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राँची: मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा ने कहा कि सूबे के किसानों को आत्मनिर्भर बनाना एवं उनको सहयोग प्रदान करना राज्य के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। किसानों को प्रोत्साहित करने एवं नई कृषि तकनीकों के विस्तार हर कृषक तक होना जरूरी है। बिरसा कृषि विष्वविद्यालय के अन्तर्गत वाला कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
इस अभियंत्रण महाविद्यालय में चार वर्षीय बीटेक इन एग्रीकल्चर इंजीनीयरिंग (B.Tech. in Agriculture Enginnering) के पाठ्यक्रम प्रारम्भ होंगे। प्रत्येक शैक्षणिक वर्ष में इस पाठ्यक्रम में चालीस छात्रों को दाखिला मिलेगा। उन्होंने अपेक्षा की कि इस कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय में पढ़ाई का स्तर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सहित संबंधित अखिल भारतीय नियंत्री संस्थाओं के मानक के अनुरूप होगा। उन्होंने कृषि तकनीक के विस्तार में तकनीकी शिक्षा की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि इस संस्थान से राज्य में कृषि अभियांत्रिकी को नया आयाम मिलेगा। मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा आज अपने आवास से इस कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय का ऑनलाईन शिलान्यास कर रहे थे। झारखण्ड विधान सभा अध्यक्ष्ज्ञ सीपी शिलान्यास स्थल पर मौजूद थे।
मौके पर उपस्थित सचिव, कृषि एवं गन्ना विकास विभाग, अरूण कुमार सिंह ने बताया कि इसके लिए आधारभूत संरचना मद में पूर्व परियोजना लागत 9 करोड़ 73 लाख 18 हजार रू0 की स्वीकृति राज्य सरकार ने दी है। इसे वर्ष 2013-14 तक पूरा किया जाना है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय की स्थापना के लिए कृषि एवं गन्ना विकास विभाग के द्वारा 2 करोड़ 31 लाख रू विमुक्त किया गया है। कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय, के लिये आधारभूत संरचना के लिए स्वीकृत राषि अन्तर्गत संबंधित नक्षा एवं प्राक्कलन पर सक्षम स्तर से अनुमोदन एवं तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के उपरांत तदनुसार बिरसा कृषि विष्वविद्यालय, राँची द्वारा खुली निविदा के माध्यम से लोक निर्माण विभाग संहिता के सुसंगत प्रावधानों के तहत विधिवत निर्माण कार्य कराया जाएगा। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जिम्मेवारी बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के संबंधित प्रशासनिक व अभियंत्रण कोषांग के पदाधिकारीगण की होगी।
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