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12वीं पास मॉडल पर आया था मारुति के फाउंडर का दिल, आज है केंद्रीय मंत्री

मधुर भंडारकर की फिल्म 'इंदू सरकार' शुक्रवार को रिलीज हुई. फिल्म में इंदिरा गांधी और उनके छोटे बेटे संजय गांधी के किरदार दिखाए गए हैं..

12वीं पास मॉडल पर हुए थे फिदा...

रांची, 29 जुलाई : 14 दिसंबर 1973 को इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी अपने स्कूल फ्रेंड की प्री-वेडिंग पार्टी में गए थे. वहीं उनकी मुलाकात 17 साल की मेनका से हुई. मेनका ने तब 12वीं पास करने के बाद कॉलेज में एडमिशन लिया था. कॉलेज में उन्हें ब्यूटी क्वीन के खिताब से नवाजा गया, जिसके बाद उनके पास मॉडलिंग के ऑफर आने शुरू हो गए. मेनका ने डीसीएम कंपनी के लिए टॉवेल का एड किया था. इसके बाद उनकी पढ़ाई छूट गई थी. उनके लोकसभा एफिडेविट के मुताबिक उनकी एजुकेश्नल क्वालिफिकेशन सिर्फ इंटरमीडिएट तक ही है. संजय का दोस्त मेनका का कजिन भाई था. पहली मुलाकात से ही दोनों के बीच अच्छी कैमिस्ट्री जम गई. उसके बाद दोनों अकसर एकदूसरे से मिलने लगे. मशहूर राइटर खुशवंत सिंह की ऑटोबायोग्राफी - 'ट्रुथ, लव एंड अ लिटिल मैलिस' के मुताबिक संजय एक शर्मीले लड़के थे. वे रेस्टोरेंट की जगह अपने घर पर मिलना पसंद करते थे. इसी वजह से वे कभी मेनका को अपने घर ले आते तो कभी खुद उनके घर चले जाते. 1974 में उन्होंने मेनका को अपने घर लंच पर बुलाया था, जहां उन्होंने उनकी मुलाकात अपनी मां इंदिरा से भी करवाई. 29 जुलाई 1974 को दोनों की पीएम आवास पर सगाई कर दी गई. मेनका आज मोदी सरकार में महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय संभाल रही हैं.

'मारुति' के फाउंडर थे संजय गांधी, ऐसे शुरू हुई कंपनी

संजय ऑटोमोटिव इंजीनियर थे. उन्होंने इंग्लैंड के क्र्यू शहर स्थित रॉल्स रॉयस कंपनी के साथ तीन साल तक काम किया था. 1971 में उन्होंने अपनी मां की मदद से 'मारुति मोटर्स लिमिटेड' कंपनी की शुरुआत की. उनका सपना था देश की जनता के लिए ऐसी कार बनाना जो कि सस्ते में खरीदी जा सके. कंपनी को सफल बनाने के लिए संजय गांधी ने जर्मन कंपनी वोक्सवैगन से कॉलेबोरेशन के लिए बात की थी, लेकिन बातचीत आगे बढ़ नहीं पाई. उसी साल हुए बांग्लादेश लिबरेशन वॉर ने उन्हें इतना व्यस्त कर दिया कि इस कंपनी के लिए वक्त नहीं निकाल सके. 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी तो इस कंपनी को बंद कर दिया गया. तत्कालीन उद्योग मंत्रालय में सेक्रेटरी रहे वी कृष्णमूर्ति ने 'मारुति लिमिटेड' की जगह 'मारुति उद्योग' की स्थापना की. तत्कालीन भारत सरकार ने जापानी कंपनी सुजुकी से कॉन्टेक्ट कर कार की डिजाइन पेश करने की बात कही. 1983 में पहली 'मारुति 800' मार्केट में आई.

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