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अकाली दल ने सिख दंगों को जनसंहार की संज्ञा दी

चंडीगढ़: पंजाब की मुख्य विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आस-पास के इलाकों में नवंबर, 1984 में हुई सिखों की हत्या 'निश्चित तौर पर जनसंहार' थी। पंजाब के पूर्व उप-मुख्यमंत्री अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने भारत सरकार से 'शर्मनाक तरीके से सिखों की हत्या को औपचारिक रूप से बर्बर जनसंहार स्वीकार किए जाने' की मांग की है।

कनाडा के ओंटारियो प्रांत की संसद द्वारा लिए गए 1984 के सिख दंगों को 'जनसंहार' घोषित करने के फैसले पर सुखबीर ने कहा कि उनकी पार्टी ओंटारियो के अधिकारियों और जनता के 'दया एवं एकता' की बेहद संवेदनशील कदम के लिए शुक्रगुजार है।

सुखबीर ने कहा, "उन्होंने इस शर्मनाक घटना को बिल्कुल सही संज्ञा दी है और हमारे आभार के हकदार हैं। इस निर्मम कृत्य के दोषियों के अलावा सभी भारतीय इसे जनसंहार मानते हैं।"

उन्होंने कहा, "इसमें कोई शक नहीं है कि कांग्रेस ने 1984 के सिख दंगों की साजिश रची और इस जनसंहार को अंजाम दिया। तत्कालीन सरकार में उच्च पदस्थ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस जनसंहार में सक्रिय थे, निर्देश दे रहे थे, यहां तक कि खुद जनसंहार करने में शामिल थे। तत्कालीन केंद्र सरकार के शीर्ष नेतृत्व से इस जनसंहार के आदेश आए थे।"

31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख सुरक्षा गार्डो द्वारा गोली मारकर हत्या करने के बाद पूरे देश में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे, जिसमें 3,000 से अधिक सिखों की हत्या कर दी गई थी।

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