Skip to content Skip to navigation

बिहार में अब लोग चखेंगे 'नीरा' का स्वाद

पटना: अगर आप बिहार आकर 'ताड़ी' का स्वाद लेने के मूड में हैं, तो इसे अब भूल जाइए। सरकार अब ताड़ और खजूर से निकलने वाले पेय पदार्थो को 'नीरा' के रूप में पेश करने जा रही है। अगले महीने यानी मई से बिहार में 'नीरा' उत्पादन का काम प्रारंभ हो जाएगा। राज्य सरकार ने अगले महीने से नीरा की बिक्री शुरू करने का फैसला किया है।

बिहार सरकार ने नीरा उत्पादन के लिए 12 जिलों में उत्पादक समूहों का गठन कर लिया है, साथ ही उत्पादन को सुचारु रूप से चलाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना पर अपनी मंजूरी भी दे दी है।

सरकार ने एक दर्जन जिलों में नीरा उत्पादन योजना की जिम्मेदारी 'जीविका' के हाथों में दी है। इनमें गया, नवादा, नालंदा, बांका, भागलपुर, समस्तीपुर, पटना, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सारण और जहानाबाद जिले शामिल हैं। इन जिलों में ताड़ के पेड़ सबसे ज्यादा हैं।

एक अनुमान के मुताबिक, बिहार में ताड़ के 92़19 लाख और खजूर के 40.09 लाख पेड़ हैं।

कहा जाता है कि नीरा पौष्टिक होता है और ताड़ी हानिकारक। ताड़ के पेड़ से निकलने वाले रस को नीरा कहा जाता है। नीरा में खनिज लवण, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह, विटामिन ए, बी एवं सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह पाचन शक्ति व रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

राज्य के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह ने आईएएनएस को बताया, "'जीविका' ने अब तक इस बारे में 250 से ज्यादा उत्पादक समूहों का गठन कर लिया है। उत्पादक समूह उत्पादकों से 'नीरा' का संग्रहण करेंगे, जिसके बाद इसे तीन हिस्सों में बांटा जाएगा। एक हिस्से का इस्तेमाल स्थानीय स्तर पर किया जाएगा, जिसके तहत 'नीरा' की बिक्री की जाएगी। दूसरे भाग का इस्तेमाल गुड़ बनाने में किया जाएगा। राज्य सरकार के मुताबिक इस योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा ध्यान नीरा को स्थानीय स्तर पर बेचने और गुड़ बनाने पर दिया जाएगा।"

इसके अलावा, राज्य सरकार बिहार राज्य दुग्ध उत्पादक परिसंघ (कंफेड) के जरिए हाजीपुर, नालंदा, भागलपुर और गया में प्रसंस्करण संयंत्र लगा रही है। हाजीपुर, गया और नालंदा में नीरा प्रसंस्करण और गुड़ का निर्माण होगा। भागलपुर में सिर्फ गुड़ का निर्माण होगा। इसके अलावा नीरा उत्पादक खुद भी नीरा की बिक्री या गुड़ का उत्पादन कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त किसी संस्थान से प्रशिक्षण हासिल करना होगा।

अगले कुछ महीनों में ही सुधा डेयरी की दुकानों से 'नीरा' और ताड़ के हलवे, मिठाई, गुड़ और दूसरे उत्पादों की बिक्री शुरू हो जाएगी।

उद्योग विभाग के प्रधान सचिव डॉ़ एस़ सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार ऐसे ही लोगों को लाइसेंस देगी, जो ताड़ के पेड़ पर चढ़कर दिखाएंगे। उन्होंने कहा कि लाइसेंस के लिए इच्छुक लोगों को जिला उत्पाद अधीक्षक को आवेदन देना होगा। आवेदन पर उस किसान की सहमति भी आवश्यक है, जिसके ताड़ के पेड़ों से नीरा निकाला जाएगा। साथ ही यह संकल्प पत्र भी भरना होगा कि हर हाल में मद्य निषेध कानून 2016 का पालन करेंगे।

उन्होंने कहा कि अगर ऐसी शिकायत मिली कि नीरा निकालने का लाइसेंस लेकर ताड़ी बनाई जा रही है तो इसके खिलाफ मद्य निषेध कानून के तहत कार्रवाई होगी। सिद्धार्थ ने कहा, "नीरा निकालने वाले सरकार द्वारा चिह्न्ति एजेंसियों को ही नीरा उपलब्ध कराएंगे या उससे खुद गुड़ या अन्य उत्पाद बनाएंगे।"

उद्योग मंत्री ने आईएएनएस से कहा कि हाजीपुर, भागलपुर, नालंदा और गया में प्रसंस्करण संयंत्र में परीक्षण जारी है और इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अप्रैल महीने में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू किए जाने के बाद राज्य सरकार ने ताड़ के उत्पाद ताड़ी के स्थान पर नीरा सहित अन्य उत्पादों का उत्पादन शुरू किए जाने की घोषणा की थी। -मनोज पाठक

Lead

मुंबई: मैक्सिम पत्रिका द्वारा किए गए सर्वेक्षण में दीपिका पादुकोण मैक्सिम हॉट 100 में पहले पायदान...

New Delhi: While many wait for the monsoon season to arrive, mucky roads and gloomy weather have...

नई दिल्ली: बॉलीवुड और सरकार के बीच करीबी बढ़ती जा रही है। सरकारी विज्ञापन में फिल्मी हस्तियां नजर...

डर्बी (इंग्लैंड): क्या आप जानते हैं कि महिलाओं के विश्व कप टूर्नामेंट का आयोजन पुरुषों के विश्व क...

loading...

Comment Box