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आप सरकार के कार्यो पर शुंगलू समिति ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग द्वारा नियुक्त एक समिति ने आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार पर नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद करने और सत्ता का गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया, जिसके बाद गुरुवार को आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर शुरू हो गया। आगामी 23 अप्रैल को होने वाले निगम चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा कांग्रेस ने आप पर जोरदार हमला किया, वहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने कहा है कि सारे आरोप बेबुनियाद हैं।

विभिन्न नियुक्तियों तथा अन्य फैसलों में अनियमितता के आरोपों को लेकर पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) वी.के.शुंगलू के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय समिति ने केजरीवाल सरकार की 404 फाइलों की समीक्षा की

शुंगलू समिति ने आप द्वारा की गई कई नियुक्तियों पर सवाल उठाए हैं, जिनमें स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी सौम्या जैन की दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक परियोजना में नियुक्ति भी शामिल है। समिति को रिपोर्ट आईएएनएस को भी मिली है।

समिति ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पत्नी के रिश्तेदार निकुंज अग्रवाल के स्वास्थ्य मंत्री के ओएसडी के रूप में नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं।

समिति ने मंत्रिमंडल के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसमें सरकारी 206, राउस एवेन्यू बंगले को आम आदमी पार्टी के कार्यालय के रूप में आवंटित किया गया साथ ही दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल तथा विधायक अखिलेश पति त्रिपाठी को बंगले के आवंटन पर भी सवाल उठाया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, "चूंकि भूमि एक 'औपचारिक' विषय है, इसलिए फैसले को अमान्य माना जाना चाहिए।"

आप ने कहा कि भाजपा तथा कांग्रेस इस रिपोर्ट को इसलिए उठा रही है, क्योंकि उसने (आप) ईवीएम के साथ की गई छेड़छाड़ के मुद्दे को उठाया है।

आप नेता दिलीप पांडे ने कहा कि चुनाव से पहले बेतुके आरोप लगाना भाजपा तथा कांग्रेस की आदतों में शुमार है।

पांडे ने कहा, "जब भी चुनाव सामने आता है, वे हमारे खिलाफ निराधार आरोप लगाने में लग जाते हैं, जो चुनाव खत्म होने के साथ ही खत्म हो जाते हैं। यह साल 2015, 2014 तथा 2013 में हो चुका है।"

आप नेता आशुतोष ने कहा कि भाजपा तथा कांग्रेस दिल्ली सरकार द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, मुफ्त पानी तथा सस्ती बिजली के क्षेत्र में किए गए काम से लोगों का ध्यान भटकाना चाहती है।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस्तीफे की मांग की।

माकन ने मांग की कि शुंगलू समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षो के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की जानी चाहिए।

कांग्रेस इस मामले को विधानसभा में नहीं उठा सकती, क्योंकि उसका एक भी विधायक नहीं है। इसलिए सिर्फ प्रेसवार्ता में अपनी बात रखना पार्टी की मजबूरी है।

माकन ने संवाददाताओं से कहा, "यदि केजरीवाल के पास थोड़ी भी नैतिकता बची है तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "इस संबंध में एक जांच शुरू की जानी चाहिए। केजरीवाल को जांच के दौरान पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"

माकन ने केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और बिना मंजूरी के आप नेताओं के विदेशी दौरे पर जनता के पैसे को बर्बाद करने का आरोप लगाया। माकन ने कहा कि उन्होंने आरटीआई के जरिए रिपोर्ट प्राप्त की है।

माकन ने यह भी कहा कि कांग्रेस समर्थक और कार्यकर्ता शुक्रवार को आप के खिलाफ दिल्ली के सभी 272 वार्डो में प्रदर्शन का आयोजन करेंगे। कार्यकर्ता शुंगलू समिति की रिपोर्ट में उजागर की गई गड़बड़ियों को लोगों तक पहुंचाएंगे।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा बीते साल अगस्त में दिल्ली प्रशासन में उपरज्यपाल को प्रमुखता दिए जाने के बाद तत्कालिक पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग ने तीन सदस्यीय शुंगलू समिति का गठन किया था। इसके अध्यक्ष पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) वी.के. शुंगलू बनाए गए।

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