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न्यायमूर्ति कर्णन जेल भेजे गए, जमानत नहीं मिली

कोलकाता/नई दिल्ली: अदालत की अवमानना के दोषी कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी.एस.कर्णन को बुधवार को जेल भेज दिया गया। न्यायमूर्ति को मंगलवार को कोयम्बटूर में गिरफ्तार किया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना के दोषी विवादित न्यायाधीश को बीते नौ मई को छह महीने जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद से ही वह फरार थे। मंगलवार को गिरफ्तारी के बाद पूर्व न्यायाधीश को एक विमान से वरिष्ठ अधिकारी राज कन्नौजिया के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल पुलिस कोलकाता लेकर आई और प्रेसिडेंसी जेल में बंद कर दिया।

पूर्व न्यायाधीश को हवाईअड्डा से सीधे जेल ले जाया गया। चेन्नई हवाईअड्डे पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह 'भ्रष्टाचार के खिलाफ' लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस से कोई शिकायत नहीं है, क्योंकि वे जानते हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं किया है।

इससे पहले दिन में सर्वोच्च न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी.एस. कर्णन की छह महीने कैद की सजा सुनाए जाने के आदेश को निलंबित करने से इनकार कर दिया, साथ ही उन्हें जमानत देने से भी इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की सदस्यता वाली अवकाश पीठ ने कहा, "हम सजा निलंबित नहीं कर सकते, क्योंकि यह सजा सात सदस्यों वाली पीठ ने दी है।"

न्यायमूर्ति कर्णन के वकील मैथ्यू जे.नंदुम्पारा ने पूर्व न्यायाधीश को जमानत देने की अपील की थी, जिस पर पीठ का यह फैसला आया।

न्यायमूर्ति कर्णन को तमिलनाडु के कोयंबटूर में पश्चिम बंगाल पुलिस ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था।

जब उन्होंने पीठ से कहा कि 'समानता' की मांग है कि उनके मुवक्किल को जमानत दी जाए, तो न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, "सभी समानता कानून तथा न्यायिक अनुशासन पर निर्भर करती है।"

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, "माफ कीजिए, यह नहीं हो सकता।"

सर्वोच्च न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ द्वारा बीते नौ मई को न्यायमूर्ति कर्णन को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराने तथा छह महीने जेल की सजा सुनाने के 42 दिनों बाद पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी सामने आई है। न्यायमूति कर्णन को चेन्नई में मंगलवार को गिरफ्तार करने के बाद तत्काल पुलिस उन्हें लेकर कोलकाता रवाना हो गई थी। वह इस महीने की शुरुआत में सेवानिवृत्त हुए।

इस बीच, बंगाल पुलिस की टीम ने कहा कि गिरफ्तारी से तीन दिन पहले उन्हें कोयंबटूर में कर्णन के छिपने के स्थान का पता चला।

कन्नोजिया ने चेन्नई में हवाईअड्डे पर आईएएनएस से कहा, "वह कहां छिपे हुए हैं, इसका पता हमें तीन दिन पहले लगा। हम उनके नजदीकी लोगों के फोन कॉल को ट्रैक कर रहे थे और हमारे भी अपने सूत्र हैं।"

उनके मुताबिक, अपने सेवाकाल के दौरान इस मामले से निपटना उनके लिए मामला बेहद अनोखा रहा और 'हो सकता है कि आने वाले वक्त में किसी अन्य पुलिस अधिकारी का इस तरह के मामले से सामना न हो।'

कन्नौजिया ने कहा, "कर्णन का पता लगाना कठिन काम था। यह कठिन मामला था।"

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, "हमारी एकमत राय है कि न्यायमूर्ति कर्णन अदालत की अवमानना के दोषी हैं और उन्होंने गंभीर प्रकृति की न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।"

भारत के प्रधान न्यायाधीश तथा सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों पर आरोप लगाने को लेकर न्यायमूर्ति कर्णन को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया गया था।

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