ित किसी भी व्यक्ति को एड्स से सुरक्षित रहने के लिए लाइफटाइम एंटीरेट्रो वायरल दवाएं लेनी पड़ती है. लेकिन इस दस साल के बच्चे के मामले ने इसके ईलाज और अनुसंधान से जुड़े प्रत्येक लोगों के लिए उम्मीद की एक नयी किरण जगायी है. वैज्ञानिक अब बच्चे पर रिसर्च करने में लगे हैं. ताकि यह पता चल सके कि बच्चे में ऐसा क्या है, जो एड्स की दवा खाए बिना भी वह स्वस्थ रह रहा है. वह कैसे पुरी तरह ठीक हो गया. इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है. उस बच्चे में एड्स बीमारी का कोई लक्षण मौजूद नहीं है. एक अनुमान के अनुसार आज विश्व भर में करीब 37 मिलियन लोग एचआइवी वायरस से संक्रमित हैं.
कुछ जानकारों का मानना है कि यह दुर्लभ और आश्चर्यचकित करनेवाला मामला है और इससे यह नहीं माना जा सकता कि इस बीमारी का ईलाज इतना आसान है.
पिछले हफ्ते पेरिस में इंटरनेशनल एड्स सोसायटी का एक कांफ्रेंस आयोजित हुआ. इस कांफ्रेंस में सोसायटी की प्रेसिडेंट लिंडा-गेल बेकर ने माना कि यह एक ऐसा मामला है जिसने बहुत सारी संभावनाओं और प्रश्नों को जन्म दिया है. फिर भी लोगों में ईलाज के जरिये जीवन की संभावना तो जगायी ही जा सकती है.
हालांकि उस बच्चे का नाम और लिंग गुप्त रखा गया है. जो कि ईलाज और चिकत्सिकीय शोध की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. इस दौरान वैज्ञनिक एचआइवी पीड़ित नवजातों के ऊपर जन्म के कुछ सप्ताह तक दवाइयों के असर को रिकॉर्ड किया गया. परीक्षण करते समय उन्हें कुछ हफ्ते एंटीरेट्रोवायरल दवाएं दी जाती, फिर बंद कर दी जाती थी. दवाएं बंद करने के बाद उनपर एचआइवी के स्तर की जांच की जाती थी. यूनाइटेड नेशन एचआइवी/एड्स एजेंसी ने बताया कि 19.5 मिलियन लोगों का अभी ईलाज चल रहा है. ईलाज छोड़ देने के बाद उनमें वायरस से संक्रमित होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. परंतु इस बच्चे में यह थ्योरी विपरीत हो गयी. बच्चे को एचआइवी अपनी मां से मिला था. बच्चा जब नौ हफ्ते का था तो उसे एंटीरेट्रोवायरल देना शुरू किया गया. 40 हफ्ते तक ईलाज चलने के बाद ईलाज में बाधा उत्पन्न हो गयी और इसे रोक दिया गया. इसके बाद भी डॉक्टरों ने इस बच्चे पर लगातार अपनी नजर बनाये रखी. समय बीतता गया और वह बच्चा अब 9.5 वर्षों का हो गया है. डॉक्टरों ने जब उसका रूटीन चेकअप किया तो वे आश्चर्यचकित हो गये. बच्चे में एचआइवी संक्रमण के कोई भी लक्षण नहीं थे.
मेलबोर्न विश्वविद्यालय में एचआईवी की विशेषज्ञ व आईएएस के एचआईवी क्योर एंड कैंसर फोरम की सह-अध्यक्ष शेरोन लेविन के अनुसार मानव प्रतिरक्षा प्रणाली एचआईवी प्रतिकृति को कैसे नियंत्रित कर सकती है जब उपचार में निरंतरता रही हो, जांच और शोध का विषय है। फिर भी इस मामले ने डॉक्टरों को इस बीमारी से निजात पाने की दिशा में हौसला अफजाई तो की ही है.

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