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नई दिल्ली: आतंकी घटनाओं के लिए आने वाले विदेशी फंड का इस्तेमाल अय्याशी पर किया जा रहा है! हाल ही में देश हुई बम धमाकों की घटनाओं की जांच के दौरान यह बात सामने आई है. छोटे-मोटे आतंकी ही नहीं बल्कि इंडियन मुजाहिदीन के वरिष्ठ कमाण्डर भी विदेशों से आ रहे फंड का इस्तेमाल अपनी अय्याशी के लिए कर रहे हैं.
8 जून को पुणे की यरवदा जेल में कत्ल किए गए कतील सिद्दिकी से पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई है. कतील से एटीएस के जांचकर्ताओं ने पूछा कि उसने आईएम में नए लोगों की भर्ती के लिए मिले 1 लाख रूपए कहां खर्च किए? पहले तो उसने कुछ भी बताने से इनकार किया लेकिन कड़ाई से पूछने पर उसने बताया कि उसने पैसों को दो लड़कियों पर खर्च किया था. कतील ने यह भी बताया था कि उसकी आईएम की विचारधारा में कोई दिलचस्पी नहीं है बल्कि उसकी दिलचस्पी फंड का खुद पर इस्तेमाल में है.
सिद्दीकी दिल्ली में 2011 में जामा मस्जिद के सामने हुई फायरिंग और 2010 के चिन्नास्वामी स्टेडियम बम ब्लास्ट केस मे आरोपी था. एटीएस अधिकारी के मुताबिक हाल में पकड़े गए कई संदिग्ध आतंकियों ने बताया कि आईएम का चीफ यासीन भटकल ने बिल्डर बनने के सपने को साकार करने के लिए एक अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉजेक्ट में 14 लाख रूपये लगाए भी थे. ये रकम उसे जेल में बंद इंडियन मुजाहिदीन के आतंकियों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए दी गई थी.
एटीएस को पता चला है कि भटकल कई और योजनाओं में पैसे लगाना चाहता था. शायद आईएम को नियंत्रित करने वाले लोग भटकल पर आंख मूंदकर विश्वास करते हैं.
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