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अमेरिका : यात्रा प्रतिबंध पर अदालती फैसले को न्याय विभाग की चुनौती

- मुस्लिम शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध का मामला -
वाशिंगटन: अमेरिकी न्याय विभाग ने मैरीलैंड के एक संघीय न्यायाधीश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संशोधित आव्रजन आदेशों पर रोक लगाने वाले फैसले के खिलाफ शुक्रवार को एक याचिका दायर की है। मीडिया में आई खबरों से यह जानकारी मिली। मैरीलैंड और इसी सप्ताह हवाई में दिए गए आदलती फैसलों में कहा गया है कि ट्रंप द्वारा मुख्यत: मुस्लिम शरणार्थियों को अमेरिका में प्रवेश पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध अमेरिकी संविधान का उल्लंघन है।

अदालत ने अपने फैसलों में ट्रंप और उनके सहयोगियों के बयानों का संदर्भ देते हुए कहा है कि इस विवादित आव्रजन आदेश का मुख्य उद्देश्य मुस्लिमों के साथ भेदभाव है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने हालांकि इस बात से इनकार किया है कि यह मुस्लिमों पर प्रतिबंध है और कहा है कि आतंकवाद का प्रसार करने वाले संदिग्ध देशों से आने वाले व्यक्तियों पर यह प्रतिबंध अमेरिका को आतंकवाद से बचाने के उद्देश्य से लगाया गया है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि जिन देशों पर प्रतिबंध लगाया गया है, वहां वीजा जारी करते हुए उचित जांच-परख नहीं होती।

अमेरिकी न्याय विभाग ने हालांकि अब तक हवाई के संघीय न्यायाधीश द्वारा बुधवार को दिए गए फैसले के खिलाफ याचिका दायर नहीं की है।

हवाई के संघीय न्यायाधीश का फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने इसे 'अभूतपूर्व तरीके से न्यायालय का अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर हस्तक्षेप' करार देते हुए आलोचना की और इसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ने की शपथ भी ली।

ट्रंप ने अपने प्रतिबंध वाले आदेश के पीछे 'राजनीतिक कारणों' का हवाला देते हुए कहा था, "हम इस मामले को जहां तक जरूरत होगी ले जाएंगे, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय तक शामिल है।"

राष्ट्रपति ट्रंप का यह आदेश यदि लागू हुआ तो ईरान, लीबिया, सीरिया, सोमालिया, सूडान और यमन के नागरिकों पर 90 दिन के लिए अमेरिका यात्रा पर प्रतिबंध लग जाएगा, जबकि शरणार्थियों के अमेरिका में प्रवेश पर चार महीने का प्रतिबंध लग जाएगा।

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