BazaarBook.com
Traders Deed : Shoppers Need
On Line Bazaar Info
|| रणजीत वर्मा ||
रांची : झारखंड, पश्चिम बंगाल एवं उडीसा से आदिवासी लड़कियों का घरेलू कामगार के रूप में राजधानी दिल्ली समेत अन्य राज्यों में जाने का आंकड़ा बढ़ा है। इसपर कड़ी निगरानी के लिए एक कानून बनाने की मांग दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से तीनों राज्यों के प्रतिनिधिमंडल की है। यह कानून दिल्ली घरेलू कामगार कल्याण एवं सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2012 के रूप में होगा।
इसपर चर्चा के लिए सोमवार को मुख्यमंत्री एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री किरण वालिया के बीच अहम बैठक होगी और आगे इसपर तचीत करने दोनों तीनों राज्य का दौरा करेंगी। इस बात की जानकारी झारखंड राज्य महिला आयोग की सदस्य वासवी कीडो ने एक प्रेस कांफ्रेंस में दी।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून के प्रारूप में महाराष्ट्र घरेलू कामगार अधिनियम के कुछ भाग शामिल किए गए हैं। जिसके तहत राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड का गठन होगा। फिलहाल दिल्ली सरकार ने तस्करी मामले में कार्रवाई के लिए एक समिति गठित की है पर इसका विरोध या जा रहा है क्योंकि इनके मुताबिक इसमें नियोक्ता (प्लेसमेंट) एजेंसियों की संख्या ज्यादा है।
कीडो ने कहा, ‘‘यह पूरी तरह ट्रैफिकिंग का मामला है। प्लेसमेंट एजेंसियॉं हजारों की संख्या में इन आदिवासी लड़कियों को झारखंड, ओडीशा
एवं पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों से अन्य राज्यों में अपने नेटवर्क के जरिए पहुंचाते हैं इसलिए वो तो अपने हित की बात करेंगे। इस समिति में इन कामगारों के लिए संघर्ष करने वाले लोग कम हैं।’’
प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य जस्टीन बेग ने कहा, ‘‘असंगठित क्षेत्र सामाजिक सुरक्षा कानून 2008 में ऐसे घरेलू कामगारों के हित में कई प्रावधान हैं पर इसका पालन नहीं होता।’’ इनके मुताबिक तस्करी के मुद्दे पर करीब तीन दर्जन गैर सरकारी संस्थाएं काम करते हैं पर उनके लिए यह कोई खास मुद्दा नहीं है।
Post new comment