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एनडीए के 'राष्‍ट्रपति उम्‍मीदवार' रामनाथ कोविंद कौन हैं: एक परिचय

नई दिल्ली: बीजेपी की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए घोषित उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और वर्तमान में बिहार के राज्यपाल का जन्म उत्तर प्रदेश कानपुर जिले के तहसील डेरापुर के गांव परौंख में अक्टूबर 1945 में हुआ था। आज बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया गया है।
रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। जानिए, उनके बारे में सबकुछ।
रामनाथ कोविंद पेशे से वकील रहे हैं। 1991 में बीजेपी में शामिल हुए। 8 अगस्त 2015 को उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

रामनाथ कोविंद का परिचय

​रामनाथ कोविंद वर्तमान में बिहार के राज्यपाल हैं
रामनाथ कोविन्द भारतीय जनता पार्टी के राजनेता हैं
वे बीजेपी से राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं
अनुसूचित जाति के हैं राम नाथ कोविन्द
कोविन्द का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है
दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत से करियर की शुरुआत
1977-1979 तक दिल्ली हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील रहे
1991 में बीजेपी में शामिल हुए, 1994 में राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए
2000 में यूपी से फिर राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए
लगातार 12 साल तक राज्यसभा सदस्य रहे
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके हैं राम नाथ कोविन्द
बीजेपी दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कोली समाज के अध्यक्ष रहे हैं
अगस्त 2015 में बिहार के राज्यपाल पद पर नियुक्ति हुई

जन्म परिचय
रामनाथ कोविंद का जन्म कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में 1945 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई। कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दिल्ली में रहकर तीसरे प्रयास में आईएएस की परीक्षा पास की, लेकिन मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी।

जून 1975 में आपातकाल के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में वकालत से कॅरियर की शुरुआत की। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद रामनाथ कोविंद तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद वे भाजपा नेतृत्व के संपर्क में आए। कोविंद को पार्टी ने वर्ष 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए।

वर्ष 1993 व 1999 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा में भेजा। पार्टी के लिए दलित चेहरा बन गये कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे। घाटमपुर से चुनाव लड़ने के बाद कोविंद लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे। राज्यसभा सदस्य के रूप में क्षेत्र के विकास में लगातार सक्रिय रहने का ही परिणाम है कि उनके राज्यपाल बनने की खबर सुनते ही लोग फोन पर बधाई देने लगे।
वर्तमान में बिहार के राज्यपाल

वर्ष 2007 में पार्टी ने रामनाथ कोविंद प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए। रामनाथ कोविंद इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के साथ महामंत्री रह चुके हैं। अगस्त 2015 में बिहार के राज्यपाल के तौर पर भी उनके नाम की घोषणा अचानक ही हुई थी।

मकान को बारातशाला के रूप में किया दान
बिहार के राज्यपाल बनाए गए रामनाथ कोविद तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। परौख गांव में कोविद अपना पैतृक मकान बारातशाला के रूप में दान कर चुके हैं। बड़े भाई प्यारेलाल व स्वर्गीय शिवबालक राम हैं।

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